श्रीनगर और जम्मू के मेयरों को राज्य मंत्री का दर्जा मिला

Aug 22, 2019, 14:59 IST

जारी आदेश में कहा गया है कि श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) एवं जम्मू नगर निगम (जेएमसी) के मेयर को उनके क्षेत्रीय अधिकार के तहत राज्यमंत्री के स्तर का दर्जा दिया गया है. नगर निगमों के लिए चुनाव 13 साल के अंतराल के बाद अक्टूबर 2018 में चार चरणों में हुआ था.

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जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में श्रीनगर और जम्मू नगर निकायों के मेयरों को राज्य मंत्री स्तर का दर्जा देने का फैसला किया है. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव सुभाष छिब्बर की ओर से 21 अगस्त 2019 को इस आशय का आदेश जारी किया गया था.

जारी आदेश में कहा गया है कि श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) एवं जम्मू नगर निगम (जेएमसी) के मेयर को उनके क्षेत्रीय अधिकार के तहत राज्यमंत्री के स्तर का दर्जा दिया गया है. नगर निगमों के लिए चुनाव 13 साल के अंतराल के बाद अक्टूबर 2018 में चार चरणों में हुआ था.

इस समय श्रीनगर के महापौर (मेयर) जुनैद अजीम मट्ट हैं तथा जम्मू के महापौर चंद्र मोहन गुप्ता हैं. इस दर्जे के साथ जुनैद अजीम मट्ट और चंद्र मोहन गुप्ता की शक्ति बढ़ जाएगी. वे अब कार्यपालिका संबंधी फैसले लेने में सक्षम होंगे.

बतौर महापौर उनकी भूमिका एवं जिम्मेदारी नगर निगम के क्षेत्राधिकार तक सीमित थी. महापौर को खासतौर से औपचारिक अधिकारी माना जाता है. महापौर की शक्ति सीमित होती है, जबकि राज्य सरकारें समस्त संसाधानों के मामले में सबसे महत्वपूर्ण फैसले लेती हैं.

जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला

केंद्र सरकार ने हाल ही में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया है. ये केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हैं.

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 05 अगस्त 2019 को राज्यसभा में पहले पास हुआ था. विवादास्पद अनुच्छेद 370 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था.

अनुच्छेद 370

अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के मसलों में कानून बनाने का अधिकार था लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र सरकार को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये था. अनुच्छेद 370 के वजह से जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती थी. अनुच्छेद 370 के वजह से जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान था. अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के तहत जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग था.

यह भी पढ़ें: जम्मू कश्मीर से हटा अनुच्छेद 370: जानें क्या है अनुच्छेद 35A तथा अनुच्छेद 370

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