रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 28 मई 2018 को रक्षा बलों के लिए उपकरणों की खरीद को मंजूरी दे दी हैं. यह बैठक रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई.
डीएसी ने रक्षा बलों के लिए 6900 करोड़ से अधिक के उपकरण खरीद की स्वीकृति दी.
स्वदेशीकरण को भारी प्रोत्साहन देते हुए और भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति को स्वीकार करते हुए रॉकेट लांचर के लिए थर्मल इमेजिंग (टीआई) नाइटसाइट्स की खरीद ‘बाय (इंडियन) आईडीडीएण श्रेणी के अंतर्गत स्थापित भारतीय वेंडरों के माध्यम से की जाएगी.
उपयोग:
- इसका इस्तेमाल सेना और वायुसेना द्वारा किया जाता है और 84एमएम रॉकेट लांचर के लिए टीआइ साइट का इस्तेमाल टुकड़ियों द्वारा दुश्मन के सक्रिय और स्थिर लक्षों पर सटीक निशाना साधने और पूरी तरह अंधकार के दौरान दुश्मन के बंकरों का विध्वंश करने में किया जाता है.
- यह साइट अपनी टुकड़ियों को शत्रुओं के टैंकों की खोज करने और पहचानने तथा रात के समय सैनिकों की गतिविधियों में सहायक होगा.
- यह छद्म रूप से छिपने और पनाह लेने में कमी लाएगा, क्योंकि रॉकेट लांचर के डिटेचमेंट शत्रु के छिपे हुए स्थान का पता लगाने में सक्षम होंगे.
उपकरणों से संबंधित मुख्य तथ्य:
- डीएसी ने ‘मेक II’ उपश्रेणी के अंतर्गत एसयू-30 एमकेआई विमान के लिए लंबी दूरी की डुअल बैंड इंफ्रारेड इमेजिंग सर्च एंड ट्रैक सिस्टम (आईआरएसटी) के डिजाइन और विकास की स्वीकृति दी और बाद में ‘बाय (इंडियन) आईडीडीएण श्रेणी के अंतर्गत 100 आईआरएसटी खरीद के लिए स्वीकृति दी.
- यह प्रणाली दिन और रात दोनों समय कार्य करेगी और विमानों की क्षमता में वृद्धि करेगी.
- इन स्वीकृतियों के साथ अकेले पिछले आठ महीनों में डीएसी ने पूरे उत्साह के साथ सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के काम को आगे बढ़ाया है और स्वदेशीकरण पर बल दिया है.
लगभग 43,844 करोड़ रुपये मूल्य के उपकरण खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसमें से 32,253 करोड़ रुपये के उपकरण भारत में बनाए जाएंगे.
रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी):
देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए 11 अक्टूबर 2001 को रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई. रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी.
रक्षा धिग्रहण परिषद का उद्देश्य:
रक्षा धिग्रहण परिषद का उद्देश्य मांग की गई क्षमताओं के संदर्भ में सशस्त्र बलों के अनुमोदित आवश्यकताओं की शीघ्र खरीद, और आवंटित बजटीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करके, निर्धारित समय सीमा को सुनिश्चित करना है.
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