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आर्ट्स से 12वीं के बाद करियर विकल्प

Sep 20, 2018 10:58 IST
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आर्ट्स स्ट्रीम से जुड़ा पूर्वाग्रह

आर्ट्स के आसान होने तथा इसमें करियर स्कोप की कम संभावना जैसे पूर्वाग्रह बिलकुल निराधार हैं. इस विषय में भी बहुत चुनौतियां हैं तथा यह छात्रों को आगे के अध्ययन या करियर के लिए अच्छे अवसर प्रदान करते हैं.यूपीएससी, सिविल सर्विसेज जैसी कुछ प्रोफेशनल परीक्षाओं के लिए, आर्ट्स विषय का अध्ययन करने वाले छात्रों को अपनी एक मजबूत नींव बनाने में मदद मिलती है जिससे वे आगे चलकर इन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर समाज और करियर में एक उच्च मक़ाम हासिल करते हैं.

आधारभूत सब डोमेन

आर्ट्स स्ट्रीम में अवसरों की भरमार है. इसके अंतर्गत सबसे अधिक अपीलिंग सब्जेक्ट्स का चयन करने की स्वतंत्रता प्रत्येक छात्र को होती है. अपीलिंग से अभिप्राय है जिस विषय को पढ़ने में छात्र का मन लगता हो तथा उसमें ही वह आगे कुछ करने की सोचता हो. वह उसके विचार, रूचि आदि से मेल खाता हो.

आर्ट्स स्ट्रीम के कुछ प्रमुख सब-डोमेन हैं

मानविकी(ह्यूमेनिटी)

मानविकी एक विशाल क्षेत्र है और इसे कुछ शब्दों के माध्यम से परिभाषित करना संभव नहीं है.आम तौर पर, मानविकी के अंतर्गत ‘मनुष्य की स्थिति’ का अध्ययन किया जाता है.इसमें मानव पृष्ठभूमि में मानव व्यवहार, सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रणालियों के विकास के पीछे के कारणों को समझना तथा उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता लगाना आदि कार्य शामिल हैं. इस डोमेन में विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है और उनमें से कुछ हैं:

  • हिस्ट्री
  • लैंग्वेज
  • लिटरेचर
  • लॉ
  • फिलोसोफी
  • रिलीजन
  • परफॉर्मिंग आर्ट्स
  • एन्थ्रोपोलॉजी
  • कम्युनिकेशन
  • सोसियोलॉजी
  • साइकोलॉजी

ललित कला (फाइन आर्ट्स)

परिभाषा के अनुसार, ललित कला वस्तुतः एक ऐसी कला का विकास है जिसका अभ्यास पूरी तरह से अपने सौंदर्य मूल्यों और सौंदर्य में वृद्धि लिए किया जाता है. कला के क्षेत्र में ललित कला एक व्यापक शब्द है जिसमें विजुअल आर्ट्स, परफॉर्मिंग आर्ट्स और साहित्यिक कला आदि शामिल हैं. एक स्टडी स्ट्रीम के रूप में यह ऊपर वर्णित सभी तीन उप-डोमेन में रचनात्मक कौशल और विचार-प्रक्रिया के विकास को परिभाषित करता है.

दृश्य कला (विजुअल आर्ट्स)

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, दृश्य कला वह क्षेत्र है जो दृश्य कला रूपों के विकास से जुड़ा हुआ है. इसमें प्रसिद्ध कलाकारों और उनके कार्यों तथा उनकी प्रेरणा को समझने का प्रयास किया जाता है.इनके अलावा, इसमें दृश्य कला यानी चित्रकला, , मूर्तियां और स्वयं की तथा दूसरों की प्रतिमूर्तियाँ तैयार करने के लिए रचनात्मक कौशल को विकसित करने की कला का ज्ञान प्राप्त किया जाता है .विजुअल आर्ट्स के अंतर्गत प्रमुख उप-डोमेन में निम्नांकित विषय शामिल हैं:

  • पेंटिंग
  • ड्राइंग
  • स्कल्प्चर (मूर्ति कला)
  • फोटोग्राफी
  • कन्सेप्चुअल आर्ट्स
  • आर्किटेक्चर
  • बुनाई (विभिंग)
  • कपड़े (फेब्रिक्स)
  • परफॉर्मिंग आर्ट्स

परफॉर्मिंग आर्ट्स

परफॉर्मिंग आर्ट्स ललित कला का उप-डोमेन होने के साथ साथ इसमें छात्रों में प्रदर्शन कला कौशल के विकास पर भी जोर दिया जाता है. प्रदर्शन कलाओं के अध्ययन में संगीत, अभिनय, नृत्य और रंगमंच जैसे डोमेन शामिल हैं. छात्र कला प्रदर्शन के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण तकनीकों और कौशल के बारे में सीखते और जानते है. परफॉर्मिंग आर्ट्स स्ट्रीम्स के मुख्य अध्ययन डोमेन हैं:

  • म्यूजिक
  • थिएटर
  • डांस
  • गायन (सिंगिंग)
  • अभिनय (एक्टिंग)
  • कॉमेडी
  • डायरेक्शन
  • कोरियोग्राफी
  • एडिटिंग
  • मार्शल आर्ट

साहित्यिक कला (लिटरेरी आर्ट्स)

इसके नाम से ही पता चलता है, साहित्यिक कला साहित्यिक कला कृतियों यानी किताबों और उपन्यासों के लेखन से संबंधित है. लेखन और कहानी कहने वाले प्रमुख कुछ ऐसे कौशल हैं जो साहित्यिक कलाओं का अध्ययन करते समय ध्यान में रखने होते हैं.आजकल, इसमें एटीएल और बीटीएल मार्केटिंग अभियानों के लिए फिल्मों तथा  विज्ञापन और रचनात्मक प्रतिलिपि लेखन हेतु स्क्रिप्ट लेखन भी शामिल है. साहित्यिक कला डोमेन में प्रमुख स्पेशलाइजेशन सब डोमेन हैं:

  • कविता
  • उपन्यास
  • छोटी कहानियाँ
  • महाकाव्य
  • राइटिंग्स

सही विषयों / सब –डोमेन का चुनाव कैसे करें ?

जब आर्ट्स स्ट्रीम की बात आती है, तो अधिकांश छात्र ललित कला उप-डोमेन से कुछ ऐच्छिक विषयों के साथ मानविकी विषयों का चयन करते हैं. हाई स्कूल से ही छात्रों की इस विषय में पकड़ मजबूत होती है. हाई स्कूल ही किसी भी कोर्स का फाउंडेशन होता है इसलिए, छात्रों को इस अवधि के दौरान आर्ट्स स्ट्रीम के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विषयों के लेने की छुट दी जाती है. किन्तु आर्ट्स विषय का चयन करते समय छात्रों को निम्नलिखित बातों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए

खुद का इन्ट्रेस्ट : इस विषय में छात्रों को निर्णय लेने से पहले किसी विषय या उप-डोमेन में अपनी रुचि और जुनून पर पूरी तरह विचार करना चाहिए. एक रचनात्मक और शोध आधारित स्ट्रीम होने के नाते, कॉलेज में उच्च अध्ययन और उसके बाद के करियर के फैसलों में भी आपकी रुचि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

अपना शक्तिशाली (स्ट्रोंग पक्ष): अपने इन्ट्रेस्ट क्षेत्रों की पहचान के साथ साथ, आपको अपनी मजबूत पक्ष और कमजोरियों को भी ध्यान में रखना चाहिए. इससे आपको उप-डोमेन और विषयों के चयन में सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी.

आर्ट्स स्ट्रीम में आगे के अध्ययन का दायरा: एक और महत्वपूर्ण कारक जिसे हम नकार नहीं सकते वह है एकेडमिक स्कोप और करियर का स्कोप. आर्ट्स स्ट्रीम में प्रत्येक विषय और उप-डोमेन प्रकृति में विशाल है और इसमें विषयों और अवधारणाओं की एक विविध श्रृंखला शामिल है. इसलिए, सभी के लिए विषय या डोमेन में आगे की पढ़ाई के स्कोप को समझना बहुत महत्वपूर्ण है.

आर्ट्स स्ट्रीम में आगे के अध्ययन का स्कोप

10 वीं कक्षा के बाद किसी भी विषय का चयन करने के दौरान  छात्रों को कई कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है; उनमें से सबसे महत्वपूर्ण उस विषय के अध्ययन का स्कोप होना चाहिए.

साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम्स में उनके मुख्य विषय लगभग समान होते हैं लेकिन जब बात आर्ट्स स्ट्रीम की आती है तो मामला काफी अलग होता है. आर्ट्स स्ट्रीम के लिए, आगे के अध्ययनों के लिए उपलब्ध विकल्पों की अधिकता छात्रों के लिए हाई स्कूल के दौरान ही सही विषयों को चुनना महत्वपूर्ण बनाती है. उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति कार्टोग्राफी में अपना करियर बनाने की उम्मीद कर रहा है तो उनके लिए भूगोल का चयन हाई स्कूल के दौरान ही ऐच्छिक विषयों में से एक के रूप में करना महत्वपूर्ण है. आर्ट्स स्ट्रीम के अंतर्गत छात्र निम्नलिखित विषयों में डिग्री हासिल कर सकते हैं

बैचलर डिग्री कोर्स

बैचलर ऑफ आर्ट्स / बीए सबसे लोकप्रिय ग्रेजुएशन लेवल का कोर्स है जिसे हाई स्कूल की पढ़ाई के उपरांत ही किया जाता है. इसके अंतर्गत विभिन्न विषय हैं जिसे छात्र अपने करियर के अनुसार चुन सकते हैं और उस विषय में आगे बढ़ सकते हैं.आम तौर पर, कोर्स के पहले वर्ष के दौरान, छात्रों को तीन प्रमुख विषयों को चुनना होता है और अंतिम वर्ष के दौरान, ऑनर्स के लिए एक मूल विषय चुनना होता है. आर्ट्स स्ट्रीम छात्रों के लिए उपलब्ध लोकप्रिय बैचलर डिग्री कोर्स में शामिल हैं:

  • इतिहास में बीए
  • भूगोल में बीए
  • राजनीति विज्ञान में बीए
  • लोक प्रशासन में बीए
  • अंग्रेजी साहित्य में बीए
  • अर्थशास्त्र में बीए

टेक्नीकल कोर्सेज

यदि आपने आर्ट्स स्ट्रीम का चयन किया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आगे चलकर आप कोई टेक्नीकल कोर्स में एडमिशन नहीं ले सकते हैं.अंडरग्रेजुएट लेवल पर आर्ट स्ट्रीम छात्रों के लिए कुछ टेक्नीकल कोर्सेज भी उपलब्ध हैं जिसका चयन कर छात्र भविष्य में टेक्नीकल फील्ड में भी अपना करियर बना सकते हैं.

बीसीए - बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन

बी.आर्क - बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर

लॉ कोर्सेज

यदि कानूनी दाव पेंच आपको अच्छे लगते हैं तथा आप भविष्य में एक अधिवक्ता बनना चाहते हैं तो हाई स्कूल में आर्ट्स विषय का चयन करना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. आर्ट्स विषय से ग्रेजुएशन करने के बाद एलएलबी किया जा सकता है.आम तौर पर, एलएलबी कोर्सेज में शामिल होने की योग्यता स्नातक की डिग्री है. हालांकि, आजकल छात्र कानून में 5 साल के एकीकृत कार्यक्रमों का चयन भी कर सकते हैं.

बीए + एलएलबी - बैचलर ऑफ आर्ट्स और बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ

बीबीए + एलएलबी - बैचलर ऑफ बिज़नस एडमिनिस्ट्रेशन और बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ

मैनेजमेंट कोर्सेज

अगर करियर की योजना और विकास की बात की जाय तो इस सन्दर्भ में मैनेजमेंट विषय बहुत सफल रहा है. आर्ट्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए भी 12 वीं पूरा करने के बाद कई मैनेजमेंट कोर्सेज उपलब्ध हैं.इनमें ग्रेजुएशन डिग्री लेवल के कोर्सेज, एकीकृत पांच साल के कोर्सेज और यहां तक ​​कि शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन प्रोग्राम्स भी शामिल हैं. हालांकि, उनमें से सबसे लोकप्रिय हैं :

  • बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन )
  • बीएमएस (बैचलर ऑफ बिजनेस स्टडीज )
  • एकीकृत बीबीए + एमबीए प्रोग्राम (5 साल की अवधि)
  • बीएचएम (बैचलर ऑफ होटल मैनेजमेंट)
  • रीटेल मैनेजमेंट  (डिप्लोमा)

फैशन डिजाइन / डिजाइन कोर्सेज

डिजाइनिंग आर्ट्स छात्रों के लिए एक बड़ा करियर डोमेन है, खासकर उन छात्रों के लिए जो विजुअल आर्ट्स में विशेषज्ञ हैं. आर्ट्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए डिजाइन स्ट्रीम में कई ग्रेजुएशन लेवल के कोर्सेज उपलब्ध हैं. डिजाइन में फुल टाइम तीन साल के ग्रेजुएशन कोर्सेज के अलावा, छात्र विभिन्न संस्थानों द्वारा सर्टिफिकेशन और डिप्लोमा कोर्सेज भी कर सकते हैं. उनमें से कुछ हैं:

  • बैचलर ऑफ टेक्सटाइल डिज़ाइन
  • बैचलर ऑफ डिज़ाइन (एक्सेसरी)
  • बैचलर ऑफ फैशन कम्युनिकेशन
  • बैचलर ऑफ इंटीरियर डिजाइनिंग
  • बैचलर ऑफ प्रोडक्ट डिज़ाइन
  • फर्नीचर और इंटीरियर डिजाइन कोर्सेज
  • बैचलर ऑफ डिजाइन (लेदर)
  • बैचलर ऑफ फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी

परफॉर्मिंग आर्ट्स कोर्सेज

उन छात्रों के लिए जो परफॉर्मिंग आर्ट्स में रुचि रखते हैं और इसमें अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए कक्षा 12 आर्ट्स विषय से पास करने के बाद कई परफॉर्मिंग आर्ट्स कोर्सेज उपलब्ध हैं. इन कोर्सेज को विशेष रूप से आवश्यक ज्ञान हासिल करने और आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद हेतु ही डिज़ाइन किया गया है. इस डोमेन में सबसे लोकप्रिय कोर्सेज परफॉर्मिंग आर्ट्स या बीपीए में बैचलर डिग्री है. इनके अलावा, संबंधित परफॉर्मिंग आर्ट्स के लिए विशिष्ट शॉर्ट-टर्म डिप्लोमा और सर्टिफिकेट लेवल कोर्स भी विभिन्न संस्थानों द्वारा कराये जाते हैं अर्थात स्क्रिप्ट लेखन में डिप्लोमा और डांस में डिप्लोमा इत्यादि.

कला स्ट्रीम छात्रों के लिए करियर स्कोप

अब, आर्ट स्ट्रीम छात्रों के लिए करियर और नौकरी के अवसरों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण पहलुओं बात की जाय.आर्ट्स की विविध प्रकृति के लिए धन्यवाद,  आर्ट्स पृष्ठभूमि के छात्रों के पास करियर विकल्प और नौकरी के भरपूर अवसर हैं. कला स्ट्रीम छात्रों के लिए सबसे लोकप्रिय करियर विकल्प क्षेत्र में टीचिंग है और वे अपने विषय में स्पेशलाइजेशन करके इस फील्ड में आसानी से जा सकते हैं .इसी तरह, वे आगे के अध्ययन विकल्प के आधार पर अन्य करियर विकल्पों का भी पता लगा सकते हैं. इनमें बिजनेस मैनेजर, वकील, संगीतकार, डांसर, कलाकार, अभिनेता, व्यापारी, अर्थशास्त्री, सांख्यिकीविद्, वास्तुकार, फैशन डिजाइनर, लेखक, इतिहासकार और पुरातत्वविद् आदि शामिल हैं.

उपर्युक्त करियर विकल्पों के अलावा, आर्ट्स स्ट्रीम के छात्र विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में सरकारी नौकरियों का विकल्प भी चुन सकते हैं.यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा जो आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और अन्य उच्च स्तरीय ब्यूरोक्रैटके लिए योग्यता परीक्षा है, आर्ट्स ग्रुप वाले छत्रों का एक पसंदीदा करियर विकल्प है.वैकल्पिक रूप से वे ब्यूरोक्रेसी में शामिल होने के लिए बैंकिंग क्षेत्र भर्ती परीक्षा, एसएससी / कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा या राज्य पीसीएस परीक्षाओं में भी शामिल हो सकते हैं.

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