भारत में किन परिस्थितियों में लोकसभा को भंग किया जा सकता है, किसके पास है यह अधिकार, यहां पढ़ें
भारत में लोकसभा को निचला सदन भी कहा जाता है, जो सीधे जनता द्वारा चुना जाता है। ऐसे में लोकसभा जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। लोकसभा एक ऐसा सदन है, जिसे पांच वर्ष के कार्यकाल से पहले ही भंग किया जा सकता है। लेकिन, यहां अलग-अलग परिस्थितियां हैं, जिनमें लोकसभा को भंग करने का प्रावधान है।
लोकसभा देश का निचला सदन है, जिसमें जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से मतदान कर प्रतिनिधियों को चुना जाता है। ऐसे में लोकसभा जनता के प्रति उत्तरदायी भी होती है। राज्यसभा की तुलना में लोकसभा एक ऐसा सदन है, जिसे कभी भी भंग किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए विशेष परिस्थितियों का प्रावधान किया गया है, जैसे- अविश्वास प्रस्ताव पास होना, कार्यकाल पूरा होना और त्रिशंकु स्थिति का होना शामिल है।
केवल राष्ट्रपति के पास ही लोकसभा को भंग करने की शक्ति होती है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रपति को सलाह दी जाती है। कौन देता है यह सलाह और क्या राष्ट्रपति इस सलाह को मानने के लिए बाध्य है? लोकसभा को भंग करने की क्या है पूरी प्रक्रिया, जानने के लिए यह पूरा लेख जरूर पढ़ें।
राष्ट्रपति के पास होती है भंग करने की शक्ति
भारतीय संविधान के मुताबिक, लोकसभा को भंग करने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है, लेकिन एक विशेष परिस्थिति में प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग कर दिया जाता है। यहां राष्ट्रपति इस सलाह को मानने के लिए बाध्य नहीं है, बल्कि अपने विवेकानुसार निर्णय ले सकते हैं।
कब-कब भंग हो सकती है लोकसभा
लोकसभा को अलग-अलग स्थितियों में भंग किया जा सकता है, जो कि इस प्रकार हैंः
कार्यकाल पूरा हो जाने पर
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83(2) में यह बताया गया है कि लोकसभा की बैठक के पहले दिन से 5 वर्ष होने पर लोकसभा अपने आप भंग हो जाती है। इसके बाद दोबारा चुनाव कराए जाने की आवश्यकता होती है, जिससे जनता द्वारा नए सिरे से प्रतिनिधियों को चुना जा सके।
प्रधानमंत्री की सलाह पर भंग का प्रावधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 85(2)(b) में राष्ट्रपति को लोकसभा को भंग करने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रिपरिषद् की सलाह के बाद राष्ट्रपति को लोकसभा को भंग करने की सलाह दी सकती है।
हालांकि, यह तब होता है, जब सरकार को लगता है कि नए सिरे से चुनाव कराए जाने की आवश्यकता है। वहीं, यदि सरकार बहुमत खो दे और कोई अन्य दल या गठबंधन द्वारा भी सराकर नहीं बनती है, तो लोकसभा को भंग कर दिया जाता है।
इसके अतिरिक्त, यदि विपक्ष संसद में अविश्वास प्रस्ताव पारित करवा दे, तो प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ेगा। इसके बाद या तो नई सरकार का गठन होगा, यदि ऐसा नहीं होता है, तो लोकसभा को भंग कर दिया जाएगा।
Hung Parliament होने पर
मान लिजिए कि चुनाव के बाद किसी दल या गठबंधन द्वारा बहुमत नहीं मिल रहा है, जिससे सरकार नहीं बन सकती है। ऐसे में राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने के आदेश दिए जाते हैं।
अब तक कितनी बार लोकसभा भंग हुई है
इस समय 18वीं लोकसभा का कार्यकाल चल रहा है। ऐसे में लोकसभा कुल 17 बार भंग हुई है, लेकन समय से पहले चार बार लोकसभा को भंग किया गया है। पहली बार 1970 में इंदिरा गांधी द्वारा समय से पहले ही राष्ट्रपति को लोकसभा भंग करने की सलाह देने पर इसे भंग किया गया था। जबकि, आखिरी बार 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरने पर लोकसभा को भंग किया गया है।
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