जम्मू-कश्मीर वन अनुसंधान संस्थान (JKFRI) की ओर से बीते दिनों पेड़ों के संरक्षण के लिए ‘डिजिटल ट्री आधार’ पहल शुरू की गई है। यह योजना चिनार के पेड़ों के संरक्षण के लिए शुरू की गई है, जिसके तहत पेड़ों को संरक्षित किया जाएगा।
क्या है डिजिटल ट्री आधार पहल
डिजिटल ट्री आधार पहल के तहत आधार नंबर की तरह हर पेड़ को एक अद्वितीय(यूनिक) संख्या प्रदान करनी होती है। इसे ट्री आधार का नाम भी दिया जाता है। इस पहल के तहत एक बारकोड के माध्यम से पेड़ के स्थान, ऊंचाई और स्वास्थ्य सहित अन्य जानकारी प्रदान की जाती है।
चिनार पेड़ों की होगी गणना
डिजिटल ट्री पहल के तहत कश्मीर घाटी और चिनाब क्षेत्र में मौजूद चिनार के पेड़ों का गणना की जाएगी। इसका पूरा डाटा जम्मू-कश्मीर वन विभाग के पास मौजूद रहेगा।
कश्मीर घाटी में मौजूद है सबसे पुराना चिनार का वृक्ष
कुछ पुराने रिकॉर्ड्स के मुताबिक, कश्मीर घाटी में विश्व का सबसे पुराना चिनार वृक्ष मौजूद है। इसकी उम्र 647 साल बताई जाती है। पेड़ के स्थान की बात करें, तो यह बडगाम जिले के चत्तरगाम गांव में मौजूद है। इसे पौधे के रूप में सूफी संत सैयद कासिम शाह द्वारा लगाया गया था।
चिनार के पेड़ की विशेषताएं
चिनार (Platanus orientalis) एक विशाल और सुंदर छायादार वृक्ष है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पाया जाता है। इसे कश्मीर में "बूने" और फारसी में "चिनार" कहा जाता है।
चिनार के पेड़ की विशेषताएं
लंबी आयु और विशाल आकार
-यह 300 से 500 साल तक जीवित रह सकता है।
-पेड़ की ऊंचाई की बात करें, तो यह 30-40 मीटर तक हो सकती है।
पत्तों की खूबसूरती और बदलते रंग
-चिनार के पत्ते चौड़े और अति सुंदर होते हैं, जो अंगूर के पत्तों से मिलते-जुलते हैं।
-ग्रीष्म ऋतु में हरे, शरद ऋतु में पीले, नारंगी और लाल रंग में बदल जाते हैं, जिससे यह और भी आकर्षक दिखता है।
-ठंडे जलवायु में वृद्धि
चिनार के पेड़ को शीतोष्ण जलवायु पसंद है और यह मुख्यतः कश्मीर और हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
-यह बर्फबारी वाले इलाकों में भी जीवित रह सकता है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
-चिनार का वृक्ष कश्मीर की शान माना जाता है और मुगल बादशाहों, खासकर अकबर और जहांगीर द्वारा इसे विशेष रूप से बागों में लगाया गया था।
-श्रीनगर के शालीमार बाग और निशात बाग में चिनार के पेड़ बड़ी संख्या में हैं।
औषधीय और पर्यावरणीय लाभ
-चिनार का पेड़ वायु को शुद्ध करता है और पर्यावरण के लिए लाभकारी है।
-इसकी छाल और पत्तों का उपयोग आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है।
चिनार के पेड़ का महत्व
-प्राकृतिक सुंदरता: यह शरद ऋतु में अपने रंग बदलने वाले पत्तों के कारण कश्मीर का मुख्य आकर्षण है।
-पर्यावरण संरक्षण: यह हवा को शुद्ध करने और जलवायु को संतुलित रखने में मदद करता है।
-ऐतिहासिक धरोहर: मुगलों और कश्मीर की संस्कृति से इसका गहरा संबंध है।
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