अफगानिस्तान के निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डॉ. अशरफ गनी को 21 सितंबर 2014 को राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित किया. चुनाव आयोग के अध्यक्ष अहमद यूसुफ नूरिस्तानी ने कहा कि ‘स्वतंत्र चुनाव आयोग डॉ. अशरफ गनी को राष्ट्रपति घोषित करता है, और लिहाजा चुनाव प्रक्रिया के समापन की घोषणा की जाती है’. इस घोषणा के साथ ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के चुनाव के विवादित परिणामों पर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया.
इससे पहले निवर्तमान राष्ट्रपति हामिद करजई की उपस्थित में डॉ. अशरफ गनी को अफगानिस्तान का राष्ट्रपति बनाने के लिए उन्होंने डॉ. अब्दुल्ला के साथ ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. अफगानिस्तान के निर्वाचन आयोग ने इस समझौते के कुछ ही घंटो बाद डॉ. अशरफ गनी के विजयी होने की घोषणा की.
‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ समझौते के तहत डॉ. अब्दुल्ला को अब ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी’ (सीईओ) के नवसृजित पद के लिए अपनी पसंद का व्यक्ति चुनना है ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी’ (सीईओ) का पद प्रधानमंत्री के समकक्ष है. समझौते के तहत डॉ अशरफ गनी को एक सप्ताह के भीतर राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी है.
पूर्व तालिबान विरोधी लड़ाके एवं पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्ला के पास ताजिक समुदाय और अन्य उत्तर जातीय समूहों का समर्थन है जबकि विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री डॉ. अशरफ गनी के पास दक्षिण और पूर्व के पश्तून कबाइलियों का समर्थन है.
अफगानिस्तान के संविधान के तहत देश के राष्ट्रपति के पास पूरा नियंत्रण होगा, लेकिन देश की सुरक्षा और आर्थिक हालात लगातार बिगड़ने की वजह से नए सरकारी तंत्र को एक कठिन परीक्षा से गुजरना होगा.
विदित हो कि अफगानिस्तान में अप्रैल 2014 में राष्ट्रपति चुनाव हुआ था जिसमें आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार डॉ. अब्दुल्ला को 45 प्रतिशत मत मिले थे लेकिन उनका दावा था कि उन्हें 50 प्रतिशत से अधिक मत मिले हैं. उसके बाद जून 2014 में हुये दूसरे चरण के मतदान में भी उन्होंने डॉ. गनी को पराजित करने का दावा किया था लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक डॉ. गनी 55 प्रतिशत मतों के साथ विजयी हुये. डॉ. अब्दुल्ला ने जून 2014 में हुये दूसरे चरण के मतदान में धांधली का आरोप लगाया था जिसके बाद राष्ट्रपति पद के लिये दावेदारी को लेकर खासा गतिरोध पैदा हो गया था. इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री जान कैरी ने जुलाई 2014 में अपनी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान दोनों नेताओं को शक्ति के बंटवारे के लिये समझौता करने पर सैद्धांतिक तौर पर राजी कर लिया था. अमेरिकी व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी करके दोनों नेताओं के इस कदम की सराहना करते हुये कहा कि इस समझौते से अफगानिस्तान के राजनीतिक संकट को दूर करने में मदद मिलेगी. यह समझौता अफगानिस्तान में स्थिरता लाने और शांति स्थापित करने में सहायक साबित होगा.
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