उत्तर प्रदेश का यह जिला बना ‘Zero Fresh Waste Dump City’, जानें नाम
उत्तर प्रदेश में एक जिले ने हाल ही में ताजा कचरे के निपटान के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासलि की है। इसके तहत यह जिला पूरे प्रदेश का ‘Zero Fresh Waste Dump City’ बन गया है। इस उपलब्धि तक पहुंंचने के लिए शहर में बड़ी मात्रा में कूड़े के ढेर को खत्म किया गया है, जिससे स्वच्छता के मामले में शहर शीर्ष श्रेणी में शामिल हुआ है।
उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित प्रमुख राज्यों में से एक है, जो कि अपनी विविधता और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व विख्यात है। हालांकि, भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले इस राज्य के एक जिले ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य का एक जिला ‘Zero Fresh Waste Dump City’ बन गया है, जो कि राज्य का पहला जिला है। इस उपलब्धि को पाने के लिए जिले की ओर से बड़ी मात्रा में ताजा कूड़े का निस्तारण किया गया है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए यह लेख पढे़ं।
उत्तर प्रदेश में कुल जिले
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि यूपी में कुल कितने जिले हैं। आपको बता दें कि यूपी में कुल 75 जिले हैं, जो कि 18 मंडलों में आते हैं। ये सभी मंडल कुल चार संभागों में आते हैं, जिनमें पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल और बुंदेलखंड शामिल है। प्रदेश में कुल 17 नगर निगम, 28 विकास प्राधिकरण, 75 नगर पंचायत और 5 विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भी मौजूद हैं।
कौन-सा जिला बना है ‘Zero Fresh Waste Dump City’
आपको बता दें कि प्रदेश का राजधानी यानि कि लखनऊ जिला प्रदेश का पहला ‘Zero Fresh Waste Dump City’ उपलब्धि हासिल करने वाला पहला जिला बन गया है। यहां कूड़े की अधिक मात्रा को निस्तारित किया गया है, जिससे भूमि का एक बड़ा हिस्सा कचरारहित हुआ है।
कैसे किया कचरे का निस्तारण
लखनऊ नगर निगम की ओर से हाल ही में तीसरे अपशिष्ट प्रंसस्करण संयंत्र की शुरुआत की गई है, जिससे 100 फीसदी वैज्ञानिक प्रसंस्करण हासिल किया है। इसकी क्षमता 700 मीट्रिक टन है। ऐसे में अब यहां प्रतिदिन कचरा निस्तारण की क्षमता 2100 मीट्रिक टन हो गई है। यही वजह है कि अब एक ही दिन में कूड़े के बड़े ढेर को खत्म किया जा रहा है।
शहर में कितना होता है कचरे का उत्पादन
प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक, लखनऊ शहर में प्रतिदिन 2000 मीट्रिक टन कचरे का उत्पादन होता है। इसके निस्तारण के लिए शहर में 700 मीट्रिक टन वाले कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित हैं। यहां कचरे का 55 फीसदी जैविक और 45 फीसदी हिस्सा अजैविक भाग में अलग किया जाता है।
जैविक कचरे को बायोगैस और खाद में परिवर्तित किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण के लिए छांट दिया जाता है। कचरे के कुछ हिस्से का प्रयोग सीमेंट उत्पादन व टाइल्स बनाने में भी किया जाता है। कचरे उठाने के लिए नगर निगम की गाड़ियां हैं, जो कि घर-घर जाकर लोगों के घरों का कचरा उठा रही हैं। संकरी गली और रास्तों के लिए यहां छोटे रिक्शे की भी व्यवस्था है।
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