केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 अगस्त 2017 को नई मेट्रो रेल नीति 2017 को मंजूरी प्रदान कर दी. जिसके तहत देश भर में सभी मेट्रो रेल परियोजनाओं के निर्माण और विस्तार को एकसमान मानकों के दायरे में लाया जाएगा. केंद्र सरकार ने यह निर्णय मेट्रो रेल के विस्तार के दृष्टिगत लिया है.
बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की. देशभर में समान मेट्रो रेल नीति 2017 के ड्राफ्ट का प्रस्ताव बैठक में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया. शहरी विकास मंत्रालय ने नया कानून बनने तक मेट्रो परिचालन संबंधी किसी भी शहर के प्रस्ताव को विचारार्थ स्वीकार करने पर रोक लगा दी थी.
प्रमुख तथ्य-
• वर्तमान में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अधिनियम के मानकों के तहत देश के अन्य शहरों में मेट्रो परियोजना के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की जाती है.
• नई नीति के तहत देश भर के लिए एक समान मानक तय करते हुए एक ही कानून बनाया जाएगा. नई नीति के तहत पीपीपी मॉडल से ट्रो का विस्तार किया जाएगा.
• नई नीति के तहत किसी भी शहर में परियोजना को मंजूरी देने संबंधी एकसमान मानकों को तय करते हुए परियोजना के लिए तकनीकी एवं अन्य जरूरी सामान की खरीद, वित्तपोषण और परिचालन संबंधी एकीकृत मानक तय किए गए हैं.
• वर्तमान में दिल्ली (217 किलोमीटर), बेंगलुरु (42.30 किलोमीटर), कोलकाता (27.39 किलोमीटर), चेन्नरई (27.36 किलोमीटर), कोच्चि (13.30 किलोमीटर), मुंबई (मेट्रो लाइन 1-11.40 किलोमीटर, मोनो रेल फेज 1-9.0), जयपुर (9.00 किलोमीटर) और गुड़गांव (रैपिड मैट़ो 1.60 किलोमीटर) में कुल 350 किलोमीटर में मेट्रो परिचालन किया जा रहा है.
• हैदराबाद, नागपुर, अहमदाबाद, पुणे और लखनऊ में मेट्रो परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं.
• 12 शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क का निर्माण किया जा रहा है, जिनकी कुल लंबाई 537 किलोमीटर है.
• नयी नीति के तहत राज्य अपने अनुसार कायदे-कानून बना सकेंगे और किरायों में समय से संशोधन के लिए स्थाियी किराया निर्धारण प्राधिकरण गठित कर सकेंगे.
• राज्यथ केंद्रीय सहायता प्राप्तध करने के लिए तीन विकल्पोंग में से किसी भी विकल्प का उपयोग करके मेट्रो परियोजनाएं शुरू कर सकते है.
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