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Difference: 2D और 3D फिल्मों में क्या होता है अंतर, जानें

Difference: फिल्में देखना अमूमन सभी लोगों को पसंद होता है। इसमें  अब 2डी के साथ-साथ 3डी फिल्में भी अपनी जगह बना रही हैं। हालांकि, क्या आपको 2डी और 3डी में अंतर पता है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम आपको इन दोनों के बीच के अंतर बताएंगे। 

 

Difference: 2D और 3D फिल्मों में क्या होता है अंतर, जानें
Difference: 2D और 3D फिल्मों में क्या होता है अंतर, जानें

Difference: विदेश के साथ-साथ भारत में भी 2डी के साथ-साथ 3डी फिल्मों को लेकर चलन बढ़ रहा है। लोग अब सिनेमाघरों में 2डी के बदले 3डी फिल्में देखना पसंद कर रहे हैं। हालांकि, इन दोनों के बीच 3डी में फिल्में देखना महंगा होता है। लेकिन, इसके बावजूद भी लोग 3डी में फिल्में देखना पसंद करते हैं। लेकिन, कई लोग इन दोनों के बीच अंतर को लेकर दुविधा में पड़ जाते हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको इन दोनों के बीच अंतर को बताएंगे। 

 

2डी और 3डी फिल्मों के बीच मुख्य अंतर यह होता है कि 2डी फिल्में नियमित फिल्में होती हैं और केवल दो आयामों का उपयोग करती हैं, जबकि 3डी फिल्में तीन आयामों का उपयोग करती हैं और एक लाइव अनुभव देती है।



क्या होती हैं 2डी फिल्में ?

2डी फिल्में Two-Dimensional द्वि-आयामी फिल्में होती हैं। इसमें लंबाई और चौड़ाई शामिल होती है। यह एक विशिष्ट व बुनियादी होती है, जो आपके फ्लैट स्क्रीन टीवी या कंप्यूटर पर दिखाई देने वाली छवियों की तरह होती है। 2डी में एक समय में एक कोण से एक छवि देखी जा सकती है। यदि बॉलीवुड में इन कुछ फिल्मों के उदाहरण की बात करें तो दृश्यम 2, पठान, और भेड़िया 2डी फिल्में हैं। 

 

आज के समय में 2डी फिल्मों का दौर कम हो गया है। इसकी प्रमुख वजह लोगों की रूचि 3डी फिल्मों की तरफ बढ़ना। वहीं, कुछ लोग 4डी वाली उच्च तकनीक फिल्मों में रूचि ले रहे हैं।

 

कम समय और कम कीमत में तैयार हो जाती हैं 2डी फिल्में

2डी फिल्में 3डी फिल्मों की तुलना में कम कीमत व कम समय में तैयार हो जाती हैं। 2डी फिल्मों में कैमरे के एंगल और गहराई से काम करना होता है। इसके साथ ही रचनात्मकता की भी जरूरत होती है। क्योंकि, यदि 2डी में रचनात्मकता नहीं होगी, तो फिल्म में लोगों की रूचि खत्म हो जाएगी।



क्या होती हैं 3डी फिल्में ?

 

3डी फिल्में त्रि-आयामी फिल्में हैं, जो दर्शकों को लाइव स्थिति की तरह अनुभव देती है। 3डी में तीन आयाम लंबाई, ऊंचाई और चौड़ाई शामिल होते हैं। इन फिल्मों को देखने के लिए एक विशेष प्रकार का चश्मा लगाना होता है, जिसका एक लेंस लाल और दूसरा स्यान रंग का होता है। लाल रंग पिक्चर में लाल रंग भरता है, वहीं स्यान रंग अन्य रंगों को फिल्टर करता है। आपको यह भी बता दें कि 3डी तकनीक तीन प्रकार की होती है, जो कि Read 3D, MasterImage 3D और Dolby 3D हैं। 

 

3डी फिल्मों में पिक्चर को 360֯ तक घुमाया जा सकता है और उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इन फिल्मों के देखने को दौरान दर्शन खुद को दिखाई जा रहे फिल्मों के दृश्यों में महसूस कर सकते हैं। 

 

समय और लागत होती है अधिक

3डी फिल्मों को बनाना 2डी की तुलना में आसान नहीं होता है। इसे बनाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, इसमें लागत की बात करें, तो 2डी की तुलना में 3डी फिल्मों लागत भी अधिक होती है। यही वजह है कि इन फिल्मों का बजट अधिक होता है। कुछ बॉलीवुड 3डी फिल्मों की बात करें, तो रा-वन, आरआरआर, एबीसीडी-2 और हांटेड 3डी जैसी कुछ प्रमुख फिल्में हैं। 

 

कुछ लोगों को 3डी फिल्में देखने पर होती है परेशानी

कुछ लोगों को 3डी फिल्में देखने के बाद सिरदर्द और मतली भी महसूस हो सकती है। वहीं, कई लोगों को फिल्म देखने के बाद आभासी और वास्तविकता को लेकर भी कुछ देर के लिए भ्रम हो सकता है। वहीं, कुछ लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह से 3डी फिल्में नहीं देखते हैं।

 

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