किस प्रधानमंत्री ने कभी संसद का सामना नहीं किया, जानें नाम

Last Updated: Jan 23, 2026, 13:48 IST

भारत में प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है, जो कि सबसे शक्तिशाली पद होता है। प्रधानमंत्री की सिफारिशों के आधार पर ही मंत्रीमंडल का गठन किया जाता है। भारत में अमूमन सभी प्रधानमंत्रियों ने संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन एक पीएम ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने कभी संसद का सामना नहीं किया है। कौन हैं वह पीएम, जानने के लिए यह लेख पढ़ें। 

किस पीएम ने कभी नहीं किया संसद का सामना
किस पीएम ने कभी नहीं किया संसद का सामना

भारत का संविधान उठाकर देखें, तो हमें अनुच्छेद 74 से 78 तक में प्रधानमंत्री के पद और शक्तियों के बारे में पढ़ने को मिलता है। पीएम सरकार का मुखिया होता है। भारत में सभी फैसले राष्ट्रपति के नाम पर होते हैं, लेकिन उनका प्रशासनिक क्रियान्व्यन प्रधामंत्री द्वारा ही कराया जाता है। अभी तक भारत में कुल 14 प्रधानमंत्री हुए हैं। इनमें से अमूमन सभी पीएम ने संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। हालांकि, एक प्रधानमंत्री ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने कभी संसद का सामना नहीं किया है। कौन हैं यह पीएम, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

किस प्रधानमंत्री ने नहीं किया संसद का सामना

भारत का पांचवे प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने कभी संसद का सामना नहीं किया है। 

क्या था राजनीतिक इतिहास

यह भारत में आपातकाल के बाद का समय था, जब पहली बार कोई गैर-काग्रेसी यानि कि मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, कुछ समय में ही राजनीतिक कारणों की वजह से उनकी सरकार गिर गई। इस घटना के बाद चौधरी चरण सिंह ने जनता पार्टी का दामन छोड़ नई पार्टी बना ली थी। हालांकि, उन्होंने पीएम बनने के लिए बाहरी समर्थन की जरूरत थी, ऐसे में इंदिरा गांधी ने उन्हें समर्थन देने का वादा किया और जुलाई, 1979 में उन्होंने पीएम पद की शपथ ली।

क्यों नहीं पहुंचे संसद

चौधरी चरण सिंह ने पीएम पद की शपथ तो ले ली थी, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाए थे। ऐसे में तत्कालीन राष्ट्रपति रहे नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें 20 अगस्त, 1979 तक का समय दिया था। इस तारीख से पहले ही इंदिरा गांधी ने शक्ति परीक्षण के दौरान अपनी शर्त न मानने के कारण समर्थन वापस ले लिया था। ऐसे में चौधरी चरण सिंह ने बहुमत न होने के कारण संसद जाने के बजाय राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा दे दिया था।

किसानों के मसीहा के रूप में है पहचान

प्रधानमंत्री के तौर पर चौधरी चरण सिंह ने बहुत कम दिनों तक काम किया था। हालांकि, यूपी के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने लंबा काम किया। इस दौरान उन्होंने 1952 में जमींदारी प्रथा को खत्म करते हुए लाखों किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाया था।

बदल दिया पटवारी का नाम

यूपी में उनके द्वारा एक बड़ा बदलाव भी किया गया। उन्होंने ही लेखपाल शब्द को पटवारी शब्द के बदले में सृजित किया था। इसके अतिरिक्त उन्होंने ही चकबंदी की थी, जिसमें छोटे-छोटे खेतों को एक साथ लाया गया था। चौधरी चरण सिंह द्वारा ही किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए मंडियों का मॉडल लागू किया गया था, जिसे हमें कृषि उपज मंडी समिति के नाम से भी जानते हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jan 23, 2026, 13:48 IST

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