भारत का सबसे पुराना शिक्षा बोर्ड, 10+2 प्रणाली का है जनक
भारत में वर्तमान में अलग-अलग राज्यों के अपने बोर्ड हैं। हालांकि, भारत का सबसे पुराना एजुकेशन बोर्ड आज भी कार्यरत है। आज हम जो 10+2 की बोर्ड व्यवस्था देखते हैं, वह भारत के सबसे पुराने बोर्ड की देन ही है।
भारत में 10वीं और 12वीं परीक्षाओं का आयोजन विभिन्न राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाता है। इस कड़ी में भारत के अलग-अलग राज्यों के शिक्षा बोर्ड देखने को मिलते हैं। हालांकि, यदि सबसे पुराने राज्य शिक्षा बोर्ड की बात करें, तो यह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद्(UPMSP) है।
यह बोर्ड बीते 105 सालों से लगातार सेवा में है और इसे भारत में 10+2 शिक्षा प्रणाली का जनक भी कहा जाता है। कब, कहां और कैसे बना था यह बोर्ड, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
प्रयागराज विश्वविद्यालय आयोजित करता था परीक्षा
उत्तर प्रदेश को 20वीं सदी में United Provinces कहा जाता था। उस समय 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं का आयोजन इलाहबाद विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता था। हालांकि, समय के साथ छात्रों की संख्या बढ़ी, जिससे विश्वविद्यालय पर भी बोझ बढ़ा। ऐसे में शिक्षाविदों का मानना था कि विश्वविद्यालय का काम रिसर्च और डिग्री से जुड़ा होना चाहिए, जबकि विश्वविद्यालय स्कूली शिक्षा के लिए भी जिम्मेदार था।
सैडलर कमीशन ने दी अपनी सिफारिशें
साल 1917-19 में सैडलर कमीशन आया, जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि स्कूली शिक्षा के लिए अलग से बोर्ड बनना चाहिए। इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय पर नहीं होनी चाहिए, बल्कि अलग से एक स्वायत्त बोर्ड होना चाहिए।
1921 में बना UP Board
ब्रिटिश शासन में 1921 में यूनाइटेड प्रोविंस लेजिस्लेटिव काउंसिल ने 'इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम' (Intermediate Education Act) पारित किया। इसके तहत 'बोर्ड ऑफ हाईस्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन, उत्तर प्रदेश' की स्थापना की गई।
गठन के 2 साल बाद हुई परीक्षाएं
यूपी बोर्ड का गठन 1921 में हो गया था, हालांकि परीक्षाओं का आयोजन 1923 में पहली बार किया गया। बोर्ड का मुख्यालय इलाहाबाद में ही बनाया गया था और आज भी बोर्ड इलाहाबाद के नाम से जाना जाता है।
10+2 प्रणाली का जनक है बोर्ड
वर्तमान में आप भारत में जो 10+2 प्रणाली देखते हैं, इसका जनक यूपी बोर्ड ही है। इस व्यवस्था को सबसे पहले यूपी बोर्ड ने शुरू किया था, जिसे बाद में अन्य बोर्ड ने अपनाया।
कई रियासतों के छात्र देते थे परीक्षाएं
भारत के आजाद होने से पहले यूपी बोर्ड इतना बड़ा था कि इसमें राजस्थान की प्रमुख रिसायतें जैसेः जयपुर और ग्वालियर व मध्य भारत के कई छात्र परीक्षाएं देते थे। हालांकि, बाद में इनके लिए अलग से बोर्ड की स्थापना की गई।
सबसे अधिक छात्रों वाला बोर्ड
यूपी बोर्ड में हर साल लाखों छात्र परीक्षाएं के लिए बैठते हैं। औसत स्तर पर देखें, तो बोर्ड में हर साल करीब 50 लाख छात्र 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं देते हैं। साल 2025 में भी 10वीं और 12वीं में 53 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया है।
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