दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में विधानमंडल ने दिल्ली राज्य वस्तु और सेवाकर विधेयक (जीएसटी) को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. विधानसभा में वस्तुओं की कर दर कम करने के प्रस्ताव पर व्यापक विचार विमर्श के बाद इस विधेयक को मंजूरी प्रदान की गई.
दिल्ली के वित्त एवं राजस्व मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा सदन पटल पर पेश किये गये दिल्ली जीएसटी विधेयक को सत्तारूढ़ दल आप और विपक्षी दल भाजपा के समर्थन से सदन ने पारित कर दिया.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जीएसटी से जुड़े केन्द्रीय कानून में कर की उच्च दरें निर्धारित करने के अलावा दिल्ली में कर की अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत तक निर्धारित करने की बात की. इसका सीधा लाभ मध्यम और निम्न आयवर्ग के लोगों के अलावा समूची अर्थव्यवस्था को होगा. कर की निम्न दर रहने से कर संग्रह का ग्राफ भी उंचा होने से राजस्व स्वत: बढ़ता है.
दिल्ली विधानसभा सदन ने उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले कर की अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव पारित करते हुये कहा कि इसमें 5 प्रतिशत हिस्सेदारी केन्द्र और 5 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकारों की होनी चाहिये.
सिसोदिया के अनुसार दिल्ली जीएसटी विधेयक में प्रस्तावित कानून को लागू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने और कर दरों को संतुलित रखने के प्रावधान किये गये है.
दिल्ली जीएसटी कानून लागू होने पर दिल्ली सरकार को सालाना 5 से 6 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. जीएसटी परिषद ने कर की राष्ट्रीय स्तर पर चार स्तरीय दरें तय करते हुये इन्हें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के दायरे में रखा है.
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