उत्तर प्रदेश में कौन-सा गांव कहलाता है ‘हवेलियों का गांव’, जानें यहां

Last Updated: Jan 21, 2026, 16:45 IST

उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि अपनी विविधता और समृद्ध इतिहास के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। भारत का यह राज्य ग्राम प्रधान राज्य है। ऐसे में यहां एक गांव ऐसा भी है, जिसे हवेलियों का गांव भी कहा जाता है। कौन-सा है यह गांव, जानने के लिए यह लेख पढ़ें। 

हवेलियों का गांव
हवेलियों का गांव

भारत के उत्तर में जब भी प्रमुख राज्यों की बात होती है, तो इसमें उत्तर प्रदेश का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। भारत का यह राज्य अपनी विविधता, समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। भारत का यहा राज्य देश के कुल 7.33 फीसदी हिस्से पर स्थित है। इस पूरे क्षेत्र का 97.7 फीसदी हिस्सा ग्रामीण परिवेश में है।

यही वजह है कि उत्तर प्रदेश को ग्राम प्रधान राज्य कहा जाता है। यहां आपको प्रत्येक जिले में गांव देखने को मिल जाएंगे, जहां आज भी गांव के पुराने भवन और हवेलियां मौजूद हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के किस जिले को हवेलियों का गांव कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश का परिचय 

उत्तर प्रदेश के परिचय के बारे में बात करें, तो आज जिस जगह पर उत्तर प्रदेश है, वहां कभी कोसल और पांचाल साम्राज्य हुआ करता था। बाद में यहां शर्कियों का शासन हुआ, तो उन्होंने यहां जौनपुर बसाया। कुछ समय बाद यहां मुगल पहुंचे, तो उन्होंने यहां अवध सूबा बनाया।

इसकी कमान नवाबों के हाथ में रही। ब्रिटिश ने प्रांत को उत्तर-पश्चिम प्रांत में बांटा और बाद में इसे आगरा और अवध प्रांत में मिला दिया। देश आजाद हुआ, तो सरकार ने इसका नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया। साल 2000 में इसमें से उत्तराखंड अलग राज्य बना। 

किस गांव को कहा जाता है हवेलियों का गांव   

अब हम यह जान लेते हैं कि किस गांव को हवेलियों का गांव कहा जाता है। आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित बागपत के बामनौली गांव को हवेलियों का गांव कहा जाता है।

क्यों कहा जाता है हवेलियों का गांव

बामनौली गांव में 24 से अधिक विशाल हवेलियां मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश हवेलियां 100 साल से अधिक की उम्र पूरी कर चुकी हैं। कुछ हवेलियों की उम्र 200 साल तक है, जिन्होंने ब्रिटिश समय को बहुत करीब से देखा है। ऐसे में एक गांव में इतनी हवेलियों का होना इसे एक खास पहचान देता है। 

गांव का है समृद्ध इतिहास 

बामनौली गांव का शुरू से ही समृद्ध इतिहास रहा है। यहां रहने वाले वैश्य और जैन समुदाय के लोग व्यापार के लिए जाने जाते थे, जो कि कोलकाता, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में व्यापार के लिए जाते थे। ऐसे में इन लोगों ने यहां अपने निवास स्थान के लिए बड़ी हवेलियां बनवाई थीं। 

हवेलियों में दिखती है मुगल और राजस्थानी वास्तुकला

इन हवेलियों के निर्माण में विशेष रूप से मुगल और राजस्थानी कला शैली का उपयोग किया गया है। हवेलियों में मौजूद लकड़ी के दरवाजों में बारीक नक्काशी देखने को मिलती है, जबकि हवेलियों के अंदर बड़े आंगन, ऊंचे झरोखे और कई बड़े कमरे मौजूद हैं।

सुरक्षा के लिहाज से मजबूत बनी थीं हवेलियां

उस समय हवेलियों को सुरक्षा के लिहाज से बहुत ही मजबूत बनाया गया था। इन हवेलियों की दीवारें 3 से 4 फीट तक मोटी हैं। वहीं, कुछ हवेलियों में गुप्त रास्ते और तिजोरियां भी बनी हुई हैं, जिनका उपयोग जेवर और धन रखने के लिए किया जाता था।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jan 21, 2026, 16:45 IST

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