निशक्तजन सशक्तिकरण विभाग का नाम बदलकर 24 मई 2016 को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग रखा गया. पहले के नाम विकलांगजन को समाप्त कर दिया गया है.
केंद्र ने भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम 1961 में संशोधन करते हुए विभाग का नाम बदलने की पेशकश की. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नये नामकरण को अपनी मंजूरी दे दी.
कैबिनेट सचिवालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब डिपार्टमेंट ऑफ एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज (विकलांगजन सशक्तिकरण विभाग) को हिंदी में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के नाम से जाना जाएगा.
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 दिसंबर 2016 को अपने रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ के दौरान कहा था कि शारीरिक रूप से चुनौतियों का सामना करने वाले लोगों में ‘दिव्य क्षमता’ है इसलिए ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए.
इसमें कहा गया है कि सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के तहत काम करने वाला विभाग दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए काम करता है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी में 2.21 प्रतिशत दिव्यांग हैं.
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