भारत में किस व्यक्ति को कहा जाता है ‘Aadhaar Man of India’, जानें नाम
आधार कार्ड भारत के प्रत्येक नागरिक की पहचान बन गया है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में किस व्यक्ति को ‘आधार मैन’ के नाम से भी जाना जाता है? वह एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उद्यमियों में से एक है।
आपके पास अपना आधार कार्ड तो जरूर होगा। यह 12 अंकों वाला विशिष्ट पहचान प्रमाण पत्र भारत सरकार की सभी जरूरी सेवाओं के लिए उपयोगी है। हालांकि, क्या आप जानते हैं आधार कार्ड का कांस्टेप्ट नंदन नीलेकणी ने दिया था। उन्हें भारत के ‘Aadhaar Man of India’ के नाम से भी जाना जाता है। नीलेकणी पेशे से प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उद्यमियों में से एक हैं। क्या है आधार कार्ड बनने की कहानी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
कौन हैं नंदन नीलेकणी ?
नंदन नीलेकणी भारत के सबसे प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और उद्यमियों में से एक हैं।
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जन्म: 2 जून 1955, बंगलुरु
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शिक्षा:IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
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इन्फोसिस (Infosys): 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की। नीलेकणी 2002 से 2007 तक कंपनी के CEO भी रह चुके हैं।
कैसे बना आधार (UIDAI) और नीलेकणी की क्या रही भूमिका
साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नीलेकणी बायोमेट्रिक प्रोजेक्ट दिया, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक प्रोजेक्ट कहा गया। इसका नाम आधार रखा गया।
-नंदन नीलेकणी ने इंफोसीस कंपनी से इस्तीफा देकर UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के पहले अध्यक्ष के तौर पर कमान संभाली। इससे पहले भारतीयों की पहचान के लिए राशन कार्ड या वोटर आईडी हुआ करती थी। हालांकि, उनका लक्ष्य था कि भारत में कहीं भी किसी भी व्यक्ति को डिजीटल रूप से सत्यापित किया जा सके।
-नीलेकणी ने तकनीकी क्रांति लाते हुए 12 अंकों वाला आधार तैयार किया, जिसे बाद में बैंक खातों, मोबाइल नंबर और सरकारी सब्सिडी से जोड़ा गया। इसे आज इंडिया स्टैक नाम से जाना जाता है।
क्या रहे आधार के प्रमुख लाभ
नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में आधार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदला और गरीबों तक इसका सीधा लाभ पहुंचाः
-आधार ने बिचौलियों को खत्म कर सरकारी पैसे को सीधे गरीबों के बैंक खाते में भेजा। इससे भ्रष्टाचार और फर्जी लाभार्थियों के मामले में कमी हुई।
-आधार के माध्यम से 'जन धन योजना' सफल हो सकी, जिससे करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। यह पहली बार था, जब भारत में इस तरह की क्रांति हुई।
-आधार से KYC हुआ, जिससे बैंक अकाउंट खुलवाना हो या सिम कार्ड लेना, आधार ने सभी काम आसान कर दिये, जबकि पहले कागजी कार्रवाई में समय लग जाता था।
वर्तमान में क्या कर रहे हैं नीलेकणी
वर्तमान में नंदन नीलेकणी ONDC (Open Network for Digital Commerce) प्रोजेक्ट के लिए काम कर रहे हैं। यह बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने और छोटे दुकानदारों को डिजिटल बनाने पर जोर देता है।
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