भारतीय संसद में क्या होता है ‘शून्यकाल’ और यह कितने बजे होता है, जानें यहां

Last Updated: Feb 10, 2026, 13:34 IST

भारतीय संसद की कार्रवाई को अलग-अलग समय-सारणी के हिसाब से तय किया गया है। इसमें प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल और एजेंडा का समय तय होता है। हमें अक्सर शून्यकाल के दौरान संसद में हुए हंगामे के बारे में सुनने को मिलता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आखिर शून्यकाल क्या होता है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे। 

भारतीय संसद में क्या होता है ‘शून्यकाल’ और यह कितने बजे होता है, जानें यहां
भारतीय संसद में क्या होता है ‘शून्यकाल’ और यह कितने बजे होता है, जानें यहां

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के तहत भारतीय संसद का गठन तीनों अंगों को मिलाकर किया जाता है। इसमें लोकसभा, राज्यसभा और  राष्ट्रपति भी शामिल है। कई बार लोग संसद से सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा को ही समझते हैं, लेकिन राष्ट्रपति भी संसद का महत्त्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन उनका पद बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता है, क्योंकि संसद में किसी भी बिल को पारित करने के लिए आखिरी मुहर राष्ट्रपति की ही लगती है।

भारतीय संसद की कार्यप्रणाली में हमें अलग-अलग शब्द सुनने को मिलते हैं, जिनमें प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल और एजेंडा समय तक शामिल है। हालांकि, सबसे अधिक हंगामा हमें शून्यकाल में देखने को मिलता है। क्या आप जानते हैं कि शून्यकाल क्या होता है और इसका समय क्या होता है, जानने के लिए यह लेख पढ़ें। 

क्या होता है शून्यकाल(Zero Hour)?

अब हम यह जान लेते हैं कि शून्यकाल क्या होता है। आपको बता दें कि इस दौरान कोई भी सांसद बिना किसी पूर्व सूचना के संसद में कोई भी महत्त्वपूर्ण मुद्दा या विषय उठा सकते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सांसद द्वारा इस संबंध में उसी दिन सुबह 10 बजे तक अध्यक्ष को सूचना दी जाती है। 

क्या है Zero Hour का समय

यहां देने वाली बात है कि शून्यकाल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही सदनों में होता है। इस दौरान सांसद अलग-अलग मुद्दों पर बात करते हैं। हालांकि, दोनों सदनों में इसका समय अलग है, जो इस प्रकार हैः

लोकसभा

लोकसभा में शून्यकाल सामान्यतौर पर प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे होता है। क्योंकि, यह दोपहर 00ः00 बजे होता है, जो कि एक डिजिटल समय है, इसलिए इसे शून्यकाल कहा जाता है। यह दोपहर 12 बजे शुरू होकर 1 बजे तक चलता है। 

राज्यसभा

राज्यसभा में शून्यकाल का समय अलग है। क्योंकि, राज्यसभा में यह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हो जाता है। सामान्यतौर पर कई बार यह प्रश्नकाल से पहले होता है।

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शून्यकाल की विशेषताएं

  • आपको यह जानकर हैरानी होगी कि किसी भी नियम पुस्तिका में शून्यकाल को लेकर जानकारी नहीं है। हालांकि, 1962 के बाद से यह भारतीय संसद का हिस्सा बन गया है।
  • शून्यकाल के दौरान उठाए गए मुद्दों पर संबंधित मंत्री जवाब देने के लिए बाध्यन नहीं होता हैं, लेकिन वे बाद में इस संबंध में स्पष्टीकरण दे सकते हैं। 
  • शून्यकाल के लिए पहले से संसद को नहीं बताना होता है। इसकी तुलना में प्रश्नकाल के लिए सांसद को 10 से 15 दिन पहले सूचना देनी होती है, लेकिन शून्यकाल में उसी दिन सूचना देकर मुद्दा उठाया जा सकता है।

Zero Hour क्यों महत्त्वपूर्ण है

संसद की कार्यवाही काफी व्यस्त होती है, जिसमें अलग-अलग समय पर एजेंडा से लेकर अन्य काम करने होते हैं। ऐसे में यदि हाल-फिलहाल में कोई बड़ा घटना या फिर कोई महत्त्वपूर्ण सामाजिक विषय पर सरकार से जवाब मांगना हो, तो शून्यकाल की महत्ता बढ़ जाती है। 

Quick Fact: आपको बता दें कि शून्यकाल शब्द सरकार या संविधान ने नहीं दिया है, बल्कि यह शब्द मीडिया द्वारा दिया गया है।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Feb 10, 2026, 13:34 IST

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