भारत में कैसे बना Supreme Court, जानें पूरा इतिहास
भारत में शीर्ष न्यायालय(Supreme Court of India) सबसे बड़ा कोर्ट कहा जाता है। यह न्याय का आखिरी दरवाजा भी है, जहां निचली अदालतों के फैसलों को चुनौती दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। इस लेख में हम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के बारे में जानेंगे।
भारत में यदि सबसे बड़ी अदालत की बात करें, तो यह सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court of India) है। इस अदालत को न्याय का आखिरी दरवाजा भी कहा जाता है, जहां निचली अदालतों के फैसलों को चुनौती दी जा सकती है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही अंतिम फैसला होता है। ऐसे में इसे न्याय का सबसे बड़ा मंदिर भी कहते हैं। भारत में सुप्रीम कोर्ट बनने की कहानी काफी रोचक रही है। इतिहास में यह तीन चरणों में बना है। क्या है इसकी पूरी कहानी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
ब्रिटिश काल में हुई शुरुआत
भारत में सुप्रीम कोर्ट बनने की शुरुआत ब्रिटिश काल में हो गई थी। साल 1773 में रेगुलेटिंग एक्ट पास होने के बाद 1774 में कोलकाता के फोर्ट विलियम में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई। उस समय इसके पहले न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे बने थे। कुछ समय बाद 1800 में मद्रास और 1823 में बांबे हाई कोर्ट की स्थापना की गई। वहीं, 1861 में हाई कोर्ट एक्ट आया और बांबे, मद्रास व कोलकाता के कोर्ट को समाप्त कर हाई कोर्ट का गठन किया गया।
1937 में सामने आया फेडरल कोर्ट
भारतीय कानून इतिहास में 1935 में निर्याणयक मोड़ आया। साल 1935 में भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत 1937 में फेडरल कोर्ट यानि कि संघीय न्यायलय की स्थापना हुई। यह मुख्य रूप राज्यों और केंद्र के बीच विवादों का निपटारा करता था। हालांकि, इसका फैसला अंतिम नहीं होता था, बल्कि इसके खिलाफ लंदन स्थित प्रिवि काउंसिल में अपील की जा सकती थी।
1950 में संसद भवन से शुरू हुआ सुप्रीम कोर्ट
देश आजाद होने के बाद 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट का उद्घाटन किया गया। इसका उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया था। उस समय यह संसद भवन के ‘चेंबर ऑफ प्रिंसेस’ में हुआ करता था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पहले भारतीय न्यायाधीश एच.जे.कनिया थे।
1958 में तिलक मार्ग पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
तिलक मार्ग पर बनाया गया सुप्रीम कोर्ट इंडो-ब्रिटिश शैली में बनाया गया है, जिसमें बीच में एक बड़ा गुंबद है। वहीं, इसके दोनों ओर पूर्व और पश्चिम ब्लॉक हैं। इस इमारत का उद्घाटन 1958 में किया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का पता हमेशा के लिए बदल गया।
सुप्रीम कोर्ट में कुल न्यायाधीशों की संख्या
आपको बता दें कि मूल संविधान में सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 8 थी, जिनमें एक मुख्य व अन्य 7 न्यायाधीश थे। हालांकि, वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 34 हो गई है, जिनमें एक मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य न्यायाधीश होते हैं। भारतीय संविधान में भाग-5 में अनुच्छेद 124 से 147 तक सुप्रीम कोर्ट का जिक्र है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, वहीं यहां सेवानिवृत्ति की आयु 68 वर्ष है।
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