भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने युवा विकास संगठन (Youth Development Organization) मणिपुर और चर्बा ग्राम पंचायत, उत्तराखंड (Charba Grama Panchayat of Uttarkhand) सहित 6 प्राप्तकर्ताओं को प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार 26 जून 2013 को प्रदान किए. यह पुरस्कार उन्हें मादक द्रव्यों के सेवन और अवैध व्यापार के खिलाफ उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिए गए. यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय दिवस (26 जून) मनाने के क्रम में प्रदान किया गया. पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की सूची अधोलिखित है:
ग्राम पंचायत छारबा देहरादून
ग्राम पंचायत छारबा देहरादून ने वर्ष 2008 में ग्रामसभा की बैठक में नशीले पदार्थो के खिलाफ जंग छेड़ने का संकल्प पारित करके इस पर तेजी से काम किया. पंचायत ने एक निगरानी समिति बनाकर उन लोगों को जेल भी भेजवाया जो शराब और नशीले पदार्थो के अवैध व्यापार में लगे हुए हैं. केंद्र सरकार द्वारा ग्राम पंचायत छारबा देहरादून को वर्ष 2011-12 में सर्वश्रेष्ठ पंचायत का पुरस्कार भी दिया गया था.
सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन मिजोरम
मिजोरम की सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन ने नशीली दवा विरोधी अभियान में तीन लाख सक्रिय सदस्यों को जोड़ रखा है.
नेहरू युवा केंद्र थोबल मणिपुर
नेहरू युवा केंद्र थोबल मणिपुर ने पूर्वोत्तर के युवाओं में नशीली दवाओं के खिलाफ जागरूकता का प्रसार करने का कम किया है.
सोराम रतन सिंह
सोराम रतन सिंह, जो कि स्वयं नशीली दवा का इंजेक्शन लेता था, अब गत 16 सालों से दूसरे व्यक्तियों को इससे दूर रहने का प्रचार-प्रसार कर रहा है.
टीटी रंगनाथन रिसर्च सेंटर तमिलनाडु
टीटी रंगनाथन रिसर्च सेंटर तमिलनाडु वर्ष 1989 से इस क्षेत्र में इलाज और पुनर्वास पर काम करने के साथ ही रिसर्च भी कर रहा है.
डा. अनिल अवचट
महाराष्ट्र के डा. अनिल अवचट ने नशा छोड़ने के लिए अपनी तरह का अलहदा 5 सप्ताह का उपचार कोर्स कराते हैं.
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री कुमारी शैलजा ने कहा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करके हम मादक द्रव्यों के सेवन और अवैध व्यापार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस को मनाने के साथ ही मादक द्रव्य सेवन रोकथाम के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराएंगे. मादक द्रव्यों का सेवन और इसके शिकार लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले खतरे बहुआयामी हैं. इसके खिलाफ रणनीति में सबसे पहले जागरूकता पैदा करना और मादक द्रव्यों के सेवन की बुराइयों के प्रति लोगों को शिक्षित करना है. दूसरी रणनीति समुदाय आधारित हस्तक्षेप है, जिसमें उत्प्रेरक परामर्श, पहचान, इलाज और मादक द्रव्य के शिकार को राहत पहुंचाना है. तीसरी रणनीति स्वयं सेवकों/सूचना प्रदाताओं को प्रशिक्षण देना और दूसरे भागीदारों में प्रतिबद्ध और कुशल कैडर के निर्माण का नजरिया पैदा करना है.
विदित हो कि अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी रोधी दिवस प्रतिवर्ष विश्वभर में 26 जून को मनाया जाता है. वर्ष 2013 के लिए अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी रोधी दिवस का विषय रखा गया- मेक हेल्थ योर न्यू हाई इन लाइफ, नॉट ड्रग्स (Make health your new high in life, not drugs). वर्ष 2013 के अभियान का उद्देश्य इन्टरनेट के जरिए खुले तौर पर बेचे जा रहे मादक द्रव्यों के व्यापार पर अंकुश लगाना है.
संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी रोधी दिवस को मनाने की घोषणा 7 दिसंबर 1987 को की थी. यह दिवस विश्वभर में पहली बार 26 जून 1988 को मनाया गया था.
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