यदि हौसला बुलंद हो और मेहनत करने की इच्छाशक्ति हो तो कोई भी परिस्थिति बाधा नहीं बन सकती। यही साबित किया राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गाँव से आने वाले देव चौधरी ने। बचपन से देखा IAS बनने का सपना उन्होंने ढृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास से पूरा किया। आइये जाने कौन हैं ये प्रतिभाशाली IAS अफसर
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बाड़मेर के एक पिछड़े गाँव से आते हैं देव
देव चौधरी राजस्थान राज्य के रेगिस्तानी जिले बाड़मेर के एक पिछड़े हुए गाँव से आते हैं। उनके पिताजी एक शिक्षक थे। देव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही विद्यालय से पूरी की। इसके बाद वह बेहतर शिक्षा के लिए शहर आ गए। उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई शहर के सरकारी स्कूल से हिंदी मीडियम में पूरी की। इसके बाद उन्होंने बाड़मेर के एक कॉलेज से B.Sc. में ग्रेजुएशन की।
बचपन से ही था IAS बनने का सपना
आईएएस बनने का सपना देश के कई युवाओं का होता है। देव ने ये सपना बचपन में ही देख लिया था। परन्तु ना उन्हें रास्ते का पता था ना ही रास्ते में आने वाली कठिनाइयों का आभास था। शुरू से हिंदी मीडियम में पढ़े देव को हमेशा यही डर सताया कि क्या वह बिना अंग्रेजी जाने देश की सबसे मुश्किल परीक्षा पास कर पाएंगे?
हिंदी में स्टडी मटेरियल ना मिलने के कारण सीखी अंग्रेजी
UPSC IAS की परीक्षा को हिंदी भाषा में देने वाले उम्मीदवारों को अक्सर स्टडी मटेरियल के आभाव का सामना करना पड़ता है। देव ने भी अपनी तैयारी के दौरान इसी चुनौती का सामना किया। हिंदी भाषा में पर्याप्त स्टडी मटेरियल ना होने के कारण उन्होंने अंग्रेजी सीखी। अंग्रेजी ना आने के कारण देव को कई बार लोगों के ताने सुनने पड़े पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी और ना ही दिल छोटा किया। अपनी इस कमज़ोरी को उन्होंने अंग्रेजी सीख कर ताकत बना लिया।
चौथे एटेम्पट में बने IAS
देव ने 2012 में UPSC IAS के लिए अपना पहला एटेम्पट दिया और प्रीलिम्स स्टेज पास भी कर ली। हालांकि उन्हें मेंस में सफलता नहीं मिली। 2013 में उन्होंने एक बार फिर प्रयास किया और दोनों ही परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे। परन्तु फाइनल सिलेक्शन में उनका नाम नहीं आया। देव बताते हैं कि 2 साल निरंतर प्रयास करने पर भी जब उन्हें सफलता नहीं मिली तो उन्हें निराशा ज़रूर हुई परन्तु लक्ष्य की ओर उनकी एकाग्रता ने उन्हें संभाले रखा। अगले साल फिर से उन्होंने अपना तीसरा एटेम्पट दिया जिसमे उनका सिलेक्शन तो हुआ परन्तु उन्हें IAS बनने के लिए जिस रैंक की आवश्यकता थी वो हासिल नहीं हो पाया। 2015 में अपने चौथे एटेम्पट में देव ने कड़ी मेहनत की और अपना बचपन से देखा IAS बनने का सपना पूरा किया।
देव कभी भी उनके रास्ते में आई चुनौतियों से घबराये नहीं बल्कि उनको पार करने के उपाय खोजते रहे। ये उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि आज देव गुजरात कैडर में स्वच्छ भारत मिशन के स्पेशल कमिशनर के तौर पर कार्यरत हैं।
देव चौधरी इस बात का सबूत हैं की कड़ी मेहनत और लक्ष्य को पाने की चाह अगर मन में हो तो कोई भी चुनौती आपके हौसले से बड़ी नहीं होती।
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