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बी.ई. और बी.टेक. में क्या अंतर है?

Sep 13, 2016 17:30 IST
    बी.ई. और बी.टेक. में क्या अंतर है?
    बी.ई. और बी.टेक. में क्या अंतर है?

    इंजीनियरिंग करने की इच्छा रखने वाले छात्रों के मन में उठने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक प्रश्न है– 'बी.ई. और बी.टेक. में क्या अंतर होता है?' कई विशेषज्ञों ने इस प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश की है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु ऐसे हैं जो अभी भी अनछुए हैं। इस लेख में हम 'बी.ई. और बी.टेक. में अंतर, समानता जैसे कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करेंगें और कुछ आम प्रश्नों का उत्तर भी देंगे। आखिर में निष्कर्ष भी है जो इंजीनियर बनने की इच्छा रखने वाले छात्रों को बहुत मदद करेगा।

    भारत में दो प्रकार के कॉलेज हैं। पहला वैसे कॉलेज जो इंजीनियरिंग समेत कला, विज्ञान, वाणिज्य आदि विषयों में डिग्री देते हैं और आम तौर पर विश्वविद्यालय कहलाते हैं। दूसरा जो सिर्फ इंजीनियरिंग की डिग्री देते हैं और आम तौर पर इंस्टीट्यूट कहलाते हैं। इंजीनियरिंग के साथ अन्य डिग्रियां देने वाले विश्वविद्यालय अपने इंजीनियरिंग की डिग्री को बी.ई. (बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग) का नाम देते हैं और इंजीनियरिंग जैसे पेशेवर कोर्स कराने वाले इंस्टीट्यूट अपने इंजीनियरिंग की डिग्री को बी.टेक. (बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी) नाम देते हैं।

    दो पाठ्यक्रमों के बीच कुछ प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:

    बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग

    बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी

    बी.ई. को ज्ञान–उन्मुख पाठ्यक्रम माना जाता है।

    बी. टेक. कौशल उन्मुख पाठ्यक्रम माना जाता है।  

    सिद्धांत पर ज्यादा जोर दिया जाता है और मजबूत बुनियादी बातों पर केंद्रित होता है।

    सैद्धांतिक पहलुओं की बजाय प्रायोगिक आवेदनों पर अधिक जोर दिया जाता है।

    ज्ञानोन्मुख होने के कारण पाठ्यक्रम अपडेट तो किया जाता है लेकिन अन्य कि तरह लगातार नहीं।

    तकनीकोन्मुख होने के कारण कोर्स का पाठ्यक्रम अधिक अप–टू–डेट माना जाता है।

    इंटर्नशिप और औद्योगिक दौरे पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा हो सकते हैं।

    इंटर्नशिप और औद्योगिक दौरे पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा होते हैं।

    आमतौर पर विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग जिसे वे बी.ई. कहते हैं के साथ अन्य डिग्रियां (जैसे विज्ञान, कला, शिक्षा आदि) भी कराते हैं।

    आमतौर पर इंस्टीट्यूट (आईआईटी समेत) सिर्फ इंजीनियरिंग की पढ़ाई जिसकी डिग्री को वे बी. टेक. कहते हैं, कराते हैं।

    कुछ लोकप्रिय कॉलेज हैं– एनएसआईटी, बिट्स– पिलानी, अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई आदि

    कुछ लोकप्रिय कॉलेज हैं– आईआईटी, एनआईटी, डीटीयू आदि

    दोनों पाठ्यक्रमों के बीच की समानताएं हैं:

    • भारत में दोनों ही पाठ्यक्रम की अवधि 4 वर्ष होती है। 
    • प्रत्येक वर्ष में 2 सेमेस्टर और 4 वर्षों में कुल 8 सेमेस्टर के साथ दोनों ही पाठ्यक्रम सेमेस्टर पैटर्न का पालन करते हैं। 
    • दोनों ही पाठ्यक्रमों का अभिविन्यास और दृष्टिकोण अलग हो सकता है लेकिन यदि हम पाठ्यक्रम की विषयवस्तु को करीब से देखें तो ये लगभग एक जैसे ही होते हैं।
    • एआईसीटीई ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों डिग्रियों को अलग नहीं मानेगी और दोनों ही को वह समान मान्यता प्रदान करती है।
    • दोनों ही डिग्रियां करने से एक जैसा ही अवसर मिलता है और भविष्य बनता है।
    • अगर बी.ई. डिग्री किए उम्मीदवारों के लिए कोई भर्ती की अधिसूचना जारी की जाती है तो बी. टेक. डिग्री करने वाले उम्मीदवार भी उसमें हिस्सा लेने के पात्र होंगे और यही बात बी. टेक. डिग्रीधारियों के लिए जारी अधिसूचना पर भी लागू होगी।

    इंजीनियरिंग करने की इच्छा रखने वालों के बीच अक्सर पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न हैं–

    प्र. नौकरी के अवसर और भविष्य के लिहाज से कौन सी डिग्री बेहतर है– बी.ई. या बी. टेक.?

    . समान अवसर और भविष्य के साथ दोनों ही डिग्रियों को समान मान्यता प्राप्त है। अधिक संक्षेप में कहें तो आपका कॉलेज और इंजीनियरिंग की शाखा है जो मायने रखती है।

    प्र. अगर दो कॉलेज समान दर्जा रखते हैं, तो हमें क्या पसंद करना चाहिए, बी.ई. या बी.टेक.?

    . अगर छात्र अनुसंधान– कार्य में रुचि रखता है और उच्च शिक्षा करना चाहता है तो बी.टेक. की जगह उसे बी.ई. करना चाहिए। हालांकि वर्तमान परिस्थियों में विश्लेषण यही बताते हैं कि पाठ्यक्रम लगभग समान है लेकिन दृष्टिकोण अलग– अलग हो सकते हैं।

    प्र. मैं कुशल व्यवसाय सूची (एसओएल) के तहत दूसरे देश के लिए वीजा प्राप्त करना चाहता हूं। कौन सी डिग्री मेरी मदद करेगी, बी.ई. या बी.टेक.?

    . भारत और दूसरे देशों में दोनों ही डिग्रियां समान अवसर प्रदान करती हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ देशों में बी.टेक. किए उम्मीदवार कुशल व्यवसाय सूची के तहत कुछ नौकरियों के योग्य नहीं होते। इन नौकरियों के लिए बी.ई. डिग्री चाहिए होती है।

    उदाहरणः एक आव्रजन सलाहकार के माध्यम से अपना मूल्यांकन करने वाले एक व्यक्ति को कहा गया कि उन्हें एसओएल में इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजिस्ट के तौर पर आवेदन करना होगा न कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के तौर पर क्योंकि उन्हेंने बी.टेक. डिग्री की है और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की श्रेणी में सिर्फ बी.ई. किए इंजीनियर ही आते हैं।

    निष्कर्षः संक्षेप में वर्तमान परिस्थितियों में बी.ई. और बी.टेक. में कोई खास अंतर नहीं है और कोई भी डिग्री दूसरे के मुकाबले बेहतर नहीं है। कॉलेज और विषय है जो मायने रखता है। दाखिला लेते समय आपको उसी कॉलेज या विश्वविद्यालय को चुनना चाहिए जिसका बुनियादी ढांचा, शिक्षक, कैंपस प्लेसमेंट बेहतर हो और उनके द्वारा कराए जाने वाले कोर्स को एआईसीटीई एवं यूजीसी से मान्यता प्राप्त हो।

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