अंग्रेजों के समय क्या थी महलवाड़ी व्यवस्था, विस्तार से पढ़ें
भारत में अंग्रेजों के समय अलग-अलग व्यवस्थाएं देखने को मिलती हैं। इन व्यवस्थाओं में हमें महलवाड़ी व्यवस्था के बारे में भी पढ़ने को मिलता है। यह वह व्यवस्था थी, जिसमें गांवों के मुखिया को अधिक शक्तिशाली पद मिला, जिसे लंबरदार कहा जाता है। हालांकि, कुछ जगहों पर नंबरदार कहा जाता है। क्या थी यह पूरी व्यवस्था, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहा विभिन्न सुल्तानों और मुगलों से लेकर ब्रिटिश का राज देखने को मिलता है। अंग्रेजों ने भारत में करीब 200 सालों तक राज किया और इस दौरन उन्होंने यहां शासन प्रणाली को अपने हिसाब से चलाया। इस कड़ी में अंग्रेजों द्वारा भारत में कई व्यवस्थाओं को लागू किया गया था, जिसमें से एक महलवाड़ी व्यवस्था थी।
यह वही व्यवस्था थी, जिससे गांव के मुखिया को एक शक्तिशाली पद लंबरदार, तालुकादर और मालगुजार मिला था। आज भी कई लोग अपने नाम के पीछे लंबरदार या नंबरदार शब्द का उपयोग करते हैं। क्या थी महलवाड़ी व्यवस्था, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
क्या होता है महलवाड़ी का अर्थ
सबसे पहले हम यहां महलवाड़ी के अर्थ को समझ लेते हैं। आपको बता दें कि ब्रिटिश समय में ‘महल’ शब्द गांवों के समूह को कहा गया है। इसके तहत पूरे गांव को एक इकाई माना जाता था।
क्या थी महलवाड़ी व्यवस्था(Mahalwari System)
अंग्रेजों के समय महलवाड़ी व्यवस्था एक भू-राजस्व प्रणाली थी, जिसे स्थायी बंदोबस्त और रैयतवाड़ी व्यवस्था के बाद लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत गावों को एक इकाई मानकर पूरे गांव से भू-राजस्व लिया जाता था।
पढ़ेंः अंग्रेजों के समय क्या था ‘सूर्यास्त कानून’, जानें यहां
कैसे काम करती थी महलवाड़ी व्यवस्था
महलवाड़ी व्यवस्था के तहत ब्रिटिश किसी किसान या जमींदार के पास नहीं जाते थे, बल्कि पूरे गांव से समझौत कर दिया जाता था। समझौते के तहत एक दर तय होती थी, जिसे अगले 30 वर्षों में बदला जाता था।
कब और किसने लागू की थी महलवाड़ी व्यवस्था
महलवाड़ी व्यवस्था का प्रस्ताव 1819 में होल्ट मैकेंजी द्वारा दिया गया था। इसे 1822 में रेगुलेशन द्वारा लागू किया गया, लेकिन उस समय इसमें राजस्व के रूप में करीब 80 फीसदी सरकार के पास चला जाता था। इससे किसानों के पास बहुत ही कम अनाज बचता था। बाद में 1833 में विलियम बेंटिक ने इसमें सुधार किए और इसकी दर घटाकर 66 फीसदी की।
कहां-कहां लागू की थी महलवाड़ी व्यवस्था
महलवाड़ी व्यवस्था को मुख्य रूप से पंजाब, अवध और मध्य भारत में लागू किया गया था। पंजाब और इसके आसपास के हिस्सों में गांव के मुखिया को ‘लंबरदार’ कहा जाता था, जो कि पूरे गांव का लगान लेकर अंग्रेजों का देता था। वहीं, अवध में इसे ‘तालुकदार’ कहा जाने लगा। दूसरी तरफ, मध्य भारत में इसे ‘मालगुजार’ कहा जाता था।
इस व्यवस्था से तैयार हुआ जमीनों का बाजार
आपको बता दें कि महलवाड़ी व्यवस्था के तहत पहली बार जमीनों की मैपिंग की गई थी। वहीं, लगान न देने की वजह से किसानों को साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था। इससे पहली बार जमीनों को बेचने का बाजार तैयार हुआ था।
पढ़ेंः भारत में अंग्रेजों के समय क्या होती थी रैयतवाड़ी व्यवस्था, विस्तार से पढ़ें
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.