भारत की ‘ऊन सिटी’ कौन-सी है, यहां जानें नाम
भारत में कई शहरों की अपनी पहचान है। हालांकि, इनमें से एक शहर ऐसा भी है, जिसे उसके मूल नाम के अलावा ‘ऊन सिटी’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह शहर, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत का भूगोल उठाकर देखें, तो हमें भारत के नक्शे में कई शहर देखने को मिलते हैं। इन शहरों की अपनी संस्कृति, विरासत और समृद्ध इतिहास है। कुछ शहरों को उनकी विशेषताओं की वजह से उन्हें उनके मूल नाम के अलावा एक उपनाम से भी जाना जाता है।
आपने भारत के अलग-अलग शहरों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक शहर ऐसा भी है, जिसे ऊन के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस शहर को ‘ऊन सिटी’ के रूप में जाना जाता है। कौन-सा है यह शहर, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस शहर को कहा जाता है ऊन सिटी(Wool City)
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि किस शहर को ऊन सिटी भी कहा जाता है। आपको बता दें कि पंजाब के लुधियाना को ‘ऊन सिटी’ के रूप में भी जाना जाता है। इसके पीछे औद्योगिक और आर्थिक कारण हैं।
क्यों कहा जाता है ऊन सिटी
भारत में उत्पादित होने वाले कुल होजरी और एक्रिलिक निटवियर का 90 फीसदी से अधिक उत्पादन अकेले लुधियाना में ही होता है। यहां स्वेटर, शॉल और सर्दी के अन्य गर्म कपड़े बनते हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में उत्पादित होने वाले कुल ऊनी और Knitwear का करीब 95% हिस्सा लुधियाना में ही बनाया जाता है। ऐसे में इस शहर को ऊन सिटी भी कहा जाता है।
लुधियाना में ऊन उद्योग का इतिहास
लुधियाना में ऊन उद्योग की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी। कश्मीर में जब आकाल की स्थिति हुई, तो कई बुनकर यहां आकर बस गए थे। वे अपने साथ बुनने की कला लेकर पहुंचे थे, जिन्होंने यहां बुनाई शुरू की और समय के साथ-साथ शहर ने ऊन सिलाई में अपनी पहचान बना ली।

निर्यात के लिए भी जाना जाता है लुधियाना
लुधियाना में बनने वाले उत्पादों की न सिर्फ भारत में आपूर्ति की जाती है, बल्कि इन्हें विदेशों में भी भेजा जाता है। यहां के उत्पादों को अमेरिका, यूरोप और रूस समेत मध्य पूर्व के देशों में निर्यात किया जाता है। यही वजह है कि सरकार ने इसे ‘टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सिलेंस’ से भी नवाजा है।
ऊन से हुआ है औद्योगिक विकास
लुधियाना में औद्योगिक विकास की राह को पार करने में ऊन उद्योग का प्रमुख योगदान रहा है। यहां ऊन के औद्योगिक क्षेत्र का पूरा इकोसिस्टम है, जिसमें ऊन का धागा बनाने से लेकर उसे रंगने और बुनना शामिल है।
यहां ऊन से संबंधित हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी इकाइयां मौजूद हैं, जिनमें लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है। ऐसे में यहां हर साल सर्दी के मौसम में भारत की जरूरतों को पूरा किया जाता है। आज भी भारतीय बाजारों में लुधियाना के बने कंबलों और अन्य हौजरी उत्पादों की मांग रहती है।
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