भारत में विलय होने वाली सबसे पहली रियासत कौन-सी थी, जानें यहां
यह बात हम सभी जानते हैं कि भारत में आजादी के समय 500 से अधिक रियासतें हुआ करती थीं। इन्हें सरदार पटेल द्वारा एकता के धागे में एक साथ पिरोया गया, जिससे वर्तमान भारत की तस्वीर बनी। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में विलय करने वाली पहली रियासत कौन-सी थी, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत जिस समय अपनी आजादी की गाथा लिख रहा था, उस समय देश में 500 से अधिक रियासतें हुआ करती थीं। ऐसे में उस समय इन रियासतों के पास विकल्प था कि या तो ये रियासतें भारत में शामिल हो जाए या फिर पाकिस्तान का हिस्सा बन जाए।
उस समय भारत में कई रियासतों ने आगे कदम बढ़ाते हुए भारत का हाथ थामा और खुद को भारत में विलय कर भारत का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बने। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में शामिल होने वाली पहली रियासत कौन थी, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत में विलय करने वाली पहली रियासत
भारत के साथ विलय करने वाली पहली रियासत बीकानेर रियासत थी। उस समय बीकानेर के महाराजा सादुल सिंह ने आगे बढ़ते हुए भारत का हाथ थामते हुए भारत के एकीकरण की नींव रखी थी।
कैसे हुए था भारत में विलय
भारत में जब फरवरी, 1947 में अंग्रेजों ने भारत छोड़ने की घोषणा की थी, तो रियासतों को विलय करने का विकल्प दिया गया था। उस समय बीकानेर के महाराजा सादुल सिंह ने इस बात का अंदाजा लगा लिया था कि भारत की एकता का हिस्सा बनकर रियासतों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
नरेंद्र मंडल में किया विद्रोह
रियासतों के समय भोपाल के नवाब ‘नरेंद्र मंडल’ के अध्यक्ष थे। वह रियासतों का तीसरा गुट बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सादुल सिंह द्वारा इस बात का विद्रोह किया गया है। उन्होंने एक पत्र लिखते हुए चेतावनी दी थी कि स्वतंत्र रहने या गुटबाजी से भारत में अराजकता फैल जाएगी, जिससे रियासतों का भविष्य में खतरे में होगा।
7 अगस्त, 1947 को किए हस्ताक्षर
भारत के इतिहास में सबसे पहली रियासत के रूप में महाराजा सादुल सिंह द्वारा 7 अगस्त, 1947 को ‘इंंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ यानि कि विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। उन्हें देखकर अन्य रियासतें भी प्रभावित हुई और ग्वालियर, बड़ौदा और पटियाला जैसी रियासतों ने भी भारत के साथ विलय कर लिया था।
1949 को बना राजस्थान का हिस्सा
बीकानेर साल 1947 में भारत का हिस्सा बन गया था। हालांकि, प्रशासनिक रूप से वह अलग ही इकाई हुआ करता था। साल 1949 में बीकानेर ने जैसलमेर और जयपुर के साथ ग्रेटर राजस्थान का निर्माण किया। इसके बाद सरदार पटेल ने जयपुर में इसका उद्घाटन किया और इसे राजस्थान राज्य का हिस्सा बनाया गया।
क्यों महत्त्वपूर्ण था बीकानेर का विलय
यदि बीकानेर उस समय भारत के साथ विलय नहीं करता, तो आज पाकिस्तान की सीमा दिल्ली और पंजाब के बहुत पास होती। वहीं, बीकानेर के पास ही गंगनहर प्रणाली थी, जिस पर आज भारत का नियंत्रण है। आपको बता दें कि महाराजा सादुल सिंह के साथ उनके दीवान के.एम पणिक्कर ने विलय प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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