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जहांगीर के खिलाफ खुसरो का विद्रोह

खुसरो मिर्ज़ा, जहांगीर का ज्येष्ठ पुत्र था. उसने अपने पिता और वर्तमान शासक जहाँगीर के खिलाफ 1606 ईस्वी में विद्रोह कर दिया था.
Aug 30, 2014 16:51 IST
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खुसरो मिर्ज़ा, जहांगीर का ज्येष्ठ पुत्र था. उसने अपने पिता और वर्तमान शासक जहाँगीर के खिलाफ 1606 ईस्वी में विद्रोह कर दिया था. उसने अपने दादा जी अकबर को श्रद्धांजलि देने के बहाने आगरा से सिकंदरा  बाद 350 घुड़सवारो को लेकर चल दिया था. उसका साथ हुसैन बेग ने दिया और उसके सैनिकों में शामिल हो गया. इस तरह सयुंक्त सेना नें लाहौर की तरफ कूच किया और जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह कर दिया और लाहौर के किले की घेराबंदी कर दिया.

यह ध्यान देने की बात है की उसने लाहौर की किले की घेरबंदी करने के पूर्व सिखों के पाँचवे गुरु अर्जुन देव का आशीर्वाद लिया था. हालांकि वह मुगल सेना द्वारा पराजित किया गया और सौतेले भाई खुर्रम द्वारा उसकि हत्या कर दी गयी.

जहांगीर की रानियाँ 

जहांगीर की असंख्य पत्नियां थीं लेकिन उनमें से तीन प्रमुख थीं. उसकी पहली पत्नी मनभावती बाई थी जोकि अम्बर के राजा भगवानदास की पुत्री और विद्रोही राजकुमार खुसरो मिर्जा की मां थी.

जहांगीर की एक और रानी जोधपुर के राजा की पुत्री थी जिनका नाम मानवती था. वह ख़ुर्रम की माँ थी जोकि बाद में मुग़ल शासक शाहजहां के रूप चर्चित रहा.

उसकी तीसरी पत्नी नूरजहाँ थी. उसका असली नाम मेहरुन्निसा था. वह एक अफगान सैनिक शेर अफगान कुली खान की विधवा थी. 1611 ईस्वी में जहांगीर ने उससे विवाह किया था.

जहाँगीर के अत्यधिक मद्यपान करने के कारण वह बीमार पड़ गया जिसकी वजह से नूरजहाँ मुग़ल साम्राज्य के वास्तविक शासक की तरह व्यवहार करने लगी. वह इतनी प्रभावशाली हो गयी थी की मुग़ल सिक्कों में उसके नाम छापा जाने लगा.

जहांगीर के उत्तराधिकारी 

जहांगीर के चार पुत्र अर्थात् खुसरो, परवेज, खुर्रम और शहरयार थे. उनमें से, खुर्रम सबसे सक्षम और महत्वाकांक्षी था. उसने बिहार और बंगाल में स्वतंत्र संप्रभुता प्राप्त करने की भी कोशिश की थी जब उसने 1623-24 ईस्वी में जहांगीर के खिलाफ विद्रोह कर दिया था. हालांकि, वह  मुगल सेनापति महाबत खान से हार गया था और उसके समक्ष प्रस्तुत किया गया था.

जहांगीर की 1627 ईस्वी में मृत्यु हो गई थी. नूरजहाँ ने  शहरयार को राजा बनाने की कोशिश की. हालांकि, शाहजहां को अपने श्वशुर आसफ खान का समर्थन मिला जिसकी वजह से ख़ुर्रम ने शहरयार की हत्या कर दी और शाहजहां के नाम से सिंहासन पर बैठा.

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अबुल फजल: अकबरनामा के लेखक