आरबीआई ने एसबीआई व आईसीआईसीआई को देश के महत्वपूर्ण प्रणालीबद्ध बैंकों में शामिल किया

Sep 3, 2015, 16:17 IST

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 31 अगस्त 2015 को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया तथा आईसीआईसीआई बैंक को देश के महत्वपूर्ण प्रणालीबद्ध बैंकों में शामिल किया

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 31 अगस्त 2015 को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) तथा आईसीआईसीआई बैंक को देश के महत्वपूर्ण प्रणालीबद्ध बैंकों (डी-एसआईबी) में शामिल किया. इसके लिए आरबीआई ने 22 जुलाई 2014 को एक फ्रेमवर्क तैयार किया था.

इन बैंकों को 31 मार्च 2015 तक डी-एसआईबी श्रेणी के लिए बनाये गये फ्रेमवर्क के तहत चुना गया है.

इसके अतिरिक्त, इन बैंकों को डी-एसआईबी फ्रेमवर्क के तहत एसोसिएट बकेट प्रणाली में रखा गया है तथा इससे संबंधित संरचना को जनवरी 2016 तक चरणबद्ध किया जायेगा.


परिणामस्वरूप एसबीआई को बकेट 3 में स्थान प्राप्त हुआ है तथा जोखिम भारित आस्तियों (आरडब्यूप   ए) के प्रतिशत के रूप में अतिरिक्तह सामान्यो इक्विटी टियर-1 में 0.6 प्रतिशत अंक मिले हैं.

दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक 0.2 प्रतिशत आरडब्यू    ए के साथ बकेट 1 में मौजूद है.

डी-एसआईबी के लिए फ्रेमवर्क

डी-एसआईबी के लिए जारी यह फ्रेमवर्क वर्ष 2008 के आर्थिक संकट के बाद 22 जुलाई 2014 को जारी किया गया था. इसे वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी) द्वारा अक्टूबर 2010 में जारी सिफारिशों के आधार पर बनाया गया है. वित्तीय स्थिरता बोर्ड ने सभी सदस्य राष्ट्रों को यह निर्देश दिया कि वह अपने प्रणालिबद्ध बैंकों का चयन करें.

फ्रेमवर्क के भाग के तौर पर डी-एसआईबी को उनके प्रणालीबद्ध महत्व के रूप में चार भागों में बांटा गया है. इसके अतिरिक्त उन्हें जोखिम भारित आस्तियों में 0.2 प्रतिशत से 0.80 प्रतिशत सीआरआर प्राप्त करना भी आवश्यक है.

डी-एसआईबी के लिए अतिरिक्त सीईटी1 आवश्यकतायें 1 अप्रैल 2016 से मान्य होंगी जबकि यह पूर्ण रूप से 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी होगी. अतिरिक्त सीईटी1 की आवश्यकता को कैपिटल कंज़रवेशन बफर में शामिल किया जायेगा.

यदि कोई विदेशी बैंक भारत में मौजूद है तथा वह वैश्विक प्रणालीबद्ध महत्वपूर्ण बैंक है तो उसे अतिरिक्त सीईटी1 की शर्त को मानना होगा.

डी-एसआईबी की पहचान


इसे दो चरणों में पहचाना जा सकता है. बैंकों के नमूने से प्रणालीगत महत्व के लिए मूल्यांकन किया जाना चाहिए. बैंकों का चयन उनके आकार के अनुसार तथा वार्षिक जीडीपी के प्रतिशत पर निर्भर होना चाहिए.

इसके साथ ही आरबीआई ने एक मूल्यांकन पद्धति को अपनाया है जिसमें घरेलू महत्व के बैंकों के लिए उपयुक्त संशोधनों के साथ जी-एसबीआईएस की पहचान करने के लिए उपयुक्त बदलाव अपनाए जा सकते हैं.

मूल्यांकन के लिए प्रयोग किये गए संकेतक हैं: आकार, सादृश्यता, प्रतिस्थापन और जटिलता. प्रणालीबद्ध महत्व के बैंकों का चयन करने के लिए बैंकों के एक समग्र प्रणालीगत महत्व के स्कोर की गणना की जाएगी.

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Gorky Bakshi is a content writer with 9 years of experience in education in digital and print media. He is a post-graduate in Mass Communication
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