हिमाचल प्रदेश 3 दिसंबर 2015 को रोटावायरस टीकाकरण परियोजना शुरू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया. टीकाकरण अगले माह जिला कांगड़ा शुरू की जाएगी.
रोटावायरस टीका से दस्त के कारण होने वाली (पांच वर्ष से कम उम्र के) बाल मृत्यु दर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
रोटावायरस टीके की तीन खुराक छह, दस और चौदह सप्ताह की उम्र में शिशुओं को पिलायी जाएगी. यह प्रशासन और यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) का हिस्सा हैं.
रोटावायरस टीकाकरण परियोजना की मुख्य विशेषताएं-
• परियोजना धर्मशाला में राज्य के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा शुरू की गयी.
• प्रशासनिक अधिकारी पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को रोटावायरस वेक्सिन पिलाकर कार्यक्रम की शुरूआत करेंगे.
• अंतर्राष्ट्रीय नैदानिक महामारी नेटवर्क टीकाकरण में तकनीकी सहायता प्रदान करेगी और टीकों पर होने वाला पूरा खर्च भी वहन करेगी.
• परियोजना जल्द ही पुणे, महाराष्ट्र और वेल्लोर तमिलनाडु में शुरू की जाएगी.
रोटावायरस क्या है?
• भारत में 11 महीने की आयु से कम उम्र के शिशुओं में होने वाली गंभीर दस्त (एमएसडी) की बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावशाली टीका है.
• यह रेवोरिड समूह में डबल स्टैण्डर्ड आरएनए वायरस की एक प्रजाति है.
• कीटाणुओं के कारण यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. मुख्य रूप से दूषित भोजन या पानी इस बीमारी का कारक है.
• यह कोशिकाओं को संक्रमित और नष्ट करता है
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