भारत के पड़ोसी राज्य श्रीलंका में 05 मार्च 2018 को अगले 10 दिनों के लिए आपातकाल लागू किया गया है. श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों से हो रही हिंसा के बाद यह आपातकाल लागू किया गया है. सांप्रदायिक हिंसा देश के अन्य इलाकों में फैलने से रोकने के लिए कैबिनेट ने यह निर्णय लिया.
मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए जब कैंडी शहर में एक बौद्ध समुदाय का व्यक्ति मारा गया और मुस्लिम व्यापारियों की दुकानों को आग लगा दी गई. इससे उस क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी जिसके चलते कर्फ्यू लगा दिया गया. विदित हो कि श्रीलंका में लगभग 75 प्रतिशत आबादी बौद्ध सिंघली समुदाय की है जबकि 10 प्रतिशत मुसलमानों की आबादी रहती है.
कुछ संगठनों ने इस हिंसा के लिए राष्ट्रवादी बौद्ध संगठन बोडू बाला सेना (बीबीएस) ग्रुप को जिम्मेदार ठहराया है. दावा किया जा रहा है कि ये लोग मुसलमानों के स्वामित्व वाले दुकानों और मस्जिदों पर हमले कर रहे हैं.
श्रीलंका में आपातकाल का मुख्य कारण?
मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हफ़्ते भर पहले ट्रैफिक रेड लाइट पर हुए झगड़े के बाद कुछ मुसलमानों ने एक बौद्ध युवक की पिटाई की थी जिससे उस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बौद्ध युवक की मौत की खबर भी बताई जा रही है जो हिंसक विरोध का कारण बना.
श्रीलंका में बौद्ध समुदाय और मुस्लिमों के तनाव का इतिहास?
मध्य एशिया, शिनजियांग, अफगानिस्तान और पाकिस्तान 7वीं-11वीं शताब्दी में इस्लाम के आने से पहले बौद्ध बहुल आबादी वाले देश रहे थे. यह देखा गया है कि जिन देशों में मुस्लिमों की आबादी बढ़ी वहां बौद्ध समुदाय की आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गयी.
श्रीलंका में बौद्ध समुदाय और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का इतिहास 20वीं शताब्दी में 1915 के उस समय से माना जाता है जब बौद्ध पुनर्जागरण आरंभ हुआ. श्रीलंका की स्वतंत्रता के पश्चात् राजनैतिक कारणों से श्रीलंका में सिंहला-बौद्ध समुदाय का उदय हुआ. इसके उपरांत 1956 में श्रीलंका में ‘सिंहला ओनली’ एक्ट लाया गया जिसके परिणामस्वरूप तमिल भाषी तथा अंग्रेजी बोलने वाले लोगों ने इसका विरोध आरंभ कर दिया. इस कानून के अनुसार देश की राष्ट्रभाषा सिंहला ही होगी. इससे गैर-सिंहलियों को रोजगार मिलना लगभग असंभव हो गया. जो पहले से नौकरी में थे, उन्हें नौकरी से निकाला जाने लगा. यह कानून प्रधानमंत्री एसडब्ल्यूआरडी भंडारनायके द्वारा लाया गया था.
श्रीलंका में अधिकतर बौद्ध सिंहला बोलते रहे हैं जिससे तमिल बोलने वाले मुस्लिम समुदाय बौद्ध समुदाय के खिलाफ होते चले गये. जिन तमिलों ने देश की प्रगति में भागीदारी की, उन्हीं तमिलों को बहुसंख्यक सिंहला समुदाय अपना मानने के लिए तैयार नहीं हुआ. बौद्ध समुदाय का मानना था कि तमिल बोलने वाली मुस्लिम आबादी के कारण बौद्ध समुदाय की आबादी समाप्ति के कगार पर पहुंच जाएगी.
प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2050 तक बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या और दुनिया की पूरी आबादी में उनका प्रतिशत दोनों में ही गिरावट होने का अनुमान है. दुनिया भर में बौद्धों की आबादी 488 मिलियन से घटकर 486 मिलियन हो जाने का अनुमान लगाया गया है. वहीं वैश्विक आबादी में भी इनकी हिस्सेदारी में 7 से 5 फीसदी की कमी आ सकती है.
पृष्ठभूमि
श्रीलंका की आबादी लगभग दो करोड़ दस लाख मुस्लिम लोग हैं जिनमें 75 प्रतिशत बौद्ध हैं और 10 प्रतिशत मुसलमान हैं. श्रीलंका में जून 2014 में भी मुस्लिम विरोधी प्रदर्शन हुए थे जो बाद में हिंसात्मक हो गये और अलुथगमा हिंसा में काफी लोग मारे गए. राष्ट्रपति एम सिरीसेना ने 2015 में सत्ता में आने के बाद मुस्लिम विरोध अपराध को लेकर जांच शुरू करवाई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई खास प्रगति नहीं देखने को मिली. श्रीलंका में कट्टरपंथी बौद्धों ने एक बोडु बला सेना भी बना रखी है जो सिंहली बौद्धों का राष्ट्रवादी संगठन है.
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