केंद्र सरकार ने 03 अप्रैल 2018 को फेक न्यूज पर जारी गाइडलाइंस को वापस ले लिया है. इस गाइडलाइंस के तहत 02 अप्रैल 2018 को कहा कि अगर कोई पत्रकार फर्जी खबरें करता हुआ या इनका दुष्प्रचार करते हुए पाया जाता है तो उसकी मान्यता स्थायी रूप से रद्द की जा सकती है.
सजा का प्रावधान क्या प्रावधान रखा गया था?
पत्रकारों की मान्यता के लिये संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक अगर फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पहली बार ऐसा करते पाये जाने पर पत्रकार की मान्यता छह महीने के लिये निलंबित की जायेगी और दूसरी बार ऐसा करते पाये जाने पर उसकी मान्यता एक साल के लिये निलंबित की जायेगी. तीसरी बार उल्लंघन करते पाये जाने पर पत्रकार की मान्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जायेगी.
फेक न्यूज़ पहचान करने के लिए सरकार ने किस तरह की योजना बनाई थी?
फर्जी खबर के मामले प्रिंट मीडिया से संबद्ध हैं तो इसकी कोई भी शिकायत भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) को भेजी जायेगी और अगर यह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबद्ध पाया जाता है तो शिकायत न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन (एनबीए) को भेजी जायेगी ताकि यह निर्धारित हो सके कि खबर फर्जी है या नहीं.
इन एजेंसियों को 15 दिन के अंदर खबर के फर्जी होने का निर्धारण करना होगा. एक बार शिकायत दर्ज कर लिए जाने के बाद आरोपी पत्रकार की मान्यता जांच के दौरान भी निलंबित रहेगी.
अन्य जानकारी:
पीआईबी जब मान्यता के लिए किसी पत्रकार के आवेदन पर विचार करेगा उस वक्त यह ध्यान रखा जाएगा कि पत्रकार ने पीसीआई और एनबीए के द्वारा निर्धारित पत्रकारिता के मूल्यों का और प्रसारण मानकों के सिद्धातों का पालन किया है या नही.
फर्जी खबर सोशल मीडिया पर असली की तुलना में तेज़, व्यापक और अधिक तीव्रता से बढती है. इसके अलावा झूठी खबरों का प्रवाह नकली प्रोफाइल से नहीं बढ़ाया जाता. वास्तव में, लोग झूठी खबरों को ही सच्ची समझकर अधिक शेयर करते हैं.
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