राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के कुल 23 भू-वैज्ञनिकों को राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार-2013 से सम्मानित किया. यह पुरस्कार राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार-2013 वितरण समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा 6 अप्रैल 2015 को प्रदान किया गया..
यह पुरस्कार भूवैज्ञानिकों को राष्ट्रीय स्तर पर मौलिक या प्रायोगिक भू–विज्ञान, खनन एवं संबंधित क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है.
इसके लिए आठ क्षेत्रों में 23 भू-वैज्ञानिकों दिया गया. इसके अंतर्गत आठ क्षेत्र निम्नवत हैं.
• खनिज खोज एवं अन्वेषण क्षेत्र : पांच पुरस्कार
• कोयला व लिग्नाइट तथा कोल बेड मिथेन खोज एवं उत्खनन क्षेत्र : पांच पुरस्कार,
• भूजल अन्वेषण क्षेत्र : तीन पुरस्कार,
• खनन प्रौद्योगिकी क्षेत्र : दो पुरस्कार,
• भू-पर्यावरणीय अध्ययन : दो पुरस्कार
• खनिज लाभकारी क्षेत्र, सतत खनिज विकास क्षेत्र : एक पुरस्कार
• मौलिक भू-विज्ञान क्षेत्र : एक पुरस्कार
• समुद्री विकास क्षेत्र व भू-सूचना प्रणाली क्षेत्र : एक पुरस्कार
उत्कृष्टता पुरस्कार
‘उत्कृष्टता पुरस्कार’ हेतु लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. इंद्र बीर सिंह को तलछटीय भूगर्भशास्त्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए चयनित किया गया.
पुरस्कार राशि
उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार के तहत 5 लाख रुपए की पुरस्कार राशि, राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार के तहत 2 लाख रुपए की पुरस्कार राशि और युवा शोधकर्ता पुरस्कार के तहत 50 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाती है. इस पुरस्कार के तहत पुरस्कार राशि, एक प्रमाण पत्र, एक ट्रॉफी और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार के तहत प्रत्येक पुरस्कार के लिये नकद राशि दो लाख रूपये होगी लेकिन अगर एक पुरस्कार दो लोगों को संयुक्त रूप से दिया गया तो प्रत्येक के लिये नकद राशि एक एक लाख रूपये होगी. टीम पुरस्कार के रूप में प्रत्येक पुरस्कार विजेता को कम से कम 60 हजार रूपये दिये जायेगें.
खान मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर मौलिक या प्रायोगिक भू–विज्ञान, खनन एवं संबंधित क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए वैज्ञानिकों एवं उनकी टीम को सम्मानित करने हेतु प्रति वर्ष राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार प्रदान करता है.
राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार
राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार देश में भू-विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित पुरस्कार माने जाते हैं. ये पुरस्कार पहले 'राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार' के नाम से जाने जाते थे, जिनका शुभारंभ भारत सरकार के खान मंत्रालय ने वर्ष 1966 में किया था. वर्ष 2009 में इन पुरस्कारों का नाम बदल कर राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार (एनजीए) रख दिया गया और इनका दायरा बढ़ा दिया गया. देश का कोई भी नागरिक, जो प्रोफेशनल तौर पर योग्य वैज्ञानिक/अभियंता/तकनीकीविद/शिक्षाविद हैं और जिन्होंने पृथ्वी विज्ञान के किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है, वे राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार पाने के अधिकारी हैं.
राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार-2012 तक कुल मिलाकर 698 भू-वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं, जिसमें 9 उत्कृष्टता पुरस्कार तथा 3 युवा शोधकर्त्ता पुरस्कार भी शामिल है.
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