Holi 2026: 2 या 3 मार्च, कब होगा होलिका दहन, नोट कर लें सही तारीख

Last Updated: Feb 25, 2026, 13:03 IST

Holika Dahan 2026: रंगों का त्योहार यानि कि होली का पर्व अब आने वाला है। हालांकि, कई लोग दुविधा में हैं कि इस बार होलिका दहन 2 मार्च को है या फिर यह इस बार 3 मार्च को होगा। क्या है सही तारीख और होलिका दहन का क्या है महत्त्व, जानने के लि यह लेख पढ़ें। 

2 या 3 मार्च, कब है होली?
2 या 3 मार्च, कब है होली?

रंगों का त्योहार यानि कि होली का पर्व इस बार मार्च के पहले सप्ताह में ही है। हालांकि, इस बार लोग होलिका दहन और खेलने वाली होली के बीच दुविधा में हैं। कुछ लोग होलिका दहन 2 मार्च को होली मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों के बीच होली दहन 3 मार्च को होने को लेकर दुविधा है।

हालांकि, वाराणसी से प्रकाशित ह्रषिकेश पंचांग के मुताबिक, होलिका पूजन और दहन 2 मार्च यानि कि सोमवार की रात को होगा, जबकि रंगभरी होली 4 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी

पूर्णिमा पर होता है होलिका दहन 

पंचांग के मुताबिक, 2 मार्च को सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर सूर्योदय होगा। इस दिन चतुर्दशी तिथि है, जो कि शाम 5 बजकर 18 मिनट तक है। इसके बाद पूर्णिमा शुरू हो जाएगी। पूर्णिमा की तिथि अगले दिन तक शाम 4 बजकर 33 मिनट तक है।

शास्त्रों के मुताबिक, होलिका दहन कभी भी दिन में नहीं किया जा सकता है, बल्कि रात में ही होता है। वहीं, होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा पर ही होता है। 2 मार्च को शाम 5 बजे के बाद पूर्णिमा लग रही है। ऐसे में होलिका दहन 2 मार्च को रात में ही होगा। 

कितने बजे होगा होलिका दहन

पंचांग के मुताबिक, इस बार होली पर भद्रा भी लग रही है। भद्रा के समय होलिका दहन नहीं होता है, लेकिन यदि भद्रा पूरी रात हो, तो केवल पुच्छ भाग में होलिका दहन किया जा सकता है।

भद्रा का समय 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से 3 मार्च को 4 बजकर 56 मिनट तक है। हालांकि, पुच्छ भाग 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 2 मिनट तक है। ऐसे में इस समय होलिका दहन किया जा सकता है। 

3 मार्च को क्यों नहीं होगी रंगभरी होली

अब सवाल है कि आखिर 3 मार्च को होली क्यों नहीं खेली जाएगी ? दरअसल, शास्त्रों के मुताबिक, पूर्णिमा पर होली खेलने की परंपरा नहीं होती है और इस दिन शाम तक पूर्णिमा तिथि लग रही है।

वहीं, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो कि भारत में भी दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। ऐसे में अगले दिन यानि कि 4 मार्च को होली खेली जाएगी। 

क्या है होलिका दहन का वैज्ञानिक महत्त्व 

होलिका दहन अक्सर सर्दियों का अंत के समय होता है। ऐसे में इस समय वातावरण में बैक्टिरिया बढ़ते हैं। होलिका की अग्नि से निकलने वाले ताप से वातावरण की शुद्धि होती है। वहीं, यह नई फसल के आने का भी समय होता है, जब लोग गेहूं और चने की बालियों को अग्नि में भूनते हैं और प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Feb 25, 2026, 13:03 IST

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