क्या होती है Plastic Ice और कैसे हुई इसकी खोज, यहां जानें

Mar 21, 2025, 14:57 IST

शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक आइस VII के अस्तित्व की पुष्टि की है, जो एक दुर्लभ उच्च दबाव वाला बर्फ चरण है, जहां अणु ठोस रहते हुए भी फ्री घूमते रहते हैं। विषम परिस्थितियों में पाई गई इस खोज से अंतरिक्ष में पानी के व्यवहार के बारे में हमारी समझ का विस्तार होगा। इसका प्रभाव भविष्य में ग्रहों के अन्वेषण और चरम वातावरण के लिए सामग्री विकास पर भी पड़ सकता है।

क्या होती है प्लास्टिक आइस
क्या होती है प्लास्टिक आइस

पानी एक ऐसा पदार्थ है, जिससे सभी परिचित हैं। यह विपरित परिस्थितियों में अपने विविध रूपों से वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित करता रहता है। ऐसा ही एक आकर्षक रूप है प्लास्टिक आइस VII, जो पानी का एक दुर्लभ चरण है, जिसकी पुष्टि हाल ही में सोरबोन विश्वविद्यालय के लिविया बोवे के नेतृत्व में शोधकर्ताओं द्वारा की गई है। इस खोज से हमारी समझ में वृद्धि हुई है कि ग्रह के चरम वातावरण में पानी किस प्रकार व्यवहार करता है।

Plastic Ice VII को क्या खास बनाता है?

सामान्य बर्फ के विपरीत, जिसमें एक कठोर और स्थिर आणविक संरचना होती है, प्लास्टिक आइस VII की एक विशेष विशेषता है। इसके जल अणु ठोस संरचना में रहते हुए भी घूमने के लिए फ्री होते हैं। यह असामान्य विशेषता ही इसे अलग बनाती है और इसे "प्लास्टिक" लेबल दिलाती है। "प्लास्टिक" शब्द का प्रयोग बर्फ की दबाव पड़ने पर विकृत होने और आकार बदलने की क्षमता को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो कि प्लास्टिक पदार्थों की तरह ही है। क्योंकि, इसके अणुओं में घूमने की स्वतंत्रता होती है।

वैज्ञानिकों ने पहली बार 2008 में प्लास्टिक आइस VII के अस्तित्व का पूर्वानुमान लगाया था। आज, नए न्यूट्रॉन-प्रकीर्णन प्रयोगों से इसका अस्तित्व सिद्ध हो चुका है। प्लास्टिक आइस VII कठोर परिस्थितियों में उत्पन्न होता है, जिसके लिए तीन गीगापास्कल (GPa) से अधिक दबाव की आवश्यकता होती है, जो पृथ्वी के वायुमंडलीय दबाव से लगभग 30,000 गुना अधिक है। इसके अलावा, प्लास्टिक आइस VII के अस्तित्व के लिए 450 केल्विन (177°C) से अधिक तापमान आवश्यक है।

Plastic Ice VII की खोज कैसे हुई?

प्लास्टिक आइस VII की खोज में क्रांतिकारी सफलता केवल न्यूट्रॉन प्रकीर्णन और हीरा-निहाई कोशिकाओं जैसे उन्नत तरीकों का उपयोग करके ही प्राप्त की गई थी। इन विधियों का उपयोग परमाणु स्तर पर छोटे बर्फ के नमूनों का अध्ययन करने के लिए किया गया था। बर्फ की संरचना के अंदर आणविक गति का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकला। हालांकि, बर्फ अभी भी ठोस थी, लेकिन अंदर के अणु निश्चित दिशाओं में स्वतंत्र रूप से घूम रहे थे। इस अवलोकन से प्लास्टिक आइस VII की उपस्थिति की पुष्टि हुई तथा इसकी असामान्य विशेषताओं के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली।

खोज के निहितार्थ

प्लास्टिक आइस VII की पहचान सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जल के बारे में हमारी समझ के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। पानी का एक और चरम रूप आइस VII, बृहस्पति और शनि के चंद्रमाओं, जैसे गैनीमीड और टाइटन पर पहले ही खोजा जा चुका है। प्लास्टिक आइस VII की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अंतरिक्ष में पानी के गुण वर्तमान अनुमान से कहीं अधिक परिवर्तनशील और जटिल हैं।

इसके अतिरिक्त, इस खोज से ग्रह संबंधी अन्वेषण प्रयासों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। प्लास्टिक आइस VII की विशेषताओं और कार्यों की अधिक गहन समझ के माध्यम से शोधकर्ता नई प्रौद्योगिकियों और सामग्रियों का निर्माण कर सकते हैं, जो कठोर परिस्थितियों को सहन कर सकें। ये विकास आगामी अंतरिक्ष मिशनों और अन्य प्रकार के खगोलीय पिंड अन्वेषण में अत्यंत लाभकारी हो सकते हैं।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com
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