ईरान से क्या-क्या खरीदता है भारत? यहां देखें पूरी लिस्ट
भारत-ईरान व्यापार की बात करें तो भारत ईरान से मुख्य रूप से ऑर्गेनिक केमिकल्स, ड्राई फ्रूट्स (खजूर, बादाम), मिनरल फ्यूल्स (बिटुमेन, मेथनॉल), नमक, सल्फर, प्लास्टिक, आयरन-स्टील, ग्लास और उर्वरक आयात करता है।
यूएस और इज़राइल के साथ ईरान के जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया की निगाहें इस समय ईरान पर टिकी हुई हैं. भारत-ईरान व्यापार की बात करें तो भारत ईरान से मुख्य रूप से ऑर्गेनिक केमिकल्स, ड्राई फ्रूट्स (खजूर, बादाम), मिनरल फ्यूल्स (बिटुमेन, मेथनॉल), नमक, सल्फर, प्लास्टिक, आयरन-स्टील, ग्लास और उर्वरक आयात करता है। ये वस्तुएं उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और खाद्य जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
बता दें कि भारत और ईरान के बीच FY 2024-25 में कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत के निर्यात 1.24 अरब डॉलर और आयात 0.44 अरब डॉलर रहे, जिससे भारत के पक्ष में व्यापार अधिशेष बना। वहीं UN COMTRADE के अनुसार 2024 में आयात बढ़कर करीब 1.06 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ईरान से क्या-क्या खरीदता है भारत?
ईरान से भारत मुख्य रूप से ऑर्गेनिक केमिकल्स, खाने योग्य फल और सूखे मेवे, तथा मिनरल फ्यूल्स का आयात करता है। ऑर्गेनिक केमिकल्स (लगभग 48%) सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं, जबकि ड्राई फ्रूट्स, खजूर, बादाम जैसे उत्पाद करीब 29% योगदान देते हैं। इसके अलावा बिटुमेन और मेथनॉल जैसे उत्पाद भी महत्वपूर्ण हैं।
इनऑर्गेनिक केमिकल्स का भी होता है आयात:
इनके अलावा नमक, सल्फर, पत्थर, इनऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, आयरन-स्टील और ग्लास जैसी वस्तुएं भी आयात सूची में शामिल हैं। छोटी मात्रा में सब्जियां, रेजिन, चमड़ा और उर्वरक भी भारत आयात करता है, जो उद्योग और कृषि दोनों के लिए उपयोगी हैं।
भारत द्वारा ईरान से प्रमुख आयात
ऑर्गेनिक केमिकल्स
खाद्य फल व मेवे (ड्राई फ्रूट्स, खजूर, सेब, बादाम)
खनिज ईंधन व तेल (पेट्रोलियम बिटुमेन, मेथनॉल)
नमक, सल्फर, मिट्टी, पत्थर, प्लास्टर
इनऑर्गेनिक केमिकल्स
प्लास्टिक
आयरन और स्टील
ग्लास और ग्लासवेयर
कहां होता है इसका उपयोग:
ऑर्गेनिक केमिकल्स भारत के पेट्रोकेमिकल और उर्वरक उद्योग के लिए जरूरी हैं। सूखे मेवे और फल उपभोक्ता मांग को पूरा करते हैं। वहीं बिटुमेन सड़क निर्माण में काम आता है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा मिलता है।
रणनीतिक पहलू और चुनौतियां
चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट भारत को मध्य एशिया तक पहुंच देने में मदद करते हैं। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय तनाव व्यापार को प्रभावित करते हैं, फिर भी रुपये में व्यापार व्यवस्था से संबंध बनाए रखे गए हैं। भविष्य में INSTC कॉरिडोर और नए समझौते इस व्यापार को और मजबूत कर सकते हैं।
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