भारत में क्या है ‘कोतवाल’ और ‘कोतवाली’ का इतिहास, यहां पढ़ें

Last Updated: Jan 23, 2026, 13:07 IST

भारत में आपने कोतवाल और कोतवाली के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यह पद भारत में कब और कहां से आया, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

कोतवाल और कोतवाली का इतिहास
कोतवाल और कोतवाली का इतिहास

भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां पुराने समय से कानून और प्रशासन व्यवस्था देखने को मिलती है। इनमें से कुछ पुरानी व्यवस्थाएं आज भी चल रही हैं, जिनमें कोतवाल और कोतवाली भी शामिल है। आपने अपने इलाके में भी जरूर कोतवाली देखी होगी। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में कोतवाली और कोतवाल कब और कहां से आए हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

सल्तनत काल से हुई थी शुरुआत

भारत में कोतवाल की शुरुआत सल्तनत काल से हुई थी। इस शब्द का मूल फारसी शब्द ‘कुत’ यानि कि किला और ‘वाल’ यानि कि रक्षक से लिया गया है। दिल्ली में जब सल्तनत काल चल रहा था, तब कोतवाल किलों का रक्षक हुआ करता था। ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली में अलाउद्दीन खिलजी के शासन के समय कोतवाल बहुत शक्तिशाली पद हुआ करता था। 

मुगल काल में आया स्वर्ण युग

कोतवाल का स्वर्ण युग मुगल काल में आया था। आईन-ए-अकबरी के मुताबिक, कोतवाल शहर में कानून एवं प्रशासन व्यवस्था को बनाए रखता था। वहीं, शहर के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी भी कोतवाल के पास होती थी। कोतवाल शहर की जनसंख्या का रिकॉर्ड रखता था। साथ ही, वह समय-समय पर बाजारों में माप-तोल की जांच भी करता था। इनके लिए अलग-अलग चौकी बनी होती थी। दिल्ली में मुगलों की एक चौकी चांदनी चौक इलाके में थी, जो कि कभी शीश गंज गुरुद्वारा के सामने होती थी। 

क्या थी कोतवाल की पहचान

उस समय कोतवाल की पहचान दूर से ही हो जाती थी। कोतवाल के बगल में एक बड़ी तलवार लटकी रहती थी और हाथ में एक बड़ा डंडा हुआ करता था। कोतवाल के पद पर केवल ऊंची कद-काठी वाले व्यक्ति को ही रखा जाता था, जिससे उसका रौब बना रहे। शहर में किसी भी प्रकार के विवाद में लोगों के बीच सबसे पहले कोतवाल ही पहुंचा करता था। बाद में यह मामला शाही दरबार तक पहुंचता था। 

मराठा समय में भी रहा कोतवाल 

मराठा के समय में भी कोतवाल बहुत शक्तिशाली पद हुआ करता था। कोतवाल को कानून व्यवस्था के साथ-साथ कर वसूलने की भी जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में इतिहास का प्रसिद्ध घासीराम कोतवाल मराठाओं के समय ही मशहूर हुआ था।

ब्रिटिश काल में समाप्त हुआ पद 

भारत में जब ब्रिटिश का राज हुआ, तो इस पद को समाप्त कर दिया गया। इस पद की सभी शक्तियां इंसपेक्टर को दे दी गईं, जबकि कोतवाली को पुलिस स्टेशन का रूप दे दिया गया। हालांकि, आज भी पुरानी दिल्ली में सबसे पुरानी कोतवाली मौजूद है। इस कड़ी में दरियागंज कोतवाली भी जानी जाती है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज भी कोतवाली हैं, हालांकि आज यह थानों के रूप में चल रही हैं। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jan 23, 2026, 13:07 IST

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