Speech on Vande Mataram in Hindi: वंदे मातरम् पर भाषण

Last Updated: Jan 23, 2026, 13:42 IST

“वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने पर उसके इतिहास, महत्व और छात्रों के लिए आसान भाषण इस लेख में दिए गए हैं। इस आर्टिकल में छात्र Republic Day 2026 और स्कूल कार्यक्रमों के लिए वंदे मातरम् भाषण, नारे और जानकारी देख सकते हैं, जिससे वे देशभक्ति को सही शब्दों में प्रस्तुत कर सकें।

Speech on Vande Mataram in Hindi
Speech on Vande Mataram in Hindi

“वंदे मातरम्” भारत का वह पवित्र गीत है, जिसने आज़ादी की लड़ाई में लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना भर दी। यह गीत सबसे पहले 7 नवंबर 1875 को महान लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था। बाद में इसे उनकी प्रसिद्ध रचना आनंदमठ में शामिल किया गया और यह पूरे देश में गूंजने लगा। इसी ऐतिहासिक गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम् 2025’ पहल की शुरुआत की है, जो 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में मनाई जाएगी। इसकी शुरुआत नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होगी, जहाँ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

इसके साथ ही, गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर छात्र “वंदे मातरम्” पर भाषण की तैयारी कर सकते हैं। यह आर्टिकल विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर उपयोगी है, जो Republic Day 2026 के स्कूल कार्यक्रमों में वंदे मातरम् भाषण, कविता या प्रस्तुति देना चाहते हैं और देशभक्ति की भावना को सही शब्दों में व्यक्त करना चाहते हैं।

वंदे मातरम् पर संक्षिप्त भाषण (Short Speech on Vande Mataram in Hindi)

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय/महोदया,
सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियो,

आप सभी को मेरा नमस्कार।

आज मैं “वंदे मातरम्” पर संक्षेप में अपने विचार व्यक्त करना चाहता/चाहती हूँ। यह भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका संगीत बनाया। “वंदे मातरम्” का अर्थ है “माँ तुम्हें प्रणाम”, जो हमारी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्यार को दर्शाता है।

स्वतंत्रता संग्राम के समय यह गीत लोगों में जोश और उत्साह जगाता था। आज भी इसे स्कूलों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में गर्व के साथ गाया जाता है। यह हमें सिखाता है कि हम अपने देश को सम्मान, सेवा और समर्पण के साथ प्यार करें। वंदे मातरम्!

अंत में, आइए हम सब मिलकर ज़ोर से कहें –
वंदे मातरम्!

धन्यवाद।

Speech on Vande Mataram in Hindi (300 Words)

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय/महोदया,
सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियो,
आप सभी को मेरा सादर प्रणाम।

आज मैं “वंदे मातरम्” पर भाषण दूँगा/दूंगी। यह गीत भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसे हमारे देश के लिए विशेष सम्मान मिला हुआ है। “वंदे मातरम्” का अर्थ “मैं मां भारत को नमन करता/करती हूँ” है। यह गीत हमें हमारी मातृभूमि के प्रति प्यार और सम्मान सिखाता है।

यह गीत 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, जो बाद में आनंदमठ नामक उपन्यास में सम्मिलित हुआ और रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका संगीत दिया था। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई के समय देशवासियों को हिम्मत और एकता की भावना देता था।

हम सभी स्कूलों, परेडों और राष्ट्रीय त्योहारों में “वंदे मातरम्” को गर्व से गाते हैं। यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमें देश के प्रगति, सेवा और एकता के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

आइए हम सब मिलकर अपने दिल में देशभक्ति की भावना बढ़ाएँ और गर्व से वंदे मातरम् का सम्मान करें।

वंदे मातरम्!

धन्यवाद।

Speech on Vande Mataram in Hindi (500 Words)

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय/महोदया,
सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियो,
आप सभी को मेरा नमस्कार।

आज मैं आप सभी के सामने “वंदे मातरम्” पर अपने विचार प्रस्तुत करने जा रहा/रही हूँ। “वंदे मातरम्” भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसका अर्थ होता है “माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता/करती हूँ”। यह गीत देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति प्यार का प्रतीक है। इस वर्ष 7 नवंबर 2025 को “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे हुए हैं, जो हमारे देश के लिए गर्व की बात है।

“वंदे मातरम्” की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में भी शामिल किया गया, और रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया। इस गीत ने आज़ादी के संघर्ष के दौरान भारतीयों में एकता, साहस और देशभक्ति की भावना जगाई।

जब अंग्रेज़ों ने भारत पर शासन किया, तब देश के लोगों को आज़ादी पाने के लिए एकता की ज़रूरत थी। उसी समय “वंदे मातरम्” का उपयोग स्वदेशी आंदोलन और विभाजन विरोध आंदोलन के दौरान नारे और गीत के रूप में किया गया। यह गीत लोगों को आज़ादी के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता था।

यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के दिल में देश के लिए सम्मान और प्रेम को जगाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छात्र, किसान, समाजसेवी और सभी वर्ग के लोग इसे गाते थे और इससे उन्हें ज़ोरदार ताक़त और ऊर्जा मिलती थी।

24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत के रूप में ‘जन गण मन’ के बराबर सम्मान दिया जाना चाहिए। इसी के साथ इस गीत को भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।

“वंदे मातरम्” हमें यह सिखाता है कि हम सभी को अपने देश से गहरा प्यार और सम्मान रखना चाहिए। हमें अपने बड़े-बुज़ुर्गों का आदर करना चाहिए, अपने देश की सुरक्षा करनी चाहिए और हमेशा देशहित में सोचने का प्रयास करना चाहिए।

आज भी यह गीत हमें एकता, त्याग और देशभक्ति की भावना से जोड़ता है। हमें गर्व है कि हम उस देश के बच्चे हैं जहाँ इस गीत ने आज़ादी की जंग में न केवल साँस्कृतिक पहचान दी, बल्कि भारत की एकता और शक्ति की नींव भी मजबूत की।

आइए हम सब मिलकर “वंदे मातरम्” के इन पावन शब्दों को हमेशा दिल में रखें और अपने देश को महान बनाएं।

धन्यवाद!
जय हिन्द!

Source: PIB India, Vande Mataram 150 Years

वंदे मातरम् 150 वर्ष प्रमाण पत्र (Vande Mataram 150 Years Certificate)

वंदे मातरम् 150 वर्ष प्रमाण पत्र भारत सरकार की एक विशेष पहल के तहत दिया जाने वाला सम्मान पत्र है। यह प्रमाण पत्र उन लोगों को दिया जाता है जो “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों, गतिविधियों या प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। इसका उद्देश्य लोगों, खासकर छात्रों, में देशभक्ति की भावना को बढ़ाना है।

“वंदे मातरम्” गीत को महान लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने लिखा था। यह गीत आज़ादी की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा बना। इसी ऐतिहासिक गीत के 150 साल पूरे होने पर भारत सरकार ने पूरे देश में विशेष कार्यक्रम शुरू किए, जिनमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को यह सुंदर प्रमाण पत्र दिया जा रहा है।

यह प्रमाण पत्र खास तौर पर छात्रों, शिक्षकों, स्कूलों और संस्थानों के लिए बहुत उपयोगी है। इससे बच्चों में देश के प्रति प्रेम और गर्व की भावना बढ़ती है। स्कूलों में “वंदे मातरम्” गायन, भाषण, चित्रकला, निबंध और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले छात्रों को यह सर्टिफिकेट दिया जा रहा है।

यह प्रमाण पत्र सिर्फ एक कागज़ नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, सम्मान और गर्व का प्रतीक है। इसे पाकर बच्चों को लगता है कि उन्होंने देश के लिए कुछ अच्छा किया है।

संक्षेप में कहा जाए तो “वंदे मातरम् 150 वर्ष प्रमाण पत्र” हर भारतीय के लिए गर्व की बात है, खासकर छात्रों के लिए यह एक यादगार सम्मान है।

प्रमाणपत्र डाउनलोड करें (Download Certificate)

यहाँ क्लिक करें

वंदे मातरम् हमें अपने देश से सच्चा प्रेम करना सिखाता है। इस आर्टिकल से छात्रों को इसके इतिहास, महत्व और 150 वर्ष के कार्यक्रम की पूरी जानकारी मिली। आइए हम सब मिलकर गर्व से कहें – वंदे मातरम् और अच्छे नागरिक बनें।

First Published: Jan 23, 2026, 13:42 IST

आप जागरण जोश पर सरकारी नौकरी, रिजल्ट, स्कूल, सीबीएसई और अन्य राज्य परीक्षा बोर्ड के सभी लेटेस्ट जानकारियों के लिए ऐप डाउनलोड करें।

Trending

Latest Education News