भारत में कैसे और कहां लगी थी अंग्रेजों की पहली फैक्ट्री, विस्तार से पढ़ें
यह बात हम सभी जानते हैं कि भारत में अंग्रेजों ने करीब 200 सालों तक राज किया। उनकी यह शुरुआत व्यापार से शुरू हुई थी। व्यापार की आड़ में अंग्रेजों ने मद्रास, बांबे और कलकत्ता पर अपना अधिकार किया और धीरे-धीरे सत्ता को पूरे भारत में काबिज कर दिया।
भारतीय इतिहास में ब्रिटिश का अहम किरदार देखने को मिलता है, जिन्होंने भारत पर 200 साल तक राज किया। इस दौरान अंग्रेजों ने भारत में अपनी प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक जड़ों को मजबूत किया। उन्होंने भारत से धन लूटा और इंग्लैंड पहुंचाया। वे सिर्फ व्यापारी बनकर भारत आए थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने मद्रास, बांबे और कलकत्ता में अपना शासन स्थापित किया और इसे पूरे भारत में फैला दिया। इस लेख में हम जानंगे कि आखिर अंग्रेजों ने भारत में कहां और कैसे अपनी पहली फैक्ट्री लगाई थी।
फैक्ट्री लगाने की पहली कोशिश
भारत में पहले से ही पुर्तगाली व्यापार कर रहे थे। ऐसे में बाद में अंग्रेजों ने भी भारत में व्यापार की सोची और 1608 में ‘हेक्टर’ नामक पानी के जहाज से कैप्टन विलियम हॉकिन्स मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार में पहुंचे। उन्होंने जहांगीर से सूरत में फैक्ट्री लगाने का मांग की। क्योंकि, सूरत व्यापार का बड़ा केंद्र हुआ करता था। जहांगीर ने पुर्तगालियों के दबाव में अंग्रेजों को फैक्ट्री लगाने से मना कर दिया।
1611 में स्थापित की अस्थायी फैक्ट्री
मुगल सम्राट से अनुमति न मिलने के बाद अंग्रेज गोलकुंडा के राजा पास पहुंचे और उन्हें यहां से आंध्र प्रदेश के मसूलीपट्टनम में फैक्ट्री लगाने की इजाजत मिल गई। ऐसे में साल 1611 में अंग्रेजों ने अपनी पहली फैक्ट्री लगाई।
1612 में स्वाली के युद्ध से खुला रास्ता
पुर्तगाली और अंग्रेजों के बीच चल रही तनातनी के बीच 1612 में ‘स्वाली का युद्ध’ हुआ, जिसमें अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को हरा दिया था। इससे मुगल सम्राट जहांगीर बहुत प्रभावित हुआ और उसने स्थायी फैक्ट्री लगाने का फरमान जारी कर दिया। इसके बाद अंग्रेजों ने 1613 में सूरत में अपनी पहली स्थायी फैक्ट्री लगाई।
उस समय क्या होता था फैक्ट्री का मतलब
उस समय फैक्ट्री का मतलब किसी कारखाने से नहीं था, बल्कि यह एक प्रकार का वेयरहाउस हुआ करती थी। इसमें अंग्रेज नील, मसाले, सूती कपड़े और अन्य उत्पादों को रखते थे, जिन्हें जरूरत के हिसाब से लंदन व्यापार के लिए भेजा जाता था। फैक्ट्रियों की देखरेख करने वाले व्यक्ति को फैक्टर कहा जाता था। बाद में इन फैक्ट्रियों के चारों तरफ दीवारें बनाकर किलेबंदी की गई थी।
1615 में पहुंचे थॉमस रो
साल 1615 में इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में पहुंचे और उन्होंने अन्य फैक्ट्रियां खोली। उन्होंने जहांगीर से विशेष अनुमति मिलने के बाद आगरा और अहमदाबाद में भी फैक्ट्री स्थापित की थी।
मद्रास में बनाया पहला किला
अंग्रेजों ने अपना पहला किला सेंट जॉर्ज मद्रास में स्थापित किया था। उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी पूर्वी तट पर ऐसी जगह की तलाश कर कर रही थी, जहां से सूती कपड़े का व्यापार हो सके। इसके लिए चंद्रागिरी के राजा के अधीन मद्रासपटनम नामक जगह को पट्टे पर लिया गया और वहां अंग्रेजों ने अपना पहला किला बनवाया। इस किले में अंग्रेजों के परिवार भी रहा करते थे।
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