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कोरोना वायरस के वजह से 2009 से भी बड़ी आर्थिक मंदी की आशंका: IMF

विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था के हालात बड़ी तेजी से खराब हो रहे हैं और ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जो आशंका जताई है वे और परेशान करने वाली है.

Mar 26, 2020 12:49 IST
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दुनिया भर के कई देशों में कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रकोप के कारण लॉकडाउन घोषित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2020 को कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 21 दिनों की बंदी की घोषणा की है. कोविड-19 के आतंक की चपेट में आने के बाद विश्व के कई देशों में लॉकडाउन घोषित हो चुका है.

विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था के हालात बड़ी तेजी से खराब हो रहे हैं और ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जो आशंका जताई है वे और परेशान करने वाली है. आईएमएफ ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से धीमी हो रही है और यह साल 2009 की मंदी से भी बदतर हो सकती है.

आईएमएफ चीफ ने क्या कहा?

आईएमएफ चीफ क्रिस्टालीना जॉर्जीवा ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था (ग्लोबल इकोनॉमी) एक विशाल संकट का सामना कर रही है और इससे वैश्विक मंदी आना तय है. ये नुकसान इतना बड़ा हो सकता है कि साल 2009 से भी बड़ी आर्थिक मंदी की आशंका है. आईएमएफ ने कहा है कि इससे निपटने के लिए देशों को अभूतपूर्व कदम उठाने की जरूरत है.

वैश्विक मंदी पर आईएमएफ

आईएमएफ के अनुसार, मौजूदा बंद के कारण विश्व अर्थव्यवस्था 1.5 प्रतिशत तक गिर गई है. निवेशकों ने उभरते बाजारों से अपने निवेश को हटा दिया है. साथ ही, साल 2020 के लिए वैश्विक विकास का दृष्टिकोण नकारात्मक है. 80 से अधिक देशों ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से आपातकालीन निधियों का अनुरोध किया है.

आईएमएफ के चीफ का कहना है कि उसके पास एक ट्रिलियन डॉलर की कर्ज देने की क्षमता है और वह कमजोर देशों को कोरोना के संकट के दौर में सहायता करेगा. घरेलू बाजार ठप होने, आर्थिक गतिविधियों के लॉकडाउन के चलते ऐसे देश बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. साल 2007 के मध्य से साल 2009 के शुरुआती दौर तक विश्वभर में मंदी का दौर देखने को मिला था.

उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती

कोरोना वायरस की शुरुआत से ही भारत और कई उभरते बाजारों से वैश्विक निवेशकों ने लगभग 83 अरब डॉलर का निवेश निकाल लिया है. इसके चलते इन देशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए आईएमएफ ने ये कहा है कि विकसित देशों के मुकाबले विकासशील और छोटे देशों पर इस कोविड-19 महामारी का ज्यादा बुरा असर पड़ेगा. इसके चलते विकसित एवं अमीर देशों को ऐसी अर्थव्यवस्था वाले देशों की सहायता करनी चाहिए.

अगले साल की उम्मीद

आईएमएफ विशेष रूप से कम आय वाले देशों के बारे में चिंतित है और उन्हें ऋण प्रदान करने के लिए विश्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रहा है. आईएमएफ को पूरा यकीन है कि आर्थिक मंदी पूरी दुनिया को प्रभावित करेगी. हालांकि, साल 2021 में स्थिति में सुधार आ सकता है. इसके लिए जरूरी है कि कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण पर जल्द से जल्द काबू पाया जाए.

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