रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने 8 जून 2017 को भारतीय रेलवे के प्रथम मानव संसाधन (एचआर) गोलमेज सम्मेलन का उद्घाटन किया.
इस अवसर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि रेलवे एक बड़ा संगठन है और प्रत्येक बड़े संगठन में यह आवश्य्क है कि बुनियादी मुद्दों पर नये सिरे से गौर किया जाए, उनका आत्मनिरीक्षण किया जाए और प्रतिस्पर्धी, बहुमुखी एवं दक्ष् बनने के लिए व्यापक बदलाव लाया जाए.
रेलवे एक जटिल संगठन है. रेलवे को वाणिज्यिक भूमिका, सामाजिक भूमिका एवं कल्याणकारी भूमिका निभानी पड़ती है और इसके साथ ही उसे जन आकांक्षाओं को भी पूरा करना पड़ता है, जो विशिष्ट होने के साथ-साथ परस्पर विरोधी भी होती हैं. आर्थिक एवं सामाजिक पहलू के लिहाज से इसकी खास अहमियत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
इस संगठन में कार्यरत लोगों को अपने कामकाज में कुछ इस तरह से ढालना चाहिए कि वे चुनौतियों का सामना कर सकें. रेलवे के लिए यह आवश्यक है कि वह कॉरपोरेट लक्ष्यों को स्पष्ट ढंग से परिभाषित करे और इसके साथ ही उसे एक संगठित ढांचा तैयार करना चाहिए तथा उसके बाद उपयुक्त व्यक्तियों की सेवा इस संगठन में ली जानी चाहिए.
रेलवे एक ऐसा संगठन है, जिसे बड़े कॉरपोरेट लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए. वहीं, कॉरपोरेट लक्ष्यों के तहत सामाजिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए. इसके अंतर्गत संभागीय स्तरों के साथ-साथ रेलवे के प्रभागों के स्तर पर आवश्यक कदम उठाये जाने चाहिए.
पृष्ठभूमि:
भारतीय रेल देश में रोजगार उपलब्ध कराने की सबसे बड़ी संस्था है जिसमें अभी 13 लाख से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं. देशभर में भारतीय रेल के 17 क्षेत्रों, 6 उत्पादन इकाइयों और 68 सम्भागों के अंतर्गत ये कर्मचारी 10 विभागों में काम करते हैं. रेलवे में 24 घंटे लगातार काम होता हैं. इसमें अभियन्ता कार्य से लेकर उपभोक्ताओं के साथ संवाद और विभिन्न सम्बंधित विभागों में समायोजन करते हुए रेलगाड़ियों का परिचालन होता हैं. इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न अंशधारकों, मानव संसाधन विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बीच विचारों का अदान-प्रदान कर मानव संसाधनों की उत्पादकता बढ़ाना है.
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