14 फरवरी 2017 को हरियाणा सरकार ने पंजाब आबकारी अधिनियम 1914 के तहत अनअधिकृत स्थानों पर किसी भी व्यक्ति को शराब पीने की अनुमति नहीं दिए जाने की घोषणा की है. इसमें स्थान के दायरे में व्यक्ति के घर को नहीं लाया गया है. घोषणा आबकारी और कराधान मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि अब से राज्य में सड़कों पर, बागीचों, पार्क, बाजारों या नदी के किनारे या कार – चाहे वह चल रही हो या पार्किंग में खड़ी हो, में शराब पीना दंडनीय अपराध होगा.
मुख्य विशेषताएं
• किसी भी प्रकार के उल्लंघन के मामले में अपराधी, शराब और वाहन, यदि कोई हो तो, उसे असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर की रैंक से उपर वाले एक्साइज ऑफिसर द्वारा हिरासत में लिया जाएगा.
• हिरासत में लिए जाने के 24 घंटों के भीतर एक्साइज ऑफिसर से मामले को डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर (एक्साइज) जो जिले का कलेक्टर भी होगा, के पास भेजने की उम्मीद की जाएगी.
• कलेक्टर मामले को सुनवाई के लिए अदालत में भेज सकता है या पहली बार किए गए अपराध के लिए प्रति व्यक्ति 5000रु. का जुर्माना और दूसरी बार किए गए अपराध के लिए प्रति व्यक्ति 10000 रु. का जुर्माना लगाकर मामले को निपटा सकता है.
• हालांकि मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि अपराधी पर, स्थान या वाहन जहां अपराध किया गया है, के बारे में अपना पक्ष रखे बगैर किसी भी प्रकार का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा.
इससे पहले हरियाणा राज्य ने जुलाई 1996 में शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था. हालांकि 1 अप्रैल 1998को बंसी लाल नीत हरियाणा विकास पार्टी द्वारा इस प्रतिबंध को हटा दिया गया था.
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