क्या होती है शीतलहर और कब होती है इसकी घोषणा, जानें वैज्ञानिक मापदंड
इस समय उत्तर भारत कड़ाके की ठंड की चपेट में है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों में ठिठुरन का दौर जारी है। इस बीच मौसम विभाग ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शीतलहर की घोषणा की है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर शीतलहर क्या होती है और इसके वैज्ञानिक मापदंड क्या होते हैं।
उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों में इस समय जबरदस्त ठंड पड़ रही है। समूचा इलाका कड़ाके की ठंड की चपेट में है। सर्दी की ठिठुरन को देखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। साथ ही, शीतलहर की घोषणा भी की है। हालांकि, यहां समझने वाली बात यह है कि शीतलहर होती क्या है और वे कौन-से वैज्ञानिक मापदंड हैं, जिनके आधार पर शीतलहर की घोषणा की जाती है। यदि आप नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
क्या होती है शीतलहर(Cold Wave)
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि शीतलहर क्या होती है। आपको बता दें कि शीतलहर मौसम की एक विशेष परिस्थिति होती है। इस दौरान तापमान में सामान्य की तुलना में अधिक गिरावट होती है, जिससे ठंड का अहसास बढ़ जाता है।
शीतलहर के वैज्ञानिक कारण क्या हैं
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, यदि मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस या इससे नीचे जाता है, तो शीतलहर मानी जाती है। वहीं, यदि किसी स्थान पर न्यूनतम तापमान वहां के औसत तापमान से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंचे, तो वह शीतलहर मानी जाती है।
क्या होती है गंभीर शीतलहर
मौसम विभाग के मुताबिक, गंभीर शीतलहर भी होती है। इसके लिए यदि न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाए या फिर 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, तो यह गंभीर शीतलहर की श्रेणी में माना जाता है।
क्यों चलती है शीतलहर
शीतलहर चलने के पीछे कई कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
पहाड़ों पर बर्फबारी
हिमालय के पर्वतों पर जब भी बर्फबारी होती है, तो उस दौरान वहां से आने वाली हवाएं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में शीतलहर की घटना को जन्म देती हैं।
पश्चिमी विक्षोभ भी है कारण
भूमध्य सागर की ओर से आने वाली हवाएं, जब हिमालय से टकराती हैं, तो इससे बर्फबारी और बारिश की घटनाएं होती हैं। ऐसे में हवा पहले की तुलना में बहुत ठंडी हो जाती हैं। वहीं, वायुमंडल में बहने वाली हवाएं ठंडी हवाओं को नीचे की ओर धकेलती हैं। इन्हें हम जेट स्ट्रीम भी कहते हैं।
रातों का ठंडा होना
इसके पीछे एक कारण रातों का ठंडा होना भी है। जब भी आसमान साफ होता है, तो रात के समय जमीन की गर्मी, जिसे हम टेरेस्ट्रियल रेडियशन भी कहते हैं, वह अंतरिक्ष में विलिन हो जाती हैं। इससे रातें अधिक ठंडी हो जाती हैं।
Cold Wave से कितना अलग है Cold Day
लोग अक्सर कोल्ड वेव को ही कोल्ड डे समझ लेते हैं। हालांकि, दोनों वास्तव में अलग हैं। यहां कोल्ड वेव से मतलब रात की ठंड से है, जबकि कोल्ड डे का मतलब दिन की ठंड से है। दिन के समय जब तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक कम होता है और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम होता है, तो कोल्ड डे माना जाता है।
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