केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 07 मई 2017 को देश के पहले जैव-रिफाइनरी संयंत्र का उद्घाटन किया जिसमें बायोमास की विविधता से एथेनॉल पैदा होगा. यह संयंत्र महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है.
इस अवसर पर बोलते हुए गडकरी ने कहा कि संयंत्र विभिन्न प्रकार के कृषि उत्पादन में सहायक सिद्ध होगा. इस संयंत्र में गेहूं का भूसा, कपास के डंठल, गन्ना कचरा, मकई के पौधों आदि के उपयोग करने से प्रतिवर्ष एक मिलियन लीटर इथेनॉल का उत्पादन हो सकता है.
बायो रिफाइनरी
• इस प्रक्रिया में बायोमास से ईंधन, बिजली, मूल्य वर्धित रसायनों का उत्पादन करने के लिए बायोमास रूपांतरण प्रक्रियाओं और उपकरणों को एकीकृत किया जाता है.
• यह कार्यप्रणाली आज की पेट्रोलियम रिफाइनरी के ही समान है जहां पेट्रोलियम से विभिन्न ईंधन एवं पदार्थो का उत्पादन होता है.
• बायो-रिफाइनरी में सभी उत्पाद जैव-उर्वरकों तथा जैव-कीटनाशकों द्वारा बनाये जाते हैं.
लाभ
वैज्ञानिकों का मानना है कि फसलों के अपशिष्टों को जलाने से घातक काला कार्बन निकलता है जिससे हिमालय के हिमखंडों का क्षय हो रहा है. यदि कृषि अपशिष्ट को स्वच्छ जैव ईंधन में बदल दिया जाए तो अपशिष्टों के जलने से होने वाले नुकसान पर काबू पाया जा सकता है.
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