नॉर्थरोप ग्रुमेन ने एनजीआर -14 मिशन के लिए अपने अगले सिग्नस वाहन को एसएस कल्पना चावला के नाम से और एक एन्टर्स रॉकेट अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए वर्जीनिया में मिड-अटलांटिक क्षेत्रीय स्पेसपोर्ट में पैड 0 A से इस 2 अक्टूबर 2020 को लॉन्च किया है. यह कैप्सूल ISS को हजारों किलोग्राम/ पाउंड के उपकरण, चालक दल की आपूर्ति और विज्ञान प्रदान करेगा.
एस.एस. कल्पना चावला सिग्नस
- यह कैप्सूल निम्नलिखित से बना है:
- एक दबावयुक्त कार्गो मॉड्यूल - जिसे ट्यूरिन, इटली में थेल्स एलेनिया स्पेस द्वारा बनाया गया है, और
- एक सर्विस मॉड्यूल - जिसमें दो सोलर ऐरेज़ , नेविगेशन उपकरण और प्रोपलज़न तत्व शामिल हैं जो नॉर्थरॉप ग्रुम्मन द्वारा डलेस, वर्जीनिया में बनाए गए हैं.
• इसका नाम डॉ. कल्पना चावला के सम्मान में रखा गया है जो अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं.
• यह अंतरिक्ष यान अपने साथ एक नया अंतरिक्ष शौचालय ले गया है जिसे यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कहा जाता है. यह ISS में उपयोग किए जा रहे वर्तमान शौचालय की तुलना में 65% छोटा और 40% हल्का है.
• अंतरिक्ष में जीवित पौधों की उत्तरजीविता और व्यवहार्यता के बारे में जानने के लिए कैप्सूल ने मूली-उगाने वाला प्रयोग भी किया है.
• यह सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में कैंसर की दवाओं का परीक्षण करने के लिए एक कैंसर उपचार तकनीक की आवश्यक वस्तुओं को भी अपने साथ लेकर गया है.
कल्पना चावला
उनका जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था. उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वैमानिकी इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1982 में संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं. उन्होंने वर्ष 1997 में एक प्राथमिक रोबोटिक आर्म ऑपरेटर और एक मिशन विशेषज्ञ के रूप में उड़ान भरी. एक अंतरिक्ष मिशन के दौरान कोलंबिया अंतरिक्ष यान के पृथ्वी पर वापस लौटते समय उनकी मृत्यु हो गई. एक गर्म प्लाज्मा विमान के पंख में प्रवेश करने के बाद पृथ्वी पर लौटते समय ही उनका अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उन्हें प्रदान किए गए कुछ महत्वपूर्ण सम्मान नीचे सूचीबद्ध किए गए हैं:
• कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2004 से युवा महिला वैज्ञानिकों को मान्यता देने के लिए कल्पना चावला पुरस्कार देना शुरू किया है.
• सौर मंडल की बाहरी क्षुद्रग्रह बेल्ट में उनके नाम पर क्षुद्रग्रह (एस्टेरोइड) 51826 का नाम - कल्पना चावला - रखा गया है.
• भारत द्वारा वर्ष 2002 में लॉन्च किए गए उपग्रह "मेटसैट -1" का नाम बदलकर "कल्पना -1" कर दिया गया है.
• स्पेस सेटलमेंट को उनके सम्मान में कल्पना-1 के नाम से नामित किया गया है.
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