आज इस नाम से जानी जाती हैं ऋग्वेद काल की प्रमुख नदियां, देखें लिस्ट

Last Updated: May 19, 2026, 17:11 IST

ऋग्वेद काल का वर्ष लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व तक रहा है। इस काल से अब तक कई नदियां ऐसी हैं, जो कि आज भी बह रही हैं, जबकि कुछ नदियों का अस्तित्व खत्म हो गया है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे। 

ऋग्वेद काल की प्रमुख नदियां
ऋग्वेद काल की प्रमुख नदियां

भारत को नदियों का देश कहा जाता है। यहां वर्षों से कई नदियों का प्रवाह हो रहा है। इस कड़ी में प्राचीन इतिहास से संबंधित ऋग्वेद काल से प्रमुख नदियों का प्रवाह हो रहा है, जिनमें से कुछ नदियों आज भी हैं, जबकि कुछ नदियों का अस्तित्व खत्म हो गया है।

ऋग्वेद के 'नदी सूक्त' (10.75) में कई नदियों का उल्लेख देखने को मिलता है, जिन्हें उस समय पर 'सप्त-सिंधु' यानि कि सात नदियों की भूमि भी कहा जाता था। इस लेख में हम भारत की कुछ प्राचीन नदियों और उनके वर्तमान नाम के बारे में जानेंगे।

ऋग्वेदकालीन नदियों के प्राचीन और उनके वर्तमान नाम

ऋग्वेद काल  में नदियों के अलग नाम से जाना जाता था, जबकि आज उन्हीं नदियों का अलग नाम से जाना जाता है, जो कि इस प्रकार हैंः

प्राचीन नाम

वर्तमान नाम

सिंधु

सिंधु

वितस्ता

झेलम

असिच्नी

चिनाब 

परुष्णी

रावी

विपाशा

व्यास

शतुद्रि

सतलुज

सरस्वती

घग्घर

कुभा

काबुल 

क्रुमु

कुर्रम

गोमती

गोमल

सुवास्तु

स्वात

सदानीरा 

गंडक

दृषद्वती

चितंग / राक्षी

नदियों से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्य 

सिंधु नदी 

ऋग्वेद के अंदर सिंधु नदी बहुत ही महत्त्वपूर्ण मानी गई है। वेद में इस नदी का जिक्र बार-बार किया गया है। वहीं, आर्यों के जीवन में इस नदी का आर्थिक व सामाजिक महत्त्व के बारे में जानकारी दी गई।

सरस्वती नदी

ऋग्वेद में सरस्वती को 'नदीतमा' यानि कि नदियों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। इस नदी की पवित्रता का भी उल्लेख देखने को मिलता है। हालांकि, आज यह नदी विलुप्त हो चुकी है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि यह नदी प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर मिलती है।

परुष्णी नदी

इतिहास में प्रसिद्ध रहा 'दशराज्ञ युद्ध' यानि कि 10 राजाओं का युद्ध परुष्णी (रावी) नदी के तट पर ही लड़ा गया था। इस युद्ध में राजा सुदास द्वारा अन्य 10 राजाओं के संघ को हराया गया था।

सप्त-सिंधु प्रदेश

आपको बता दें कि आर्यों के निवास स्थान को 'सप्त-सिंधु' कहा जाता था। इसके पीछे कारण है कि  यह सात मुख्य नदियों सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलुज और सरस्वती से घिरा हुआ क्षेत्र था, जिससे इसका नाम सप्त-सिंधु पड़ा।

गंगा और यमुना का नाम 

ऋग्वेद काल में आर्य मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में आकर बसे थे। ऐसे में गंगा और यमुना का महत्त्व उत्तर वैदिक काल में बढ़ा है। ऋग्वेद में गंगा का उल्लेख सिर्फ 1 बार किया गया है, जबकि यमुना का उल्लेख 3 बार हुआ है।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: May 19, 2026, 17:11 IST

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