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फाइनेंसियल मैनेजमेंट में करियर

Sep 14, 2018 10:13 IST
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फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स क्या है?

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स फाइनेंशल प्लानिंग, एकाउंटिंग और संगठन के लाभदायक विकास के लिए प्लान्स की स्ट्रेटेजी बनाने से संबद्ध है. इन कोर्सेज का लक्ष्य छात्रों/ कैंडिडेट्स को फाइनेंशल स्किल्स प्रदान करना है ताकि संगठन के विभिन्न विभागों के लिए रिसोर्सेज निर्धारित करने के साथ ही बजट तैयार किया जा सके. चाहे वह बैंकिंग, फाइनेंशल सर्विसेज, एनबीएफसीज या कॉरपोरेट से संबद्ध कोई भी इंडस्ट्री हो, फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स में वे सभी विषय और इश्यूज शामिल हैं जो इन सभी फ़ील्ड्स के साथ ही अन्य कई फ़ील्ड्स या इश्यूज में महारत हासिल करने के लिए आपकी समझ को विकसित करेंगे.

फाइनेंस मैनेजर क्या काम करता है?

फाइनेंस मैनेजर का काम फाइनेंशल रिपोर्ट्स पेश करना और फाइनेंशल जानकारी को इन्टरप्रेट (परिभाषित) करना होता है ताकि संगठन की फाइनेंशल स्थिति और मजबूती के आधार पर मैनेजमेंट सभी जरुरी निर्णय ले सके. फाइनेंस मैनेजर संगठन की फाइनेंशल हेल्थ या आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए भी स्ट्रेटेजीज बनाने में व्यस्त रहते हैं. उनका काम यहीं समाप्त नहीं होता है, वे कॉस्ट्स, प्राइसिंग, वेरिएबल कॉन्ट्रिब्यूशन्स, सेल्स और रेवेन्यु से संबद्ध सभी कार्य करते हैं ताकि संगठन के प्रॉफिट को लगातार बढ़ाया जा सके. किसी भी संगठन के सभी कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए एक फाइनेंस मैनेजर उस संगठन की ‘लाइफलाइन’ होता है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज कितने प्रकार के होते हैं?

आप अपनी 10+2 क्लास पास करने के बाद फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज कर सकते हैं. अगर आप अंडरग्रेजुएट कोर्सेज करने के लिए अपना बहुत ज्यादा समय खर्च नहीं करना चाहते हैं तो आप डिप्लोमा कोर्सेज कर सकते हैं. हालांकि, अगर आप हायर स्टडीज प्राप्त करना चाहते हैं तो आपके लिए अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेना काफी बढ़िया निर्णय साबित होगा. फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कोर्सेज का विवरण आपकी सहूलियत के लिए नीचे दिया जा रहा है: 

फाइनेंशल मैनेजमेंट में डिप्लोमा कोर्सेज

छात्र 10+2 क्लास पास करने के तुरंत बाद डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं. इस कोर्स की अवधि 1 वर्ष है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट में अंडरग्रेजुएट कोर्सेज

फाइनेंशल मैनेजमेंट में अंडरग्रेजुएट कोर्स की अवधि 3 वर्ष होती है. फाइनेंशल मैनेजमेंट में अंडरग्रेजुएट कोर्स को बीबीए डिग्री के तौर पर जाना जाता है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज

फाइनेंशल मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट कोर्स की अवधि 2 वर्ष होती है. इस डिग्री को आमतौर पर फाइनेंशल मैनेजमेंट में एमए/ एमबीए की डिग्री के नाम से जाना जाता है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट में डॉक्टोरल कोर्सेज

आप किसी संबद्ध विषय में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद फाइनेंशल मैनेजमेंट में डॉक्टोरल कोर्स अर्थात डॉक्टरेट ऑफ़ फिलोसोफी (पीएचडी) की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं. डॉक्टोरल कोर्स की अवधि 3-4 वर्ष है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज में एडमिशन कैसे लें?

कई मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटीज और इंस्टिट्यूट्स फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज करवाते हैं. यद्यपि, प्रत्येक कॉलेज/ इंस्टिट्यूट के अपने अलग-अलग एंट्रेंस एग्जाम, एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और एडमिशन प्रोसेस होते हैं. इसलिये, इन फाइनेंशल कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए इन कोर्सेज से संबद्ध आवश्यक शर्तों के बारे में जानकारी प्राप्त करना आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

एडमिशन प्रोसेस में पहला कदम एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया है. अगर आपको इस सेक्शन में उल्लिखित क्राइटेरिया के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है तो आप उक्त कोर्स के लिए बड़ी सरलता से अप्लाई कर सकते हैं. इसलिए, फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स में अप्लाई करने के लिए हरेक लेवल के लिए निर्धारित एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के बारे में आइये जानकारी प्राप्त करें:

डिप्लोमा लेवल

आप 10+2 क्लास पास करने के बाद फाइनेंशल मैनेजमेंट में डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं. इस डिप्लोमा लेवल कोर्स में फाइनेंशल मार्केट्स, कॉरपोरेट फाइनेंस और बिजनेस करने के लिए जरुरी फिक्स्ड और वर्किंग कैपिटल के बारे में बेसिक डिटेल्स शामिल हैं.

अंडरग्रेजुएट लेवल

अंडरग्रेजुएट लेवल कोर्स में भी आप अपनी 10+2 क्लास किसी भी विषय में पास करने के बाद एडमिशन ले सकते हैं. आमतौर पर जिन स्टूडेंट्स ने 12वीं क्लास कॉमर्स विषय सहित पास की होती है, उन्हें एडमिशन में वरीयता दी जाती है.

पोस्टग्रेजुएट लेवल

किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी/ कॉलेज से कम से कम 50% कुल प्रतिशत के साथ ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद आप फाइनेंशल मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट कोर्स करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

डॉक्टोरल लेवल

फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में आप हाईएस्ट लेवल की डिग्री के तौर पर डॉक्टोरल कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं. किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी/ कॉलेज से पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के बाद आप अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ का टाइटल इस्तेमाल कर सकते हैं.

एंट्रेंस एग्जाम्स

चाहे वह कोई पॉलिटेक्निक इंस्टिट्यूट हो या फिर कोई प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट, किसी भी इंस्टिट्यूट से प्रोफेशनल डिग्री कोर्स करने के लिए और अपने पसंदीदा इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेने के लिए छात्र को हमेशा एंट्रेंस एग्जाम पास करना पड़ता है. किसी फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स में एडमिशन लेने में आपकी मदद करने के लिए यहां सभी एंट्रेंस एग्जाम्स की लिस्ट पेश है:  

डिप्लोमा लेवल

डिप्लोमा कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए, आप स्टेट लेवल के पॉलिटेक्निक्स में अप्लाई कर सकते हैं क्योंकि ये पॉलिटेक्निक्स प्रत्येक राज्य में एंट्रेंस एग्जाम कंडक्ट करते हैं ताकि इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल्स तैयार किये जा सकें.

अंडरग्रेजुएट लेवल

• डीयू जेएटी

• आईपीएमएटी 2018

• एनपीएटी 2018

• सिम्बायोसिस एंट्रेंस टेस्ट (एसईटी)

• एआईएमए यूजीएटी 2018

• जीजीएसआईपीयू सीईटी बीबीए 2018

पोस्टग्रेजुएट लेवल

• सीएटी (कॉमन एडमिशन टेस्ट)

• एआईएमए-एमएटी (मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट)

• एक्सएटी (जेवियर एप्टीट्यूड टेस्ट)

• आईआईएफटी (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फॉरेन ट्रेड)

• एसएनएपी (सिम्बायोसिस नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट)

• जीएमएसी द्वारा एनएमएटी

• सीएमएटी (कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट)

• आईबीएसएटी (आईबीएस एप्टीट्यूड टेस्ट)

• एमआईसीएटी (एमआईसीए एडमिशन टेस्ट)

• एमएएच - एमबीए/ एमएमएस सीईटी (महाराष्ट्र एमबीए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट)

डॉक्टोरल लेवल

• रिसर्च मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट (आर-मैट)

• सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम

• यूजीसी नेट

• एक्सआईएमबी-आरएटी (रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट)

• आईआईआईटी दिल्ली पीएचडी एडमिशन टेस्ट

• फैकल्टी ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज (एफएमएस), दिल्ली यूनिवर्सिटी पीएचडी एंट्रेंस टेस्ट

• अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम

• इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) एंट्रेंस एग्जाम

फाइनेंशल मैनेजमेंट के तहत सब-स्पेशलाइजेशन कोर्सेज

फाइनेंशल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स निम्नलिखित विषयों में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं ताकि उनकी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बन सके. यद्यपि, नीचे दिए गए विषय कोर्स करिकुलम का एक हिस्सा हैं लेकिन, आप इनमें से कोई एक विषय चुनकर उसमें अपना करियर बना सकते हैं. आपकी सहुलियत के लिए सब-स्पेशलाइजेशन्स की लिस्ट नीचे दी जा रही है:

पोर्टफोलियो एनालिसिस

अगर आप इस विषय में स्पेशलाइजेशन करते हैं तो आप पोर्टफोलियो एनालिस्ट के तौर पर अपना करियर शुरू कर सकते हैं. इसके बाद, आपका काम इकनोमिक ट्रेंड्स, कैपिटल मार्केट रिपोर्ट्स की स्टडी करना, सिक्योरिटीज़ में अमाउंट अलोकेट करना और रिपोर्ट्स तैयार करना भी होगा ताकि कैपिटल में इंवेस्ट की गई मनी और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स का विकास दर्शाया जा सके. 

मनी एंड कैपिटल मार्केट्स

यह विषय फाइनेंशल ऐजेट्स जैसेकि स्टॉक्स, बांड्स, कमोडिटीज, डेरिवेटिव्स और कुर्रेन्किएस के बारे में समझ और जानकारी प्रदान करेगा. अन्य पहलू जैसेकि कैपिटल मार्केट, बांड मार्केट और मनी मार्केट आदि के बारे में भी थ्योरीज सहित विस्तार से चर्चा की जायेगी. 

सिक्यूरिटी एनालिसिस एंड पोर्टफोलियो मैनेजमेंट (एसएपीएम)

स्टॉक मार्केट में अपना करियर बनाने के इच्छुक स्टूडेंट्स को अवश्य एसएपीएम विषय की स्टडी करनी चाहिए. इस विषय के तहत कई टॉपिक्स जैसेकि फ्यूचर्स और ऑप्शन्स, पोर्टफोलियो थ्योरी और ऐजेट प्राइसिंग, बांड वैल्यूएशन और एनालिसिस एंड बिहेवियरल फाइनेंस आदि शामिल हैं. इस विषय का उद्देश्य छात्रों के ज्ञान के दायरे को व्यापक बनाना और इंडस्ट्री के बारे में स्पेशलाइज्ड स्किल्स प्रदान करना है.

रूरल एंड कोआपरेटिव बैंकिंग

रूरल एंड कोआपरेटिव बैंकिंग फाइनेंशल मैनेजमेंट का अभिन्न हिस्सा है. यह स्पेशलाइजेशन रूरल एरियाज में इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट और उनकी फाइनेंशल हेल्थ के इंडिकेटर्स पर फोकस करता है.

रिस्क मैनेजमेंट

हरेक बिजनेस प्रत्येक कदम पर रिस्क का सामना करता है. आपके बिजनेस पर नियंत्रित किये जा सकने वाले फैक्टर्स या अनियंत्रित रहने वाले फैक्टर्स का असर पड़ेगा, इस बारे में उक्त विषय में पढ़ाया जाता है. फाइनेंशल रिस्क मैनेजमेंट आपको किसी भी बिजनेस से संबद्ध फाइनेंशल रिस्क्स के बारे में जानकारी देने के साथ ही उन रिस्क्स से निपटने के स्किल्स प्राप्त करने में मदद करता है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज करने के लिए टॉप इंस्टिट्यूट्स

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज भारत में विभिन्न बी-स्कूल्स द्वारा करवाये जाते हैं. प्रत्येक यूनिवर्सिटी द्वारा ऑफर किया गया कोर्स करिकुलम अन्य यूनिवर्सिटीज के कोर्स करिकुलम से अलग हो सकता है. अगर आप फाइनेंशल मैनेजमेंट में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो आप नीचे उल्लिखित विभिन्न एमबीए इंस्टिट्यूट्स की लिस्ट देखें. इन इंस्टिट्यूट्स की रैंकिंग एनआईआरएफ, मानव संसाधन और विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा जारी की गई है और ये रैंकिंग्स छात्रों को आईआईएमज द्वारा प्रदान की जाने वाली एजुकेशन की क्वालिटी को उचित ठहरती हैं.

क्रम संख्या

इंस्टिट्यूट

लोकेशन

1

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

अहमदाबाद

2

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

बैंगलोर

3

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

कलकत्ता

4

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

लखनऊ

5

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

बॉम्बे

6

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

कोझीकोड़

7

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

खड़गपुर

8

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

दिल्ली

9

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

रुड़की

10

ज़ेवियर लेबर रिलेशन्स इंस्टिट्यूट

जमशेदपुर

सोर्स: एनआईआरएफ रैंकिंग्स

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज से संबद्ध करियर प्रॉस्पेक्ट्स

फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में स्किल्ल्ड प्रोफेशनल्स के लिए जॉब के ढेरों अवसर मौजूद हैं ताकि संगठनों की खाली पोस्ट्स को भरा जा सके. आपने चाहे वह कोई डिप्लोमा, डिग्री या डॉक्टोरल कोर्स किया हो, आपको इंडस्ट्री में डेसिग्नेशन और सैलरी आपके एजुकेशन लेवल और कार्य-अनुभव के आधार पर दी जाती है. इसलिये, समस्त बिजनेस वर्ल्ड में फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में वर्तमान हायरिंग ट्रेंड के बारे में आइये चर्चा करें:  

फाइनेंशल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को ऑफर किये जाने वाले लोकप्रिय जॉब टाइटल्स

किसी फ्रेशर के लिए, किसी फाइनेंशल फर्म, कंपनी या मार्केट में जॉब प्राप्त करना उसके करियर का बेसिक आधार होता है. फाइनेंस ग्रेजुएट का रोल बहुत गतिशील है क्योंकि उनके लिए संगठन के अन्य डिपार्टमेंट्स के साथ सहयोग करना आवश्यक होता है और अगर जरूरी हो तो उन्हें सामने आकर कस्टमर के साथ बातचीत करनी पड़ती है. यहां कुछ ऐसे लोकप्रिय जॉब डेसिग्नेशन दिए जा रहे हैं जो फाइनेंस ग्रेजुएट अपना कोर्स पूरा करने के बाद ज्वाइन कर सकते हैं:

1. फाइनेंस मैनेजर

2. फाइनेंशल प्लानर

3. फाइनेंशल एनालिस्ट

4. फाइनेंशल ऑडिटर

5. इंवेस्टमेंट बैंकिंग एनालिस्ट

6. एक्चुअरी

7. अकाउंटेंट

8. इंवेस्टर रिलेशन्स एसोसिएट

फाइनेंशल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स के लिए सैलरी प्रॉस्पेक्ट्स

जब आप अपने लिए कोई करियर चुनते हैं तो सैलरी एक महत्वपूर्ण फैक्टर साबित होती है. फाइनेंस मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स के लिए, सैलरी को लेकर कोई चिंता करने की बात नहीं है क्योंकि इंडस्ट्री स्किल्ड और टैलेंटेड कैंडिडेट्स को अच्छी सैलरी देती है बशर्ते कि वे अपने कार्य-क्षेत्र में एक्सपर्ट हों और वे लेटेस्ट अपडेट्स से भी पूरी तरह वाकिफ हों. फाइनेंस ग्रेजुएट्स को दी जाने वाली सैलरी का विवरण निम्नलिखित है:

कार्य अनुभव के वर्ष

सैलरी (लाख रूपये)

एक वर्ष से कम

190000 –700000

1-4 वर्ष

240534 – 1211501

5-9 वर्ष

487126 – 1530296

10-19 वर्ष

401482 – 2014703

20 वर्ष  और इससे अधिक वर्ष

481653 – 2442522

सोर्स: पेस्केल.कॉम

फाइनेंस मैनेजर्स के लिए टॉप ब्रांड्स

फाइनेंस के डोमेन में स्पेशलाइजेशन करने वाले कैंडिडेट्स के लिए आजकल जॉब के ढेरों अवसर मौजूद हैं. चाहे वह कोई फर्म हो या कोई कंपनी या फिर, बैंक्स, सरकारी विभाग और एजेंसीज, एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स आदि ही क्यों न हों, उक्त सभी इंस्टिट्यूशन्स में फाइनेंस डोमेन से संबद्ध प्रोफेशनल्स के लिए अत्यधिक जॉब ऑप्शन्स मौजूद हैं. इसलिए यहां ‘ब्रांडफाइनेंस.कॉम’ द्वारा दी गई रैंकिंग के अनुसार फाइनेंशल फील्ड में सबसे ख़ास इंडियन ब्रांड्स की एक लिस्ट पेश है. आप इस लिस्ट में से अपने लिए एक बेहतरीन ब्रांड्स चुन सकते हैं. आइये पढ़ें: 

1. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

2. एलआईसी

3. आईसीआईसीआई बैंक

4. एचडीएफसी बैंक

5. कोटक महिंद्रा बैंक

6. आईडीबीआई बैंक

7. कैनरा बैंक

8. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

9. इंडियन ओवरसीज बैंक

10. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

11. एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड

12. बजाज कैपिटल लिमिटेड

13. डीएसपी मेरिल लिंच लिमिटेड

14. एल एंड टी फाइनेंस लिमिटेड

15. कार्वी ग्रुप

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