भारत के वायदा बाजारों (Commodity Exchanges) में से एक एनएसईएल (National Spot Exchange Limited, NSEL) ने निवेशकों की धन-वापसी (Repayment) के लक्ष्यों को पूरा न कर पाने के कारण 20 अगस्त 2013 को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ, Chief Executive Office, CEO) व प्रबंध निदेशक (एमडी, Managing Director, MD) अंजनी सिंहा तथा छह अन्य शीर्ष अधिकारियों को बर्खास्त किया.
एनएसईल को 174.72 करोड़ रुपये का भुगतान कमोडिटी बाजार के नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी, Future Market Commission, FMC) को करना था लेकिन एनएसईएल मात्र 92.12 करोड़ रुपये का भुगतान ही कर पायी. एनएसईएल के द्वारा निर्धारित भुगतान न कर पाने का कारण इसके सदस्यों के द्वारा बकाया न चुका पाना था.
क्या है मामला?
एनएसईएल को सरकार के निर्देश के बाद इस महीने की शुरूआत से अपने कारोबार को बंद करना था क्योंकि इस वायदा बाजार ने सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया था. जिसके परिणामस्वरूप एनएसईएल ने अपने निवेशकों को सात महीने के भीतर 5600 करोड़ रुपये चुकाने की योजना बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग को सौंपी थी.
एनएसईएल के निदेशक मंडल ने सीईओ व एमडी अंजनी सिंहा के अतिरिक्त जिन छह लोगों को बर्खास्त किया, उनमें मुख्य वित्तीय अधिकारी, विभिन्न विभागों के सहायक उपाध्यक्ष व प्रबंधक शामिल हैं.
एनएसईएल (National Spot Exchange Limited, NSEL)
एनएसईएल भारत के वायदा बाजारों (Commodity Exchanges) में से एक है. यह फाइंनेंशियल टेक्नोलॉजीस इंडिया लिमिटेड और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नैफेड) का एक संयुक्त उपक्रम है. एनएसईएल ने विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं में लाइव ट्रेडिंग की शुरूआत 15 अक्टूबर 2008 से की थी.
वायदा बाजार आयोग (एफएमसी, Future Market Commission, FMC)
वायदा बाजार आयोग भारत में फॉर्वर्ड एवं वायदा का एक मुख्य नियामक प्राधिकारी है तथा फॉरवर्ड संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1952 के तहत 1953 में स्थापित एक सांविधिक निकाय है. वायदा बाजार आयोग उपभोक्ता मामले,खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय,भारत सरकार के देखरेख में कार्य करता है. वायदा बाजार आयोग में न्यूनतम दो तथा अधिकतम चार सदस्य होते हैं जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है. वायदा बाजार आयोग के अध्यक्ष की भी नियुक्ति केंद्र सरकार के द्वारा ही की जाती है.
वायदा बाजार आयोग के कार्य इस प्रकार हैं:
(क) किसी भी संघ की मान्यता या मान्यता की वापसी के संबंध में या वायदा संविदा (विनियमन) अधिनियम 1952 के क्रियान्वयन से उत्पन्न किसी भी अन्य मामले के संबंध में केन्द्र सरकार को सलाह देने के लिए.
(ख) वायदा बाजार को निगरानी में रखने और उससे सम्बंधित कार्रवाई करने के लिए,जो की आवश्यक हो सकता है,या इस अधिनियम के द्वारा या अंतर्गत उसे सौंपे शक्तियों के प्रयोग में.
(ग) इकट्ठा करने और जब भी आयोग यह आवश्यक समझता है,वस्तुओं के व्यापार की शर्तों के बारे में जानकारी प्रकाशित करने के लिए जो की अधिनियम के किसी भी प्रावधानों से लागू किया जाता है जिनमे आपूर्ति,मांग और कीमतों के बारे में जानकारी भी शामिल है और इस तरह के सामान से संबंधित वायदा बाजार की कार्यशैली पर आवधिक विवरण (रिपोर्ट) केन्द्र सरकार को प्रस्तुत करना;
(घ) सामान्यतः वायदा बाजार के काम और संगठन में सुधार लाने की दृष्टि से सिफारिशें करना;
(ङ) किसी भी मान्यता प्राप्त संघ या पंजीकृत संस्था या इस तरह के सहयोग से बने किसी भी सदस्य के खातों और अन्यदस्तावेजों के निरीक्षण का कार्य करने के लिए जब भी यह आवश्यक समझे.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation