किस राजा को कहा जाता है ‘भारत का मुक्तिदाता’, जानें नाम और कारण
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें विभिन्न सम्राट देखने को मिलते हैं। इस कड़ी में भारत में ऐसे सम्राट भी रहे हैं, जिन्हें अपनी सैन्य रणनीतियों और कुशल नेतृत्व क्षमता के अनुसार ‘भारत का मुक्तिदाता’ भी कहा जाता है। क्या है राजा का नाम, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
इतिहास के पन्ने पलटें, तो हमें भारत का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास देखने को मिलता है। यहां कई ऐसे सम्राट हुए, जिन्होंने अपनी विशेषताओं की वजह से अलग पहचान बनाई।
इस कड़ी में प्राचीन इतिहास में चंद्रगुप्त मौर्य को ‘भारत का मुक्तिदाता’ भी कहा जाता है। मौर्य ने न सिर्फ भारत में यूनानी दास्ता को खत्म किया, बल्कि धनानंद की सत्ता को भी खत्म किया। इसमें चाणक्य भी उनके साथ रहे। चंद्रगुप्त मौर्य को ‘भारत का मुक्तिदाता’ कहने के पीछे क्या हैं मूल कारण, विस्तार से जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
कौन थे चंद्रगुप्त मौर्य
चंद्रगुप्त मौर्य को भारत के महान शासकों में गिना जाता है। उन्होंने मौर्य वंश की स्थापना करने के साथ भारत के छोटे-छोटे राज्यों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। मौर्य द्वारा अफगानिस्तान से लेकर बंगाल और हिमालय से लेकर मैसूर तक अपने सम्राज्य का विस्तार किया।
सम्राट अशोक उनके पुत्र बिंदुसार के पुत्र हैं। वहीं, चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंत में जैन धर्म को अपना लिया था और कर्नाटक के श्रवणबेलागोला चले गए थे। यहां उन्होंने उपवास रखते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे।
क्यों कहा जाता है ‘भारत का मुक्तिदाता’
अब सवाल है कि चंद्रगुप्त मौर्य को ‘भारत का मुक्तिदाता’ क्यों कहा जाता है। इसके पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
चंद्रगुप्त मौर्य को ‘भारत का मुक्तिदाता’ कहने के पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
यूनानी दास्ता से दिलाई मुक्ति
भारत से जब सिकंदर(Alexander) की वापसी हो गई थी, तब उत्तर-पश्चिमी भारत पर यूनानी गवर्नरों का शासन हुआ करता था। ऐसे में चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी एक बड़ी विशाल सेना को प्रशिक्षित कर तैयार किया।
उन्होंने सिकंदर के सेनापति रहे सेल्यूकस निकेटर को युद्ध में हरा दिया था। इस युद्ध के बाद अफगानिस्तान और बलूचिस्तान का बड़ा हिस्सा यूनानियों के कब्जे से मुक्त हुआ था। भारत में ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी भारतीय राजा ने मजूबती से अपनी सेना को एकजुट कर विदेशी आक्रमणकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।
नंद वंश को किया समाप्त
उस समय मगध साम्राज्य में धनानंद का शासन हुआ करता था। हालांकि, उसे काफी अत्याचारी राजा माना जाता था। धनानंद द्वारा जनता पर अधिक टैक्स लगाया गया था, जिससे जनता परेशान थी। चाणक्य ने अपमानित होने के बाद चंद्रगुप्त मौर्य को तक्षशिला में राजनीति और रणनीति की शिक्षा प्रदान की, जिसके बाद मौर्य ने धनानंद को युद्ध में हराया और सम्राज्य को समाप्त किया।
| शासनकाल | 322 ई.पू-298 ई.पू |
| राजधानी | पाटलीपुत्र(वर्तमान का पटना) |
| गुरु | चाणक्य |
| पुत्र | सम्राट बिंदुसार |
| पोता | सम्राट अशोक |
| अंतिम शासक | बृहद्रथ |
भारत में चक्रवर्ती के तौर पर पहचान
भारत में चंद्रगुप्त मौर्य को चक्रवर्ती सम्राट के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने छोटे-छोटे जनपदों को एक सूत्र में पिरोया और एक बड़ा साम्राज्य बनाया। उनके शासनकाल में भारत की सीमाओं का विस्तार हुआ, जिसके तहत भारत की सीमाएं ईरान तक फैली।
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