किस देश में सबसे पहले चले थे कागज के नोट, जानें जवाब
वर्तमान में डिजिटल युग है और इस युग ने अब नगद लेने-देन की जगह भी ले ली है। आज यूपीआई के माध्यम से पेमेंट की जा रही है। इससे पैसे का रिकॉर्ड रखना भी आसान हो गया है। हालांकि, आज भी भारत में कागज व सिक्के की करेंसी का चलन है। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि वह कौन-सा देश है, जिसने सबसे पहले कागजी नोट शुरू किये थे। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत में अमूमन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब यूपीआई पेमेंट मोड पहुंच चुका है। शहरों से लेकर गांवों तक लोग ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। इसके लिए बस एक क्यूआर कोड स्कैन करना है और झट से पेमेंट हो जाती है। साथ ही, इससे पेमेंट हिस्ट्री भी देखी जा सकती है कि कब और किसे कितना पैसा दिया गया है।
हालांकि, इन सबके साथ आज भी नगद रुपये का चलन है, जिसमें नोट और सिक्के की मुद्रा शामिल है। नोटों के चलन का इतिहास काफी पुराना है। इस कड़ी में क्या आप बता सकते हैं कि वह कौन-सा देश था, जिसने सबसे पहले नोटों की मुद्रा को शुरू किया था। इस लेख में हम इस बारे में जानेंगे।
किस देश में सबसे पहले शुरू हुई कागजी मुद्रा
दुनिया में सबसे पहले कागजी मुद्रा का चलन चीन देश में हुआ था। यहां पुराने राजवंशों में ही कागज का इस्तेमाल मुद्रा के रूप में किया गया था, जिसके बाद यह अन्य देशों तक पहुंची।
तांग राजवंश में हुई शुरुआत
कागज की मुद्रा की शुरुआत सबसे पहले 7वीं से 10वीं शताब्दी के बीच तांग राजवंश में हुई थी। उस समय व्यापारी अपने साथ तांबे के सिक्कों के बजाय प्रोमिसरी नोट्स का इस्तेमाल करते थे। इन्हें फ्लाइंग मनी के रूप में भी जाना जाता था, जिन्हें हवा में उड़ाया जा सकता था।
सोंग राजवंश में हुई वास्तविक शुरुआत
कागजी मुद्रा की वास्तविक शुरुआत सोंग राजवंश में मानी जाती है। यह चीन में 11वीं शताब्दी का समय था। उस दौरान 1024 में जियाओजू के रूप में आधिकारिक रूप से कागजी मुद्रा का चलन हुआ था। यह सिचुआन के व्यापारियों ने शुरू किया था, जो कि बाद में सरकार के हाथों में चला गया।
13वीं शताब्दी में हुआ अनिवार्य
चीन में कागजी मुद्रा 13वीं शताब्दी में अनिवार्य हो गई थी। यह युआन राजवंश के समय का दौर था। उस दौरान प्रसिद्ध इतालवी यात्री मार्को पोलो भी चीन पहुंचा था, जो कि कागज की मुद्रा देखकर बहुत हैरान हुआ और उसने यूरोप पहुंचकर इस बात की जानकारी दी।
भारत में कब हुई कागजी मुद्रा की शुरुआत
अब हम भारत में कागजी मुद्रा की शुरुआत के बारे में समझ लेते हैं। आपको बता दें कि भारत में कागजी मुद्रा की शुरुआत 18वीं शताब्दी के अंत में हुई थी। उस समय 1770-1832 के दौरान बैंक ऑफ हिंदुस्तान ने सबसे पहले कागजी मुद्रा को जारी किया था। वहीं, 1861 में पेपर करेंसी एक्ट बना, जिससे नोट छापने का अधिकार ब्रिटिश सरकार के पास पहुंच गया था।
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