स्वेदशी रुप से विकसित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस ने हवा से हवा में मार करने वाली बियोंड विजुअल रेंज (बीवीआर) मिसाइल का सफल परीक्षण किया. तेजस ने एक प्रभावी जंगी जेट के तौर पर अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन किया. इससे पहले तेजस को सैन्य हथियारों और अन्य मिसाइलों से लैस करने की मंजूरी दी गई थी.
इसने एक प्रभावी जंगी जेट के तौर पर अपनी पूरी क्षमता प्रदर्शित की तथा वह अंतिम परिचालन मंजूरी हासिल करने के बिल्कुल करीब पहुंच गया है. इस परीक्षण से पहले मिसाइल पृथक्करण लक्षणों का गहन अध्ययन किया गया.
उद्देश्य:
इस परीक्षण का उद्देश्य तेजस पर मौजूद प्रणालियों के साथ डर्बी को जोड़े जाने का आकलन करना और इसके प्रदर्शन का सत्यापन करना था. इन प्रणालियों में एवियोनिक्स, अग्नि नियंत्रण राडार, लांचर और मिसाइल हथियार आपूर्ति प्रणाली शामिल है.
तेजस को पुराने मिग 21 विमानों के स्थान पर तैयार किया गया था लेकिन अब यह एक आधुनिक लड़ाकू विमान बन चुका है.
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बियोंड विजुअल रेंज (बीवीआर) डर्बी मिसाइल:
• इसमें लगे आईटीआर सेंसर से यह लक्ष्य का स्वयं पता लगाया जा सकता है.
• राडार से टारगेट का पता लगने के बाद सुरक्षित तरीके से मिसाइल पृथक होकर निशाने पर लगी.
• मिसाइल का वजन लगभग 118 किग्रा है और यह 3.8 मीटर लंबा है.
• इसकी अधिकतम प्रभावी सीमा लगभग 50 किमी है.
• इसमें सेंसर तरंग रडार लगाया गया है जो दुश्मन के विमान या जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल के तेजस के पास आने की सूचना देता है.
पृष्ठभूमि:
लड़ाकू विमान तेजस हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एयरोनॉटिक्स डेवलपमेंट एजेंसी की संयुक्त उपक्रम है. वायुसेना ने इससे पहले 40 तेजस मार्क-1 संस्करण का ऑर्डर दिया था. इसके बाद दिसंबर 2017 में 50 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 83 और नए तेजस की खरीद के लिए एचएएल को प्रस्ताव सौंपा था.
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