बिहार सरकार द्वारा 5 अप्रैल 2016 से राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस निर्णय द्वारा अब शहरों में भी शराब के सेवन और कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया.
इससे पहले 30 मार्च 2016 को विधानमंडल द्वारा पारित बिहार आबकारी (संशोधन) विधेयक में 1 अप्रैल से राज्य में केवल देशी शराब की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया गया था.
कैबिनेट के निर्णय के बाद निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी की अधिसूचना जारी की.
बिहार आबकारी (संशोधन) अधिनियम-2016
• बिहार आबकारी (संशोधन) अधिनियम-2016 की धारा 19 (4) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में किसी अनुज्ञाधारी (लाइसेंसी) या किसी व्यक्ति द्वारा देशी एवं विदेशी शराब के थोक या खुदरा व्यापार व उपभोग पर रोक लगाने का निर्णय लिया.
• इस अधिनियम के तहत उन शराब निर्माताओं को 10 वर्ष की कैद सुनाई जा सकती है जिनके द्वारा बनाई गयी शराब के सेवन से किसी को स्थाई विकलांगता का सामना करना पड़ा हो.
• इसके तहत उन शराब निर्माताओं के लिए मृत्युदंड का प्रावधान दिया गया है जिनके द्वारा निर्मित शराब के सेवन से मृत्यु हुई हो.
• शराब प्रतिबन्ध के निर्णय से राज्य के सभी होटलों, बार, रेस्टोरेंट आदि में भी शराब की बिक्री या उपभोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया.
• सरकार के इस निर्णय से केवल सेना की कैंटीन प्रभावित नहीं होगी.
• विभागीय अधिसूचना 1 अप्रैल 1991 के निर्णय को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा.
• इसके तहत ताड़ उत्पादित पेय ‘नीरा’ की बिक्री दुकान, हाट-बाजार या बाजार के प्रवेश स्थल, शहरी क्षेत्र के अस्पताल, स्टेशन, बस पड़ाव, रेलवे यार्ड, राष्ट्रीय या राजकीय उच्च पथ, धार्मिक स्थानों, पेट्रोल पम्प के 50 मीटर के दायरे में नहीं की जाएगी.
• इस निर्णय के बाद बिहार देश का चौथा राज्य बना गया जहां शराब बेचना और खरीदना पूर्णतया प्रतिबंधित है. गुजरात, नागालैंड और मिजोरम में शराबबंदी कानून पहले से ही लागू है.
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