नागरिकता (संशोधन) अधिनियम-2015 (Citizenship (Amendment) Ordinance, 2015) को लागू किया गया. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम-2015 से सम्बंधित अध्यादेश पर 6 जनवरी 2015 से हस्ताक्षर किए. इस अध्यादेश के तहत भारतीय नागरिक अधिनियम-1955 में निम्न संशोधन किए गए.
इसमें भारत में विवाह करने वाले विदेशियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए देश में एक वर्ष तक लगातार रहने की शर्त भी हटा ली गई.
• वर्तमान में भारतीय नागरिकता के लिए भारत में लगातार एक वर्ष तक रहना अनिवार्य है, लेकिन, अगर केन्द्र सरकार संतुष्ट है तो विशेष परिस्थितियों में इसमें छूट दी जा सकती है. इस प्रकार की विशेष परिस्थितियों के बारे में लिखित रिकॉर्ड दर्ज करने के बाद विशेष 12 माह के लिए छूट दी जा सकती है, जो अधिकतम 30 दिन के लिए अलग-अलग अंतराल के बाद दी जा सकती है.
• अध्यादेश में भारतीय मूल के लोगों को आजीवन वीजा देने और भारत की अपनी प्रत्येक यात्रा के दौरान उन्हें स्थानीय थाने में हाजिर होने की शर्त से छूट देने का प्रावधान है.
• भारतीय नागरिकों के ओसीआई नाबालिग बच्चों का प्रवासी भारतीय नागरिक (Overseas Citizen of India, ओसीआई) के तौर पर पंजीकरण की शर्तों को उदार बनाया जाएगा.
• ऐसे नागरिकों के बच्चों या पोता-पोतियों अथवा पड़ पोता-पोतियों के लिए प्रवासी भारतीय नागरिक के तौर पर पंजीकरण का अधिकार होगा.
• धारा 7ए के तहत पंजीकृत प्रवासी भारतीय के पति या पत्नी या भारतीय नागरिक के पति या पत्नी के लिए प्रवासी भारतीय नागरिक के तौर पर पंजीकरण का अधिकार होगा और जिनकी शादी दो वर्ष की अवधि के लिए पंजीकृत या कायम रही हो, वे तुरंत ही इस धारा के तहत आवेदन कर सकते हैं.
• वर्तमान पीआईओ कार्डधारकों के संबंध में केन्द्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित कर यह स्पष्ट कर सकती है कि किस दिनांक से सभी मौजूदा पीआईओ कार्डधारकों को ओसीआई कार्डधारकों के रूप में बदलने का निर्णय किया जाए.
भारतीय नागरिकता अधिनियम-1955
भारतीय नागरिकता अधिनियम-1955 में भूमि अधिग्रहण, कार्यमुक्ति, संकट, भारतीय नागरिकता की पहचान और अन्य संबंधित प्रावधान हैं. इस अधिनियम के तहत जन्म, पीढ़ी, पंजीकरण, विशेष परिस्थितियों में स्थान का विलय या किसी स्थान में शामिल किये जाने के साथ ही नागरिकता समाप्त होने और संकट के समय में भी भारतीय नागरिकता प्रदान की जाती है.
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