भारत में किस मुगल सम्राट का नाम था रोशन अख्तर, जानें यहां
भारत में आपने अलग-अलग मुगल शासकों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। कुछ मुगल सम्राटों को उनके पूरे नाम के बजाय कुछ उपनामों से बुलाया जाता था। इस कड़ी में एक मुगल सम्राट ऐसे भी रहे हैं, जिनका नाम रोशन अख्तर था, लेकिन उन्हें किसी और नाम से पुकारा जाता था।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां मुगलों का 331 सालों का शासन देखने को मिलता है। इस दौरान भारत में कई मुगल शासक हुए, जिन्होंने अपने समय में भारत में अलग-अलग नीतियों का लागू किया और भारत की सत्ता की राह बदली। कुछ मुगल सम्राटों को उनके मूल नाम के अलावा अधूरे नाम या फिर उपनामों से पुकारा जाता था।
इनमें से एक मुगल सम्राट ऐसे भी रहे हैं, जिन्हें रोशन अख्तर के नाम से भी जाना जाता था, लेकिन प्रजा उन्हें किसी और नाम से बुलाती थी, कौन थे यह मुगल सम्राट, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस मुगल सम्राट का नाम था रोशन अख्तर
आपको बता दें कि मुगल सम्राट मोहम्मद शाह का बचपन का नाम रोशन अख्तर था। उनका पूरा नाम अबुल फतेह नसीरुद्दीन रोशन अख्तर मोहम्मद शाह था। हालांकि, लोग उन्हें मोहम्मद शाह से पुकारते थे।
कौन थे रोशन अख्तर
रोशन अख्तर बहादुर शाह प्रथम के चौथे बेटे जहां शाह के बेटे और औरंगजेब के परपोते थे। उनका जन्म 1702 में फतेहपुर सीकरी में हुआ था।
बाद में नाम में जुड़ा ‘रंगीला’
मोहम्मद शाह के नाम में बाद में इतिहासकारों ने रंगीला’ शब्द जोड़ दिया था। इसके पीछे इतिहासकार कारण बताते हैं कि मोहम्मद शाह प्रशासनिक गतिविधियों में रूचि नहीं लेते थे, बल्कि वह विलासितापूर्ण जीवन पसंद करते थे। उनका अधिकांश समय संगीत और नृतक में बीता करते थे। ऐसे में इतिहासकारों ने उन्हें रंगीला’ की उपाधि दी थी।
रोशन अख्तर के काल में हुई यह बड़ी घटना
रोशन अख्तर यानि कि मोहम्मद शाह रंगीला के समय में ही भारत में 1739 में नादिर शाह का आक्रमण हुआ था। नादिर शाह को ईरान का नेपोलियन कहा जाता था, जिसने दिल्ली में लूट के दौरान एक ही दिन में कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
वहीं, नादिर शाह ने ही दिल्ली के लाल किले से सोने का सिंहासन यानि कि मयूर सिंहासन और कोहीनूर हीरे को लूटा था। इतिहासकारों के मुताबिक, उस समय नादिर शाह ने दिल्ली से करोड़ों रुपये की लूट की थी।
बन गई थी थी अलग रियासतें
मोहम्मद शाह रंगीला के समय में ही हैदराबाद, अवध और बंगाल जैसी अलग-अलग रियासतें बन गई थी, जहां के निजाम खुद से ही अपना रियासत चला रहे थे। हैदराबाद में निजाम-उल-मुल्क ने अपनी रियासत बना ली थी, जिन्हें बाद में असफ झा कहा गया।
वहीं, अवध में सादत खान ने स्वतंत्र सत्ता बना ली थी, जबकि बंगाल में मुर्शील कुली खान का शासन था। आपको बता दें कि मोहम्मद शाह ने करीब 26 सालों तक राज किया, लेकिन अलग-अलग रियासतें बनने की वजह से मुगल प्रभाव कम हो गया था और आगामी वर्षों में मुगल पतन बढ़ता गया था।
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